72 दिवसीय त्रिकाल चौबीसी व्रत में सभी रसों और सभी अनाज के उनोदर तप का पारणा होगा 13 सितम्बर को दिगम्बर संत की कठोर साधना
इंदौर
इन्दौर सुदामा नगर में चातुर्मास कर रहे परम पूज्य आचार्य श्री 108विशद सागर जी के संघस्थ स्थविर मुनि श्री विशाल सागर जी महाराज लगातार 72 दिन के त्रिकाल चौबीसी व्रत-उपवास की साधना कर रहे हैं।
अजय पंचोलिया इंदौर ने बताया कि तपस्वी मुनि श्री विशाल सागर जी इसके अंतर्गत 3 जुलाई से 12 सितंबर 72 दिवसीय उपवास साधना में गेहूं, चावल, चना, मूंग आदि सभी प्रकार के अनाज का सभी प्रकार के फलो का, हरी सब्जियो का, मिर्च मसालो का, घी,नमक, दूध,बूरा,तेल,दही आदि छओ रसो का, सूखे मेवे काजु-छुआरा-अखरोट-मखाना आदि ड्राई फुड का त्याग चल रहा है।48 घन्टे 72 घंटे के निर्जल उपवास के बाद भी सभी प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनो को छोड़कर नीरस, अल्प आहार लेकर ऊनोदर तप की साधना भी कर रहे है व्रत साधना में मात्र छेना, मट्ठा, दाख जल आदि सीमित खाद्य सामग्री ही ले रहे हैं।

3 जुलाई से 12 सितंबर तक 72 दिन से लगातार चल रही , अनशन-उनोदर तप साधना के बाद 72 घंटे के निर्जल उपवास के बाद 13 सितम्बर को 72 दिन बाद अन्न ग्रहण कर महापारणा होगा। जयपुर नगर गौरव 52 वर्षीय सन 2005 में आचार्य श्री विशद सागर जी से दीक्षित मुनि श्री विशाल सागर जी ने गृहस्थ ओर मुनि अवस्था के 26 वर्षों में 51 प्रकार के व्रतों में अभी तक5325 उपवास पूर्ण किए हैं इसमें प्रमुख रूप से तीस चौबीसी के 720 व्रत उपवास , चतुर्दशी के 344 उपवास, सोलह कारण के 512 ,आदि पूर्ण कर सहस्र नाम के 410 उपवास होकर व्रत जारी हैं। काय क्लेश तप साधना में 5 बार से अधिक 100 से अधिक घंटे का तप अधिकतप 157 घंटे का तप सम्मेद शिखर जी में किया हैं
। सम्मेद शिखर की 25 टोंक की 300 बार चरण वंदना मात्र 10 माह में की ओर साथ ही प्रत्येक टोंक की 108 परिक्रमा भी लगाई। सम्मेद शिखर की 55 किलोमीटर सम्पूर्ण पर्वत की 5 बार वंदना की।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
