गुरु के शब्द वहीं है, भाव वही है, जितनी बार नमोस्तु करेगा हर बार आशीर्वाद नया मिलेगा सुधासागर महाराज

धर्म

गुरु के शब्द वहीं है, भाव वही है, जितनी बार नमोस्तु करेगा हर बार आशीर्वाद नया मिलेगा सुधासागर महाराज

अशोकनगर

राग का पता नही चलता द्वेष में व्यक्ति कोमा में चला जाता है। ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है इससे बचें।राग ब्लड प्रेशर को शांत कर देता है। राग में ब्लड प्रेश नहीं बढ़ता है, द्वेष व्यक्ति ज्यादा देर नहीं कर सकता। राग भव भवों तक करता रहता है इसलिए धर्म को वीतरागी कहा है मुनि वीत द्वेषी नहीं है। 

 

 

 

 राग छोड़ने को कहा गया है। द्वेष तो ज्यादादेर तक नहीं रहेगा राग को छोड़ना बहुत कठिन है।राग कब बढ़ता चला जाता है पता ही नहीं चलता ।अपने गुरु से कल्याण होगा। गुरु के मुख से निकली हर बात नई-नई लगती हैं। शब्द वही है भाव वहीहै, जितनी बार नमोस्तु करेगा हर बार आशीर्वादनया आशीर्वाद की अनुभूति होगी । तुम्हारे लिए हर नमोस्तु में आशीर्वाद प्राप्त होता है तो जैसे ही नमोस्तु किया तो एनर्जी मिलना शुरू हो जाएगी।उक्त धर्म उपदेश सुभाषगंज मैदान में विशाल द्वादश वार्षिक पाठ्यक्रम संगोष्ठी को संबोधित करते हुएमुनि पुगंव श्री सुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किए।

 

परम पूज्य गुरुदेव ने कहा कि हम दुख के कारणों को जानकर उनसे बचने का उपाय सोचते हैं। भगवान की भक्ति करते हुए 48 बार भक्तामर कापाठ, 40 बार चालीसा का पाठ कर रहे हैं। दुख कोदूर करने के लिए ये सब करते रहते हैं। कोई सुखी व्यक्ति दिन में 48 बार भक्तामर जी का पाठ करें तब बात है, मिट्टी अच्छी लगती है बालक को न उसके लिए जिनवाणी मां चाहिए। निम्बोली कड़वी- होती है वो बालक नहीं खाता। क्रोध अग्नि है द्वेष है न उसके कारण सबको बुरा लग रहा है। क्रोध स्वयं को बुरा करने वाले को भी बुरा देखने वाले को भी बुरा लगता। राग स्वयं को अच्छा करने वाले को भी अच्छा देखने वालों को भी अच्छा लगता है। रागकरने वालों के लिए धर्म की जरूरत है उनके लिए धर्म स्वाध्याय की जरूरत है अमीर को धर्म कीजरूरत है गरीब को धर्म की जरूरत उतनी नहीं।

 

 

जीवन में धर्म की जरूरत हमेशा है दिन में करें या रात में करें

मुनि श्री ने कहा कि जीवन में जो अनिष्टकारी है उससे धर्म ही बचाएगा। जीव को दुखों से, कांटों से धर्म बचाएगा। धर्म की जरूरत हमेशा है दिन में करें रात में करें। सब जानते हैं किसे फूल बिछते है। धर्म कहता है वहा सावधान रहे क्योंकि, कांटों में तो धर्म सभी करते हैं, गुरु की भी जरूरत नहीं होती। सावधान करने की गरीबी में जरूरत नहीं।

 

क्योंकि गरीब शराब जुआ आदि पाप नहीं कर सकता। अमीर को धर्म की जरूरत है क्योंकि वह धन से सब कुछ शराब जुआ आदि करेगा। उन्होंने कहा कि भगवानों से जगत का कल्याण नहीं होगा अपने भगवान से अपना कल्याण होगा ऐसे ही गुरु से नहीं अपने गुरु से कल्याण होगा।

 

        संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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