मरण को समझाया संसार के जाल से निकलना मुश्किल है विनिश्चय सागर महाराज
रामगंजमंडी
आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा मरना तो सबको है, हम कोशिश कर सकते हैं कि मरण को सुखद रूप दे सके कि ऐसा रूप दे दे की मरने के बाद भी हम ना मरे। जीवन की उलझन बहुत मजबूत है आप जितना सुलझाना चाहते हैं आप उतना ही उलझते चले जाते हैं। शेर का उदाहरण देते हुए कहा कि जाल बहुत छोटा सा होता है की शेर भी उसमें फंस जाए शेर में 100 घोड़े जितनी ताकत होती है लेकिन वह भी एक छोटे से जाल में फंस जाता है पराधीन हो जाता है भारी भरकम ताकत भी उस छोटे से जाल में फस जाती है और उसकी स्वाधीनता समाप्त हो जाती है। और इतनी भारी भरकम ताकत भी सक्षम नहीं होती है जाल से निकलने में वैसी ही ताकत संसारी जीव में है वह आज ही परमात्मा बन जाए लेकिन उलझन में है इस संसार के जाल से निकलना मुश्किल है।
मनुष्य निकलने का प्रयास ही नहीं करता है और थोड़ा बहुत प्रयास करता है थक जाता है हार जाता है और छोड़ देता है उलझ तो हम अनादि से रहे हैं अब हमें सुलझना है। सुलझने का एक ही उपाय है मरण को समझ ले और मरण को सुधार ले।
उन्होंने कहा जीवन भर हम सही चलते रहे लेकिन मरण बिगड़ गया तो सब कुछ बिगड़ गया और यदि कम समय में मरण को सुधार लिया तो सब कुछ सुधर गया उन्होंने कहा धीर भी मरेगा और अधीर भी मरेगा अच्छा तो यह है धीरवान होकर मरा जाए। अच्छा यह है निर्भीक होकर और आनंद के साथ मरण को स्वीकार किया जाए चीखते चिल्लाते संकलेश के साथ न मरा जाए। उन्होंने कहा आयु कर्म धीरे-धीरे हमारे हाथ से निकल रहा है हम इसे रोक नहीं सकते रुकने वाला नहीं है यह थकता नहीं है। यह टंकी से आने वाला पानी नहीं है कि आप टोटी बंद कर देंगे तो रुक जाएगा। हम कब सावधान होंगे। उन्होंने कहा आचार्यों ने कहा मरणो को समझो शायद विरक्ति आ जाए।

नित्य मरण
महाराज श्री ने मरणो के प्रकारों को समझाते हुए कहा कि मुख्य रूप से दो मरण प्रमुख बताए हैं जिसमें प्रमुख है नित्य मरण जिसमें व्यक्ति हर पल हर क्षण आयु कम होती चली जाती है ऐसा कोई पल नहीं है जब हम मर नहीं रहे हो प्रति समय हमारी मृत्यु थोड़ी-थोड़ी हो रही है। नित्य मरण होता है आज के 24घंटे निकले आयु के 24 घंटे कम हुए प्रति समय आपकी आयु खिरती जा रही है नित्य मरण है
तद्भव मरण के बारे में कहा हम चिंतन करते हैं तो देखते हैं कि मरते तो सब हैं रावण भी गया और राम भी गए दोनों की आयु पूर्ण हुई एक नरक गया और एक मोक्ष गया मरना सबको है। आप चिंतन करके देखते हैं कि लगता है कि यह काम करके यह व्यक्ति मर रहा है यह काम करके यह व्यक्ति मर रहा है मैं यह काम करके मरूंगा तो अब आप देखिए कि कौन से काम करके किसको कौनसा फल मिलेगा और कौनसा मरण मिलेगा महाराज श्री ने कहा कि जैन दर्शन कहता है कि यदि आपको मरने का तरीका आ गया तो आपका जीवन सफल हो गया दुनिया भर की सोचते हैं लेकिन हमने मरण के संबंध में सोचा क्या
हम यह सोचे कि जब तक मृत्यु दस्तक देगी हमें कैसे तैयार रहना है उस समय क्या करना है क्या परिणाम लगाना है यह सोचो होगी तब जाकर समाधि मरण हो सकता है।
उन्होंने कहा कि जन्म से मृत्यु तक काम ही करते आ रहे हो कब खत्म करोगे जब यमराज आ जाएगा महाराज जी ने कटाक्ष करते हुए कहा किजिन्हें कोई काम नहीं है उन्हें सबसे ज्यादा काम है। निरंतर सावधान रहे कब मृत्यु आ जाए।
हमने अहम को बिठा रखा है
आचार्य श्री ने कहा हमने अपने अंदर हम को बिठा रखा है जैसे मच्छर डंक मरता है हमें पीड़ा कष्ट होता है वैसे ही हमें कोई अपशब्द तो बोल दे हमारे अंदर कषाय उत्पन्न हो जाती है यह ऐसी कषाय है अनंत संसार में आपको डाल रही है। एक बार मरण व्यवस्थित हो गया तो अनंत बार मरने के लिए तैयार नहीं होना पड़ेगा।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312





