जागते हुए व्यक्ति का एक क्षण भी कीमती है प्रमाण सागर महाराज
बांसांतरखेड़ा
परम पूज्य मुनिश्री 108 प्रमाण सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा 108 प्रमाण सागर महाराज ने रविवार की बेला में कहा कि हमारे जीवन में एक अच्छा अवसर है, जो मिला है उसमें अक्सर ढूंढने का प्रयास करें। सज्जन बनकर जीने का अवसर आपके पास है। आपको साधु संत त्यागी की सेवा का अवसर मिल रहा है, यह कम नहीं है। हर क्षण एक अवसर बनकर आया है, नुकसान से भी हम सीखें यह सकारात्मक सोच है।
उन्होंने कहा कि हम सब खुद की वजह से दुखी हैं, दृष्टि विकसित कर लो तो दुख में भी सुख दिखेगा। यह अवसर मिल रहा है कि संत समागम मिला है, यहअवसर है।





महाराज श्री ने कहा कि जागते हुए का एक क्षण भी कीमती है। प्रभु शरण में जीवन धन्य हो जाता है। महाराज श्री ने आगे कहा कि गुरु चरणों में हमेशा शरणार्थी बनकर आओ, जागृत आत्मा पल में आगे बढ़ जाती है। ताल ठोककर कार्य करो। जीवन को मंदिर बनाओ, परमार्थ में लगा दोगे तो जीवन में अमर बन जाओगे। अच्छे काम को तत्काल कर डालिए, अवसर मिला है लोगों की सेवा करने का।
उन्होंने कहा कि यह आत्मा को पवित्र बनाने का अभिनव प्रयोग है। हम जैसी भावना भाते है, वैसा होता है। आज के वर्तमान परिपेक्ष पर बोलते हुए महाराज श्री ने कहा कि आज व्यक्ति मानसिक तनाव और चिताओं से ग्रसित है। टेंशन के कारण अनेक रोग जैसे डायबिटीज, हृदय रोग, बीपी को आमंत्रित कर केवल मन से ही नहीं तन भी अस्वस्थ बना लेते हैं। यह तनाव से उबरने के लिए सकारात्मक भावना जुड़ने के लिए योग एक महाऔषधि है। यह मन को सहज शांति देता है। महाराज श्री ने कहा कि तन की बीमारी को कभी मन पर हावी मत होने देना, मैं स्वस्थ हूं, मैं मस्त हूं, यह कमांड मन को दें। फिर देखें आपके अंदर बदलाव आएगा। दवा भी तभी काम करती है जब आपका मन साथ होता है। जब तकलीफ हो तो भी यदि आपने तकलीफ को महसूस नहीं किया तो शरीर में स्फूर्ति बनी रहेगी। मन वचन तन और आत्मा की शक्ति हम लोगों के पास रोज आती है। जिसके पास जितना अधिक बल होता है, वह उतने अच्छे तरीके से अपनी शारीरिक क्रियो को कर लेता है, तन को स्वस्थ, मन को मस्त और आत्मा को पवित्र बनाने का योग अभिनव प्रयोग है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
