वृहद शिक्षक सेमिनार समारोह मुनि श्री प्रज्ञान सागर महाराज सानिध्य में हुआ संपन्न
नैनवा
20 सितंबर शनिवार2025 शांति वीर धर्मशाला में 2:00 बजे शिक्षक सेमिनार के प्रारंभ में मंगलाचरण की प्रस्तुति श्रीमती वर्षा जैन शाह और श्रीमती सोनम सेठिया के द्वारा की गई। श्रीजी के समक्ष दीप प्रज्वलित करने का सौभाग्य कमल कुमार मारवाड़ा बाल ब्रह्मचारी अमन जैन कोटा के वक्ता डॉ मनोज जैन निर्देशक द्वारा हुआ।
सेमिनार में रविंद्र कुमार मारवाड़ा ने अपने उद्बोधन में कहा शिक्षकों का व्यवहार छात्रों के साथ बहुत ही अपनापन जैसा होना चाहिए स्वयं का शिक्षा का खान-पांच शुद्ध होने पर छात्र को शिक्षा दे सकते हैं गुटका सिगरेट गलत व्यसन स्वयं को छोड़ने पर ही हम दूसरों की शिक्षा दे सकते हैं सभी छात्र अपने जीवन उतार सकते हैं।

रामपाल जैन अध्यापक गोयल देने बताया अनुशासन संस्कार जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण है उनको जिवन में उतार कर ही अपनी पहचान बना पाते हैं सबसे बड़ी शिक्षिका घर पर मां होती है पढ़ने वाली शिक्षकों के वेशभूषा संस्कृत होना बताया साड़ी पहन कर माताएं आदर्श में होती है पेंट जींस संस्कारी ड्रेस नहीं है संस्कारी जीवन अध्यापकों को संस्कार बहुत अच्छे होना चाहिए स्कूली बच्चों को अध्यापक अच्छे संस्कार देने पर ही उनका भविष्य उज्जवल होगा
निदेशक डॉक्टर मनोज जैन कोटा ने बताया
स्कूल में बच्चों को शिक्षक पढ़ाते हैं बच्चों के माता-पिता उनकी पढ़ाई पर ध्यान देवे अच्छा विद्यार्थी बनाकर अपना नाम रोशन जब भी करेगा जब माता-पिता का बच्चों की तरफ ध्यान होगा 
छोटे बच्चों के सामने अध्यापक गलत वस्तुओं का प्रयोग ना करें गुटका बीड़ी सिगरेट शिक्षकों को छोड़ना चाहिए ताकि बच्चे उन्हें देखकर अपने जीवन में न उतारे।
बाल ब्रह्मचारी नमन भैया ने बतायाशिक्षक मात्र पैसा नहीं है यह तपस्या है अध्यापक संसार में ज्ञान देने वाले होते हैं वह अध्यापक हैं और जो जीवन जीने की कल बताते हैं वह गुरु होते हैं जिनकी भावना आत्मक जीवन राष्ट्र समाज के प्रति आध्यात्मिक बने जाम स्कूल में पढ़ते हैं बच्चों में धर्म दया करने की भावना उत्पन्न हो 

मां बच्चे बीमार होने पर उन्हें कड़वी दवा और दी जाती है उसी प्रकार भगवान महावीर ने बताया अहिंसा परमो धर्म ही भावना बताएं वह किसी भी धर्म का बच्चा हो उसे धर्म के बारे में जरूर समझाएं इंजीनियर के द्वारा बने गलत पुल बनने पर हजारों लोग बे मौत मारे जाते हैं ।
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एक अध्यापक गलत होने पर पूरा देश राष्ट्र का नाश हो जाता है बच्चे कच्ची मिट्टी के समान है जैसा चाहेंगे वैसा वो बन जाएंगे गुरु को देखकर ही उनके आंचल छात्र अपने जीवन में उतरता है ।
अध्यापक गुरु में बहुत अंतर बताया है आज्ञा से ज्ञान की ओर ले जाने वाले गुरु ही होते हैं स्कूलों में मर्यादा पूरे कपड़े पहन कर जावे भारतीय संस्कृति का बहुत बड़ा उल्लंघन होता है कपड़े अपने स्वयं की पहचान होते हैं प्रत्येक अध्यापक को अपने करैक्टर चरित्र पर बहुत ध्यान देना चाहिए बच्चों के साथ मित्रता जैसा व्यवहार होना चाहिए बच्चे टीचर से भयभीत न हो अध्यापक और छात्र का एक दोस्त की तरह रिश्ता हो तभी खुलकर अध्यापक से बात कर सकता है ।
स्कूली किताबों के साथ-साथ उन्हें धर्म का ज्ञान देना भी बहुत जरूरी है चाहे छात्र के सभी धर्म को मानने वाला हो लेकिन उसे अहिंसा धर्म का पाठ जरूर पढ़ाया जाए अच्छे विचार जब भी उत्पन्न होंगे बच्चों को पढ़ने के तरीके किताब विज्ञान के साथ-साथ धार्मिक ज्ञान देना भी बहुत जरूरी बताया।
अंधेरे से प्रकाश में ले जाने वाले संत होते हैं
प्रसिद्ध सागर महाराज ने बताया की छोटे बच्चों को अच्छे संस्कार देने पर ही जीवन भर संस्कार उसके साथ रहते हैं उन्हें अंधेरे से प्रकाश में ले जाने वाले संत होते हैं छोटे बच्चों को जो ज्ञान प्राप्त होगा वह जीवन पर ज्ञान उसके साथ में रहेगा वह संसार में भटक गया तो जीवन भर अज्ञान में भटक जाएगा
प्रज्ञान सागर महाराज ने बताया कि हमने आज जो अध्यापकों का सेमिनार बुलाया है उसके पीछे हमारा यही महत्व है कि अध्यापक स्कूल में बच्चों को अच्छे-अच्छे संस्कार देकर उन्हें भाभी नागरिक बनाएं उन्हें गलत वश में से दूर रखें उन्हें वह शिक्षा दें कि वह एक सभी नागरिक बनकर समाज राष्ट्रीय देश की सेवा कर सकेसेमिनार का संचालन मोहनलाल जैन मारवाड़ा द्वारा किया गया
महावीर कुमार सरावगी चातुर्मास प्रचार मंत्री से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312



