गुरु मा प्रसन्नमति माताजी सद्विचार
परम पूज्य आर्यिका 105 प्रसन्नमति माताजी ने पाप पुण्य का वर्णन बहुत ही सरलीकरण के समझाया है।
माताजी पाप पुण्य का वर्णन करते हुए बताती हैं कि पुण्य किसी को दगा नहीं देता और पाप किसी का सगा नहीं होता।
जो कर्म को समझते हैं उन्हें धर्म समझने की जरूरत नहीं है क्योंकि कर्मों के उतराधिकारी हम स्वयं ही होते हैं
