जब तक आप अपने आप पर प्रतिबंध नहीं लगाएंगे तब तक इंद्रियों पर विराम नहीं लगेगा आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज 

धर्म

जब तक आप अपने आप पर प्रतिबंध नहीं लगाएंगे तब तक इंद्रियों पर विराम नहीं लगेगा आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज 

रामगंजमंडी 

सोमवार की बेला में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने संलेखना के विषय पर बोलते हुए कहा कि जब तक अपने आप पर प्रतिबंध नहीं लगाएंगे तब तक इंद्रियों पर विराम नहीं लगेगा। यदि ऐसा नहीं करेंगे तो यह आपको परेशान करती रहेगी शरीर को कृष करके इंद्रियों पर विराम लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जैसे ही शरीर की ताकत कम होती है। इंद्रियों का आकर्षण भी कम होता जाता है। यदि शरीर को पुष्ट करते रहेंगे तो इंद्रियों को वश में नहीं कर सकते। 

 

 

 

   स्वयं का अध्ययन करना स्वाध्याय है। 

आचार्य श्री ने स्वाध्याय के विषय में कहा कि स्वाध्याय का अर्थ होता है स्वयं को समझना यदि स्वयं को समझ लिया तो स्वाध्याय शुरू हो जाता है। स्वयं का एहसास करे स्वयं को समझ जाएं यही स्वाध्याय है यही आपका परिचय है यह मेरा है यह तेरा है यह विचार यदि होगा तो संलेखना नहीं हो सकती।

 

 

  संलेखना आसान नहीं 

आचार्य श्री ने कहा कि संलेखना आसान नहीं है उन्होंने बुजुर्गों के विषय में कहा कि 70 साल के लोग यहां बैठे हैं जिनकी आयु और बढ़ रही है वह संलेखना की ओर बढ़े उम्र बढ़ रही है सावधान होना चाहिए धर्म बढ़ाना चाहिए और कषायो को मंद करना चाहिए उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि मंदिर जाने की हिम्मत नहीं है लेकिन क्रोध करने की हिम्मत है शरीर को संभालने का भाव है लेकिन त्यागने का भाव नहीं है तो संलेखना नहीं हो सकती। विषयों की आसक्ति शरीर का श्रृंगार पहले छोड़ना होगा। उन्होंने बुजुर्गों को कहा कि यह उम्र आपकी है और धर्म उपदेश आपको सुनना चाहिए।

    उन्होंने बताया कि बालपने में ज्ञान न लहो तरुण समय तरूणी रत रहो अर्ध मृतक सम बुढ़ापनो कैसे रूप लखें आपनो इसका अर्थ समझाते हुए कहा कि बचपन को खेलकूद में गुजार दिया और कुछ समझ नहीं और जब युवा हुए तो मौज शौक में पत्नी के साथ बिता दिया और धर्म नहीं किया और बुढ़ापा अधमरे के समान हो जाता है और हमने धर्म नहीं किया।

 

उन्होंने 70,75 साल की उम्र के लोगों के लिए कहा कि 70, 75 साल के आप हो गए हैं तो संलेखना का उद्देश्य बनाकर अपने जीवन में परिवर्तन करना चाहिए।

 

समता आनी चाहिए और इस उम्र में आने के बाद पहनने खाने-पीने यदि परिवर्तन नहीं कर पाते हैं तो आप संलेखना नहीं कर पाएंगे बच्चा कुछ भी खा रहा है लेकिन आपका खान-पान आचार विचार शुद्ध होना चाहिए।                                                    अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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