आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में दो दिवसीय दाम्पत्य सेमिनार का हुआ शुभारभ
रामगंजमंडी
परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज संघ सानिध्य में श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दो दिवसीय दाम्पत्य सेमिनार का शुभारभ हुआ जिसका शुभारभ आचार्य श्री 108 विराग सागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। दीप प्रज्वलन संरक्षक अजीत सेठी, अध्यक्ष दिलीप विनायका, उपाध्यक्ष चेतन बागड़िया, उपाध्यक्ष कमल लुहाड़िया मंत्री राजीव बाकलीवाल द्वारा किया गया उसके बाद सभी सेमिनार बंधुओ प्रार्थना की जो मुनि श्री 108 प्रत्यक्ष सागर महाराज के श्रीमुख से हुई समारोह का कुशल संचालन जानी मानी मोटिवेशनल स्पीकर श्रीमती सुधा चौधरी विदिशा ने किया। इस सेमिनार में सक्रिय सहयोग युवा आदर्श जैन, आदिश जैन, आशीष जैन एवम नानू भैया का रहा।
इस अवसर मुनि श्री श्री 108 प्रांजल सागर महाराज ने कहा की अपने आप को कंट्रोल नहीं कर सकते तो हम दूसरों को कंट्रोल में नहीं रख सकते एक पिता को अपने बच्चों से ही उम्मीद होती है कि मेरा बच्चा मेरी बात माने मेरा सहारा बने। जिस बच्चे को आपने मेहनत से पालन पोषण किया बालक को गोद में लेकर देखभाल की उससे आपको उम्मीद होती है कि बड़ा होकर वह मेरा ध्यान रखें।

यदि अपनी वृद्धावस्था को व्यवस्थित करना है तो बच्चों का एक करोड़ का पैकेज मत देखिए बच्चों को अपने पास रखिए।
संचालन करते हुए सुधा चौधरी ने कहा कि जो भावुक कर गया
100 दफा कह चुके हो पाला है पोसा है
क्या अनोखा कर दिया हमारे वास्ते
बच्चे यदि अपने मां बाप से कहते हैं ऐसा कौन सा अहसान कर दिया पाला है पोसा है दुनिया पालती है पुत्रों को यह स्मरण करना चाहिए कि उन्होंने अनोखा ही किया है तुम्हारी कॉलेज फीस देने के लिए कितने दिन अपनी सब्जियों में कटौती की थी। सर्दी खत्म होने के बाद भी अपनी शर्ट की फटी जेब होने के कारण स्वेटर पहने रहते थे। उन्होंने कहा से श्रवण कुमार मत बनिए जो अपने माता-पिता को कंधे पर ले जाए लेकिन ऐसे तीर्थ यात्री बनिए की भगवान के बाद यदि झुके तो माता-पिता के चरणों में झुके।

तुम्हारे पास बुद्धि नहीं है लेकिन एगो है आचार्य श्री
आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने प्रथम सत्र में कहा कि आपके पास सब कुछ नहीं है फिर भी एगो अहंकार इतना है वह मान सम्मान की भावना स्थाई रूप से बनी हुई है। उन्होंने कहा हमने जो मेहनत की रात रात भर पढ़ा है हमने इसलिए पढ़ा कि बुद्धि का सही प्रयोग करने के लिए। हम इसलिए सीख रहे की कबाड़खाना न बन जाएं हमारी सोच भी कबाड़खाना हो सकती है अगर हम सावधानी रहे रखते विचार करना चाहिए कि किसी भी अपेक्षा से हम कबाड़खाना न बने।
आपका दायित्व होना चाहिए कि परिवार को जोड़कर चलें
आचार्य श्री ने कहा कि आपका दायित्व होना चाहिए कि परिवार को लेकर साथ चले परिवार को जोड़कर रखें घर को यदि कबाड़खाना न बनाकर यदि स्वर्ग बनाना है तो सबको जोड़कर चलना होगा एक कहानी के माध्यम से समझाया। महिला का कर्तव्य होता है कि परिवार को जोड़कर रखें।
हम का व्यवहार भूल गए हो मैं का व्यवहार शुरू हो गया है
आचार्य श्री ने कहा कि हम हमारे कर्तव्य में हम का व्यवहार भूल गए हैं और में का व्यवहार शुरू हो गया है नहीं मैंने किया है परिवार ने नहीं किया है। अगर प्रेक्टिकल करके देखें तो जो मां ने सिखाया है वह सांस नहीं सिखा सकती और जो सास सिखा सकती है वह मा नहीं सिखा सकती।



एकल परिवार का युग मतलब परेशानी का युग
आचार्य श्री ने एकल परिवार पर कड़ी चिंता व्यक्त की कहा कि एकल परिवार का मतलब बताते हुए कहा कि एकल परिवार का मतलब परेशानियां होती हैं एकल परिवार में बहुत परेशानियां होती है। और एकल परिवार में धर्म ध्यान नहीं हो सकता और एकल परिवार में धर्म की हानि ज्यादा होती है। उम्र के साथ-साथ यदि उम्र बढ़ रही है तो बेहतर होना चाहिए। त्याग की भावना बननी चाहिए
दोपहर के सत्र में प्रांजल सागर महाराज ने दंपत्ति जीवन भर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोई भी कार्य पति पत्नी करें दोनों साथ रहे यह दोनों का कर्तव्य है और यह भी होना चाहिए कि कैसी भी परिस्थिति होगी हम दोनों साथ रहेंगे। उन्होंने कहा कि पति पत्नी को एक दूसरे के प्रति वफादार होना चाहिए हर बात एक दूसरे को बता दे और शेयर करें। यदि दंपत्ति जीवन सुखी रखना है तो परिवार में जिम्मेदारी निभाना आना चाहिए जितने भी आपके संबंधी हैं उनको निभाना आना चाहिए सबको लेकर चले। इसी के साथ उन्होंने संतान के पालन पोषण पर भी जोर दिया और कहा कि उनका पालन पोषण अच्छे से करें उन्होंने भ्रुण हत्या पर भी प्रहार किया और कहा समस्या आने पर बच्चे की भ्रूण हत्या कर देते इतना बड़ा पाप कर देते हैं। पति पत्नी को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए।
आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने संस्कारों पर जोर दिया उन्होंने कहा बच्चों पर संस्कार की दृष्टि माता पिता से जाती है। मन अच्छा सोच पा रहा है अच्छा देने वाला है। माता पिता ने जो बच्चे को संस्कार दिए हैं इस कारण है।
भौतिकवादी युग में बच्चे का मन पूजा अभिषेक करने का बन जाए तो यह भावनाएं उस समय ही आ जाती है जब हम झूला झूल रहे थे और ठीक से चल भी नहीं पाते थे। यह सारे भाव उस समय के हैं।
उन्होंने माता शत्रु पिता बैरी के संदेश माध्यम से कहा कि यदि माता पिता अपने बच्चों को संस्कार नहीं देते हैं तो आप शत्रु बैरी से कम नहीं हैं। माता पिता को बच्चों से हिसाब लेना चाहिए और कंट्रोल बच्चों पर होना चाहिए बच्चों को सुविधा देना चाहिए स्वतंत्रता भी देना चाहिए लेकिन स्वच्छंद नहीं होने देना चाहिए यदि कर दिया तो बच्चा बिगड़ जाएगा। उन्होंने माता पिता को कहा कि यह गलती मत करना कि समय से पहले बच्चे बड़े हो जाए अन्यथा बाद में पछताना पड़ता है। जो बच्चे समय से पहले बड़े जाते हैं उनका भगवान मालिक है बच्चों का समय से पहले बड़ा होना बहुत घातक है।
परिवार को जोड़कर रखना है अपना बनाना है तोसंतुष्टि तो रखनी होगी। बुराइयों से बचें यदि बुराइयों पर ध्यान देंगे तो घर बिगड़ेगा। यदि परिवार में सामंजस्य बनाना है तो संतुष्टि भी रखना सीखो आकर्षण का नियम संतुष्टि है संतुष्टि में बड़ी ताकत है सबको अपना बनाओ आने वाली पीढ़ी को संस्कार देना आपका कर्तव्य है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312






