अच्छे कार्य के लिये बहुत धैर्य की आवश्यकता होती है,तभी अच्छे परिणाम निकल पाते है”-मुनि श्री प्रमाण सागर
भोपाल
अवधपुरी भोपाल सांयकालीन शंकासमाधान कार्यक्रम में समस्त मुनिसंघ आर्यिका संघ मंच पर विराजमान थे प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया आज का शंका समाधान आम पब्लिक के लिये न होकर अतिथी मुनिराजों तथा आर्यिका संघ के लिये समर्पित था उनके प्रश्न थे और मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज जब उन शंकाओं का समाधान कर रहे थे तो वह साक्षात समवसरण में विराजमान भगवान महावीर के लघुनंदन नजर आ रहे थे तभी प्रश्नकर्ता उपाध्याय मुनि श्री 108 विशोक सागर जी महाराज ने अपनी जिज्ञासा रखी जिसमें उन्होंने 2018 के सम्मेशिखर तीर्थ चातुर्मास की बात करते हुये कहा कि उस दौरान हमने गुणायतन में बन रहे जिन मंदिर को देखा था वह बहूत अच्छा लगा यह “गुणायतन” बनाने का मनोभाव कहा से आया? तथा वहा पर क्या प्रर्दशित किया जाना है,? जबाब देते हुये कहा कि 2018 के गुणायतन और आज के गुणायतन में बहूत फर्क आ चुका है अब आप उसकी स्टोरी सुनेंगे और उसको देखोगे तो आपका मन एक बार श्री सम्मेशिखर जी जाने का भाव बन जाएगा।
मुनि श्री ने उपाध्याय श्री के प्रश्न का उत्तर देते हुये कहा कि 2006 में श्री सम्मेद शिखर तीर्थ पर मेरे पास आठ-दस युवा ग्रेजुएट्स तथा चार्टर्ड एकाउंटेन्ट आए मेंने उनसे पूछा आप लोग कहा आऐ हो? उन्होंने कहा हम 24 तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों की निर्वाण भूमी के दर्शन करने आए है, मेंने प्रतिप्रश्न किया अच्छा बताओ निर्वाण भूमी क्या है? सभी ग्रेजुएट और सी.ऐ थे फिर भी कोई इसका उत्तर नहीं दे पाये तब मेरे अचेतन मन में यह बात आई कि यहा पर कुछ ऐसा निर्माण करके जाना है, जिससे आने वाली पीढ़ी जैन धर्म पोथियों की बात को पल भर में जान सके।
उस समय संघ में हमारा “गुणस्थान” पर स्वाध्याय चल रहा था उस समय संधान सागर जी ब्रहमचारी थे,तथा शांतिलाल बाबाजी की प्रेरणा से मेरे मन में भाव आया कि जैन धर्म में14 गुणस्थान का वर्णन है उसमें सारा तत्वज्ञान, संपूर्ण जीव विज्ञान संपूर्ण जैन दर्शन का सार समाया है,उसी समय मेरे मन में “गुणस्थान” को लेकर कार्य योजना बनी जिससे यहा पर आने वाले प्रत्येक तीर्थ यात्री को जैन धर्म ओर दर्शन का संपूर्ण ज्ञान हो सके।
और मेंने गुरुदेव से आशीर्वाद लेंने के लिये एक टीम गई गुरुजी ने आशीर्वाद दिया मेरा चिंतन तथा कार्य योजना बनाई लेकिन दस साल यानि कि 2017 तक सभी डस्टबिन में चली गयी तभी एक कार्य योजना बनी जिस पर कार्य अभी चल रहा है तथा अंतिम चरण पर है मुनि श्री ने कहा कि कोई भी अच्छा कार्य करने के लिये धैर्य रखना पड़ता है,और इसी धैर्य का परिणाम है कि श्री सम्मेदशिखर जी के गुणायतन परिसर के सामने जो अनुभव केंद्र बनने जा रहा है वह विश्व का पहला ऐसा थीमपार्क होगा जिसमें 108 मिनट की थ़ी डी स्टोरी जिसका टाईटल है “आत्मा से परमात्मा बनने की” टेक्नोलॉजी के साथ 270 स्क्रीन पर 7 हेयर कट स्टूडियो टेक्नोलॉजी जिसमें चीजें बाहर आती है यह ऐसा 3D पार्क होगा जिसमें मिथ्यादृष्टि से लेकर सिद्ध अवस्था तक, चतुरगति से लेकर मोक्ष गमन तक संपूर्ण 14 गुणस्थानों की जीवन्त झांकिया आपके सामने होंगी। वहां पर आने के पश्चात ही लोग समझ सकेंगे कि क्या होते है मिथ्यादृष्टि और सम्यकदृष्टि, कैसे होते है श्रावक कैसे होते है मुनिराज कैसे होती है कर्मों की निर्जरा कैसे लगता है भगवान का समवसरण कैसे होता है दिव्य विहार और केवल्य ज्ञान जब आप इसे देखोगे तो ऐसी अनुभूति होगी कि आप चतुर्थ काल में पहुंच गये है तथा साक्षात भगवान महावीर के साथ दिव्य मंगल विहार कराके दिव्य समवशरण में पहुंच गये है एक अलग अनुभूति को महसूस करेंगे जो अनेक लोगों के सम्यक दर्शन का कारण बनेगा तथा दूसरी सूरिंग लाईट “समवसरण दर्शन” यह विश्व की 31 बी सूरिंग लाईट जिसका मतलब है उड़ता हुआ विमान जब आप उसमें बैठेंगे तो आपको आप 12 मी. ऊंचाई तक ले जायेंगे सामने बड़ा सा स्क्रीन होगा आपको ऐसा प्रतीत होगा कि जैसा हमने पड़ा है तथा गुरुओं के मुख से सुना है आप साक्षात भगवान महावीर के समवसरण में आ गये है ऐसा अनुभव करेंगे।



इसके पश्चात चारों सुमेरु पर्वत की वंदना करेंगे और आप देखेंगे पांडुक बन मे पांडुक शिला पर भगवान का अभिषेक देखकर आपकी आंखैं गदगद हो जाएगी इसके पश्चात आप करेंगे और अकृत्रिम जिन चैत्यालयों की साक्षात वंदना और भवसागर दर्शन जिसमें आप जैसे ही प्रवेश करेंगे तो आपको विकराल रूप धारण किया समुद्र जिसमें सुनामी की लहर उठरही है जो साक्षात हमें पंचम काल के अंत का स्मरण कराते हुये संदेश देगा कि “भवसागर से मोक्षपुरी की अदभुत यात्रा” मुनि श्री ने कहा कि सभी कार्य अब अंतिम चरण में चल रहे है और यह अदभुत एवं अनौखा थीमपार्क तैयार है तथा अदभुत गुणायतन का ऐसा मंदिर जिसे देखकर आपके अंदर से वाह वाह की आवाज आएगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312





