शरीर को वश में करने का साधन तपस्या है आदित्य सागर महाराज
कोटा
रिद्धि सिद्धि नगर चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में मंगल प्रवचन देते हुए श्रुत संवेगी मुनि श्री 108 आदित्य सागर महाराज ने कहा कि मन को हमें काबू करना है। हमें मन के काबू नहीं होना है। हमारे मन वचन व काया का उपयोग ही हमारी प्रवृत्ति बनाता है।
महाराज श्री ने कहा कि मानव इंद्रियों का उपभोग नहीं इनका उपयोग सीखे। मनुष्य को मन को वश में करने के लिए पहले अपने स्थूल शरीर को वश में करना होगा। शरीर को वश में करने का साधन तपस्या है। तपस्या का उद्देश्य दिखावा नहीं साधना होनी चाहिए।





उन्होंने कहा कि जब तक शरीर साथ दे रहा है तब तक साधना में जुट जाए। क्या पता आगे तपस्या व साधना की योग ना रहे। हम त्याग करना सीखें, जितना आप त्याग करेंगे उतनी तपस्या बढ़ेगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
