स्मृति के झरोखे से अपनी जन्मभूमि पर विराट सागर महाराज ने कहा था शिक्षा के बिना धर्म का प्रचार असंभव है
हाटपिपलिया
पूज्य मुनि श्री विराट सागर महाराज जब दीक्षा के बाद अपनी जन्मभूमि नगर हाटपिपलिया आए थे तब उन्होंने शिक्षा को धर्म के प्रचार के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा था कि
शिक्षा के बिना धर्म का प्रचार करना असंभव है।इस पर विशेष प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा था की एक शिक्षक ही होता है जो छात्र को यह ज्ञान देता है कि धर्म क्या है। शिक्षक नहीं होता तो शिष्य को यह ज्ञात कौन करवाता कि धर्म क्या है।

पूज्यश्री ने संत निवास में अपनी पियूष वाणी से कृतार्थ करते हुए धर्म को जीवन का अभिन्न अंग बताते हुए कहा था कि धर्म के बिना जीवन असंभव है। एवम सभी धर्मो को समान बताते हुए कहा था कि वे सभी धर्म का सम्मान करते हैं।

एक उदाहरण के माध्यम से पूज्यश्री ने शिक्षा का महत्व भी समझाया था की एक छात्र स्कूल जाता है तब उसे कुछ भी ज्ञात नहीं होता है। जब वह शिक्षक के संपर्क में रहता है तब उसे किताबों के माध्यम से सारा ज्ञान प्राप्त होता है। उन्होंने शिक्षक का जीवन में महत्व बताया था और कहा था की एक शिक्षक शिष्य को सारा ज्ञान शिक्षा के केंद्र से देता है।

और इस अनुपम बेला में स्मृति को हम पटल पर लाते हुए बता रहे हैं की इस बेला में पूर्व मंत्री दीपक जाेशी बुधवार काे मुनिसंघ के दर्शन करने आए थे। उनसे आशीर्वाद लिया था और चर्चा भी की थी।
इस दाैरान संतश्री ने उनसे कहा था कि कहा कि आईटीआई कॉलेज नगर के लिए एक धरोहर है। इसमें पढ़ने वाले छात्रों को शिक्षा द्वारा ज्ञान प्राप्त होगा। । इस अवसर पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक पटेल, बंसी तंवर, भाजपा नगर अध्यक्ष नीलकंठ जोशी, श्याम तंवर, हरीश बंजारा, निखिल पाटनी, नीरज कासलीवाल, मनोज जोशी, गौरव चंद्रवाल ने भी आशीर्वाद लिया था।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
