जिनवाणी को कभी पढ़ते ही नहीं हो इसी कारण आपको इधर-उधर भटकना पड़ रहा है आचार्य श्री विद्यासागर महाराज
डोंगरगढ़
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा आयु के पूर्ण होने पर मरण होना निश्चित होता है हम कितनी भी चिकित्सा आराधना कर ले कोई भी काम नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि आप उपाय बताएं महाराज आप अपना जीवन अपने हिसाब से चला रहे हैं। उन्होंने जीवन के यथार्थ सत्य को बताते हुए कहा कि यह संसार बहुत बड़ा है इसमें जिस का भी जन्म हुआ है उसकी मृत्यु का टिकट ऊपर से निर्धारित है।
पूज्य आचार्य भगवंत ने भाग्य के विषय में बोलते हुए कहा कि आपका भाग्य यदि नहीं होगा तो आपकी जो जमा पूंजी है वह भी दूसरा ही भोगेगा। यही संसार है और यही संसार की यात्रा है। उन्होंने ससारी प्राणी को धन्य कहते हुए कहा कि आप जीवन निवृत्त होकर भी सब कुछ कर लेते हैं। आप लोग अकेले बैठ कर रो भी लेते हैं। उन्होंने सीख देते हुए कहा कि यदि ऐसा कर भी लेते हैं तो किसी को बताना नही। आप सभी लोग दूसरे के दुख की ही बात करते हैं लेकिन पहले अपने दुख को देखो और इसी का नाम विनय धर्म है। पूज्य श्री ने ध्यान इंगित करते हुए जिनवाणी के विषय में कहा कि आप लोग जिनवाणी को अलमारी में अच्छी तरीके से जमा देते हो उसे नमस्कार भी कर लेते हैं लेकिन उसे पढ़ते कभी नहीं है यही कारण है कि आपको इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
कर्म के फल के कारण ही कभी धूप तो कभी छांव होती है आचार्य श्री
पूज्य आचार्य श्री ने बुधवार के अपने मंगल उद्बोधन में मंगलवार की गर्मी को शताब्दी की सबसे ज्यादा वाली गर्मी का दिन बताते हुए कहा की यह दिन शताब्दी का सबसे अधिक गर्मी का दिन लग रहा था। और कहा कि लगभग 48 घंटे लगातार शरीर से पसीना ही पसीना आ रहा था। संध्या होती ही हवाई चली और काले काले बादल छा गए। जो गर्जन कर रहे थे लेकिन बिजली की चमक के साथ वर्षा हो गई और सर्व वातावरण ठंडा हो गया। इस पर उन्होंने विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि आज आप लोगों को ठंडक का अनुभव हो रहा है। 48 घंटे की गर्मी को सहन करने के बाद ही यह ठंडक का आनंद हो रहा है। ऐसा ही कर्म फल होता है कभी धूप तो कभी छांव।
संकलित अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
