अरिहंत भगवान परम उपकारी है वह दिव्य देशना से हमें धर्म का मार्ग दिखाते हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्री चंद्रप्रभु जिनालय में पंच कल्याणक के लिए प्रमुख पात्रों का हुआ चयन। महेंद्र लदाना बने सौधर्म इंद्र

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अरिहंत भगवान परम उपकारी है वह दिव्य देशना से हमें धर्म का मार्ग दिखाते हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्री चंद्रप्रभु जिनालय में पंच कल्याणक के लिए प्रमुख पात्रों का हुआ चयन। महेंद्र लदाना बने सौधर्म इंद्र

टोंक आचार्य श्री वर्धमानसागर जी सहित विशाल संघ सानिध्य में आगामी 7 नवंबर से 12 नवंबर तक श्री चंद्र प्रभु जिनालय नसिया में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा हेतु प्रमुख पात्रों का चयन बोली के माध्यम से आचार्य श्री संघ सानिध्य में हुआ।जिसमें सौधर्म,भगवान के मातापिता,कुबेर, सनत, मुख्य यज्ञनायक, आदि इंद्र परिवार का चयन हुआ। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने पुरानी स्मृतियों को ताजा करते हुए बताया कि हम दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी के साथ सन 1970 में टोंक आए थे, पांच जिनालय के मंदिर में संघ रुका था।यह प्राचीन और महत्वपूर्ण जिनालय हैं जिनालय मंदिर जीवन के निर्माण में उपयोगी सहयोगी माध्यम है ।जिनवाणी के माध्यम से णमोकार महामंत्र प्राप्त हुआ जिनालय में अरिहंत भगवान विराजित होते हैं वह परम उपकारी है वह दिव्य ध्वनि से धर्म का मार्ग दिखाते हैं उससे जीवन में सफलता और मिलती है।

यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने पंचकल्याणक हेतु पात्र चयन कार्यक्रम के अवसर पर आयोजित धर्मसभा में प्रकट की । राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि पुरानी टोंक में भी पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा आकाश मार्ग से आई है, और नई टोंक में भी भूगर्भ से प्रतिमाएं प्रकट हुई है इसलिए संपूर्ण टोंक नगर अतिशय क्षेत्र है।

वर्तमान में भगवान साक्षात नहीं है इसलिए पत्थर,धातु रत्नों की प्रतिमाओं में भगवान के गुणों का आरोपण, सूरीमंत्र संस्कार से किए जाते हैं। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री महायश मती माताजी ने उपदेश में बताया कि गुरु के वचनों से जीवन अच्छा होता है ,क्योंकि गुरु आचार्य साधु भगवान की प्रतिकृति होते हैं। सिद्ध क्षेत्र,तीर्थ यात्रा, मंदिर साधुओं के दर्शन से ज्यादा संलेखना धारी साधु के दर्शन करना उनकी सेवा वेयावृति करना पुण्यशाली होता है। आपको भी यह भावना करना चाहिए कि मेरा भी समाधिमरण हो। गजकुमार मुनि ने भगवान के समवशरण में श्री वरदत्त गणघर के उपदेश में 63 शलाका पुरूषों का वर्णन सुन कर भेद विज्ञान से आत्मा का चिंतन कर वैराग्य धारण कर अग्नि उपसर्ग समता से सहन कर तपस्या से सभी 8 कर्मों को नष्ट कर मोक्ष प्राप्त किया चन्द्र प्रभु मंदिर के ओमप्रकाश, शैलेन्द्र एवं राजेश अरिहंत ने बताया कि सोधर्म इंद्र का सौभाग्य महेंद्र कुमार जी जैन लदाना हाल निवासी अमेरिका,धनपति कुबेरश्री प्रेम चंद जी सुलोचना जी सोगानी महायज्ञनायक रतनलाल जी सोगानी परिवार, यज्ञनायक इंदर जी सिद्धार्थ जी सोगानी सहित अनेक इंद्र बने हैं 

राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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