धर्म उपदेश सुनकर, ग्रहण कर जीवन में धारण करना चाहिए आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज

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धर्म उपदेश सुनकर, ग्रहण कर जीवन में धारण करना चाहिए आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज
उदयपुर
पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज संघ सहित संतोष नगर दिगंबर मंदिर में विराजित है ।आज आयोजित धर्म सभा में उन्होंने बताया कि धर्म सभा में श्रोता को अनेक सावधानी का पालन कर धर्म सभा में भाग लेना चाहिए ,आचार्य श्री ने बताया श्रोता के मन में सुनने की ललक इच्छा होना चाहिए अक्सर देखने में आया कि धर्म चर्चा धर्म उपदेश के समय लोग आपस में बातचीत करते हैं कुछ मोबाइल में व्यस्त रहते हैं कुछ नींद निकालते हैं मोबाइल की घंटी बजने से व्यक्ति का उपयोग बदल जाता है इसलिए धर्म सभा में सुनने की इच्छा होना चाहिए प्रवचन तो आप सुन रहे हैं किंतु अगर ग्रहण नहीं कर रहे हैं जैसे आए प्रवचन सुना वैसे वापस चले गए तो इससे कुछ लाभ अर्जित नहीं होगा प्रवचन सुनने आए भी हैं श्रवण कर भी रहे हैं किंतु अगर ग्रहण नहीं कर रहे हैं तो उससे कोई फायदा नहीं है और प्रवचन ग्रहण करने के बाद धारण करना अर्थात जीवन में अपनाना चाहिए प्रवचन सुनने ग्रहण करने से जीवन में परिवर्तन आना चाहिए।

 

ब्रह्मचारी गजू भैय्या राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य शिरोमणी श्री वर्धमान सागर महाराज ने तीन मूर्ति का उदाहरण देते हुए बताया कि एक मूर्ति में धागा डाला गया तो वह मुंह से निकल गया, दूसरी मूर्ति में जब धागा डाला गया तो वह एक कान से धागा डाला गया तो दूसरे कान से बाहर निकल गया ,तीसरी मूर्ति में कान से जब धागा डाला गया तो वह पेट में जाकर रह गया अर्थात मूर्ति के उदाहरण से आचार्य श्री ने बताया कि धर्म सभा में प्रवचन कान से सुनकर पेट में रहना चाहिए अर्थात धर्म की वाणी सुनकर ग्रहण करना चाहिए।

 

13 जून को होगा बीसा हूमड धर्मशाला में आगमन
सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष शांति लाल वेलावत एवम् सुरेश पद्मावत सचिव ने बताया कि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज का भव्य मंगल प्रवेश संतोष नगर से सुरजपोल, बापू बाजार, देहलीगेट, चितोडा मंदिर,मंडी की नाल, धान मंडी,मार्शल चौराहा, तेलीवाड़ा होते हुए बीसा हुमड धर्मशाला में आगमन होगा।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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