इस दृश्य को देखकर समझ आ गया कि सच बेटो से बढ़कर बेटियांँ होती है
पनागर जो क्षण जो वाकया आज सभी के सामने परिलक्षित है। वह यह काव्य रचना को सार्थक रूप देता है कि ओस एक बूंद सी होती है बेटियां, जरा भी दर्द हो तो रोती है बेटियां हीरा अगर है बेटा तो सच्चा मोती है बेटियां।
जी हा पनागर नगर में एक बहुत भावुक दृश्य सामने आया पनागर निवासी श्री पदम मोदी 12 सितंबर को सम्मेद शिखर जी यात्रा पर गए थे रात्रि 1 बजे इन्होंने अपनी पत्नी मनीषा मोदी एवम मित्रो के साथ मंत्र उच्चारण कर यात्रा प्रारंभ की 3 किलो मीटर चढ़ाई के बाद अचानक साष्टांग पर्वत पर गिरे ओर पल में इनके प्राण निकल गए ये चार पुत्रियों के पिता थे और श्री पदम मोदी समाज सेवी के साथ साथ कुशल व्यापारी थे अपनी बच्चियों को संस्कार ऐसे दिए कि बेटो से बढ़कर सदैव अपनी बच्चियों को माना!!!!

जब दिनांक 15 सितंबर को इनकी शवयात्रा मुक्तिधाम के लिए निकली तो एक भावुक दृश्य सभी के सामने आया बेटी अपना कंधा देकर मुक्ति धाम तक गई प्रत्येक दर्शी का कहना है कि यात्रा में मैने देखा कि जो भी व्यक्ति इस दृश्य को देख रहा था भावुक हो जाता कंधा तो दूर बेटियां अपने पिता की अर्थी को अपने सिर पर रखकर चल रही थी !और कहा कि आज यह तो मेरे जीवन काल की परिकल्पना का सबसे भावुक पल मेने अपनी जिंदगी में पहली बार देखा ! इनकी चार बेटियां सुशीमा मानसी महिमा परी ये पिता की अर्थी पर कंधा छोड़ने तैयार नही थी।
प्रारंभ से अंत तक इन्होंने अपने पिता का साथ नही छोड़ा जो बहुत भावुक दृश्य हजारो लोगो के सामने हुआ और हर देखने वाला रो पड़ा !अवश्य ही श्री पदम ओर मनीषा मोदी के संस्कारो ने आज साबित किया कि बेटी बेटो से बढ़कर अपने पिता के लिए होती है !!

भगवान से यही प्राथना हम करते है कि जिस पावन स्थली से हमारे तीर्थकर मोक्ष गए है उसी स्थली में हमारे जीवन की समाप्ति प्रभु चरणों मे हो और अवश्य ही पदम मोदी जी की धार्मिक और सेवाभाव की प्रवृत्ति उन्हें उस तीर्थ स्थल ले गई और भगवान के श्री चरणों मे उनका देवलोक गमन हुआ जो कि लाखों में किसी एक को मिलता है!!
नमन संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी




