वर्षा के घर धन कि वर्षा और महावीर के घर वर्तमान के महावीर का पडगांहन
बोरगांव
धर्म के प्रति व साधु संतों के प्रति श्रद्धा भक्ति बहुत ही अटूट होती है ऐसे ही व्यक्तित्व की हम बात कर रहे हैं श्रीमती वर्षा जैन वाइफ ऑफ महावीर जैन इंडानी बोरगांव राजस्थान निवासी
जिनकी साधु संतों के प्रति आघात श्रद्धा है। इसका पता इस बात से लग जाता है। इनका घर समान से भरा पड़ा था। जब इन्होंने सुना निर्ग्रन्थ मुनिश्री 108 सुवन्द्यसागर महाराज पधार रहे है तब स्वयं और परिवार जनों ने मिलकर रात कि 3 बजे तक पूरा समान हटाया एवं योग्य स्थान बनाकर चौका लगाया एवं विधि पुण्य से मिली।

संदीप कुमार जैन खमेंरा बताते है की पुण्य से भक्ति इन्हे मुनिराज का पडगाहन का लाभ भी प्राप्त हुआ और भक्ति पूर्वक मुनि श्री का निरंतरराय आहार कराया।

संदीप जैन बताते है वर्षा जैन शरीर से आहार नहीं दे सकती है, लेकिनफिर भी वह भक्ति से योग्य सेवा करती है और निरंतर पुण्य प्राप्त करती है वास्तव मे इनकी मुनियों के प्रति श्रद्धा और समर्पण प्रशंसनीय है और इनकी सेवा आदर्श लेने जैसी है विशेष उन श्रावको के लिए जो बोलते है हमारा घर छोटा है,बच्चे सहयोग नहीं करते,मे तो अकेला/ अकेली हू,अभी समय नहीं है फिर कभी करेगे आदि बहानेबाजी करने वाले श्रावको को ऐसे के लिए वर्षा जैन जेसे को ध्यान में रखकर सेवा सीखनी चाहिए। जो प्रेरणादायक है।

आपको बता दे बोर गांव मंजू में जब पंच कल्याणक हुआ था तब भगवन कि आहार चर्या भी इन्हीं के घर हुई थी
योग्य पडगाहान करने के तत्पर रहने वाली वर्षा जैन की आर्थिक स्थिति इतनी अल्प हैं कि बता नहीं सकते ( टके लाना टके खाना) ऐसी हालत है ( यहां भावना को समझना)कि क्या कहना चाहता हूं। वर्षा जैन के मुख से आज ऐसा शब्द निकला और गुरु के प्रति आभार का उच्चारण हुआ कहने लगी जब से आहार दान कर रही हूं तब से निरंतर मेरी आर्थिक और शरीर कि स्थिति बेहतर से बेहतर होती जा रही है और होगा क्यों नहीं।


आहार दान से क्या नहीं मिलता सब कुछ मिलता है और फिर सुपात्र निर्ग्रन्थ मुनि सुवन्द्यसागर जी जेसे हो तो बात ही अलग है वास्तव मे यह निर्ग्रन्थ मुनि सुवन्द्यसागर जी के धर्माचरण करने के उपदेश का ही नतीजा है ऐसे निर्ग्रन्थ मुनि सुवन्द्यसागर जी के प्रवचन प्रति दिन जरूर सुनने चाहिए आप भी सुनो
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
