विश्व में कोई भी देश नहीं जो श्रद्धावान न हो, सभी के कोई तो आदर्श हैं: मुनिश्री सुधासागर महाराज

धर्म

विश्व में कोई भी देश नहीं जो श्रद्धावान न हो, सभी के कोई तो आदर्श हैं: मुनिश्री सुधासागर महाराज
अशोकनगर

विश्व के अंदर कोई भी देश नहीं है जो श्रद्धावान ना हो किसी ना किसी अदृश्य शक्ति को मानते हैं। कभी पुण्य का उदय हो तो इठला सकते हैं लेकिन जैसे ही कर्म का उदय आते ही उस अदृश्य शक्ति को याद करने लगता है। ये कर्म की मार से भगवान को किसी भी रूप में सही मानते हैं। बिना इच्छा के उपदेश नहीं सकता उनकी इच्छा से हम अपने जीवन की शुरू नित्य कर्म से निवृत्त  होकर पूजन अभिषेक करें। उक्त आशय के उद्गार सुभाषगंज मैदान में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए।

 

 

 

मुनिश्री ने कहा कि मूर्तियों को नहीं मानते कोई बात नहीं भगवान को तो मानता है। भगवान ने कहा है कि इस मूर्ति में भगवान है कितनी चीजें दुनिया में है जो तुम्हारे लिए नहीं दिख रही फिर मुनिश्री भी हैं।जिनवाणी में लिस्ट है कि मेरा श्रावक क्या खायें कब खायें रात में भूख लगी है घर में भी भरपूर सामग्री रखी है लेकिन मैं नहीं खाऊंगा। क्योंकि मेरे भगवान ने कहा रात में भोजन नहीं किया और ना ही रात भुक्ति का विधान किया।

 

 

 

 

 

 

भगवान, गुरु, माता-पिता मेरी इच्छा पूरी करें
उन्होंने कहा कि आप अपने अनुभव को सिद्धांत नहीं बना सकते। आपकी जिंदगी का वह सबसे खराब दिन होगा और तब ही से आप के बुरे दिन शुरू हो जाएंगे। जब आप अपने अनुभव को प्रमाण मान रहे होंगे अनुभव प्रमाण नहीं हो सकता। एक मोटीवेशन ले कभी भी तुम्हारे लिए ये भाव आ जाएं। भगवान गुरु माता पिता मेरी इच्छा पूरी करें। अधिकांश लोग चाहते हैं। ये मेरी इच्छा पूरी करे जब भी कोई समर्थवान मिला आप ने अपनी इच्छाओं को उन पर थोप दिया जिस दिन तुम्हारे मन में भाव आ जाएं मैं अपने मां बाप की हर इच्छा करूंगा। गुरु और भगवान की हर इच्छा पूरी करूंगा।

 

भगवान जो चाहते हैं वैसा मैं बनकर दिखाऊंगा
उन्होंने कहा कि अपने बड़ों के अनुसार आपको चलना चाहिए हम चाहते हैं जो चीज हम जब चाहे तब मिले नहीं हम एक बार ये संकल्प कर लें कि भगवान जो चाहते हैं वैसा में बनकर दिखाऊंगा। भगवान रिषभ देव की इच्छा है कि मेरा श्रावक उस नियम का पालन करें तो हम करेंगे चीज बता रहे है। आपको कैसे रहना है कैसे खाना है। किस विधि से जीवन जीना है। जीवन जीना भी तो एक कला है हमारे कारण किसी को धक्का ना लगे और हमारा काम भी हो जाए सब यही तो चाहते हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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