“संतान कर्तव्य निष्ट होगी तो पितृभक्ति अपने आप प्रकट होती है” -मुनिश्री प्रमाणसागर
भोपाल (अवधपुरी)
“पिता यदि बेटे को अच्छे संस्कार न दे, तो बेटे का भविष्य बिगड़ता हे,ओर बेटा योग्य होंने के बाद भी अपने पिता को वृद्धाश्रम भेज दे तो पिता का भविष्य बिगड़ता है” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने प्रातःप्रवचन सभा में व्यक्त किये। उन्होंने “कर्तव्य और परिणाम” की चर्चा करते हुये कहा कि मां बाप का कर्तव्य है, कि वह संतान को जन्म दे उनको अच्छे संस्कार दे उनका अच्छे से लालन पालन करके उनको अपने पैरों पर खड़ा करें, लेकिन यदि यह सोचकर आप संतान को बडा़ कर रहे है कि कल यह बुढ़ापे में हमारे काम आएगा तो आपको बैचेनी होगी।
मुनि श्री ने कहा कि अपने कर्तव्य को कर्तव्य मानकर चलो उसके परिणाम की चिंता मत करो मुनि श्री ने कहा कि आजकल यह मनोवृत्ति बढ़ गई है कि मेरे अधिकार क्या है? वह अपने फंडामेंटल राईट्स के विषय में सभी बात करते है लेकिन कर्तव्य के बारे में नहीं सोचते आज इसीलिए फाईट है,

मुनि श्री ने कहा कि हमें इस सोच को बदलना होगा”सामने वाले के प्रति मेरा कर्तव्य क्या है?और मेरे प्रति सामने वाले का अधिकार क्या है? उन्होंने कहा कि अधिकार की दृष्टि से देखा जाए तो रामचंद्र जी तो पूरी तरह अयोध्या के राजा बनने के अधिकारी थे संपूर्ण जनमत उनके साथ था लेकिन बेटे ने पिता के प्रति अपने कर्तव्य को निभाते हुये अपने अधिकार की तिलांजलि दी और कर्तव्य का पालन किया।

मुनिश्री ने कहा कि “रामायण” में कर्तव्य को प्रमुखता दी गई और महाभारत में अधिकार को” यही अंतर है और यही भावना बदलना है। मुनि श्री ने कुछ पक्तियां बोलते हुये कहा कि “कर्तव्यों की हीनता,
अधिकारों का नर्तन, कल और आज में बस इतना परिवर्तन” उन्होंने पारिवारिक संबंधों की चर्चा करते हुये कहा कि यदि सभी लोग प्रेम से रहें और एक दूसरे के सहयोगी बनें सदभावना और सौहार्द के साथ जियें तथा सभी अपने अपने कर्तव्य का पालन करेंगे तो जीवन में आनंदआएगा लेकिन इसके विपरीत कर्तव्य से विमुख होकर एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा,ईर्ष्या वैमनस्य की भावना आ जाये तो जीवन खत्म ।

मुनि श्री ने कहा कि बात कर्तव्य और परिणाम को लेकर आज के प्रोफेशनल लोगों की चर्चा करते हुये कहा कि कही लोग आकर कहते है कि मैं जितना कार्य करता हुं उसका रिजल्ट मुझे नहीं मिलता करता मैं हुं और क्रेडिट कोई ओर ले जाता तो मेंने उससे कहा कि तुम इसलिये काम मत करो कि तुम्हारा बॉस खुश हो तुम खुश होकर के काम शुरु कर दो सब खुश होंगे।

आपअपने पुरुषार्थ पर ध्यान दो उसके परिणाम की चिंता करना बंद कर दोगे तो आपके जीवन में बदलाव घटित होगा और जीवन में सुखी रहोगे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
