आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की जन्म नगरी की 3 प्रतिमा धारी मधु दीदी सनावद 22 जुलाई को आर्यिका दीक्षा अयोध्या जी में ग्रहण करेंगी।लेखक राजेश पंचोंलिया इंदौर

धर्म

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की जन्म नगरी की 3 प्रतिमा धारी मधु दीदी सनावद 22 जुलाई को आर्यिका दीक्षा अयोध्या जी में ग्रहण करेंगी।लेखक राजेश पंचोंलिया इंदौर

सनावद।
सनावद जिला खरगोन मध्य प्रदेश सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकूट, पावागिरी,ऊन और श्री बावनगजा जी के समीप स्थित गुलशनाबाद जो वर्तमान में सनावद नगर नाम से विख्यात है इस सनावद नगरी को विश्व विख्यात बनाने का सौभाग्य अगर मिला है तो वह है प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज जिन्होंने सन 1969 में मुनि दीक्षा लेकर सनावद से मुनि धर्म की शुरुआत की है तब से अभी तक देखें तो 17 भव्य प्राणी सनावद के श्रमण दीक्षा अंगीकार कर चुके हैं ।पंचोलिया परिवार की अगर बात कहें तो आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, मुनिश्री चारित्र सागर जी, मुनि श्री श्रेष्ठ सागर जी , आर्यिका श्री सुदृढ़मति माताजी, आर्यिका श्री महायशमति माताजी और क्षुल्लक श्री मोती सागर जी के बाद अब 64 वर्षीय तीन प्रतिमा धारी श्रीमती मधुबाला स्व प्रकाश चंद जी पंचोलिया जैन 22 जुलाई को देश की सर्वाधिक संयम धारी गणनी श्री ज्ञानमती माताजी से सर्वश्रेष्ठ नारी दीक्षा ग्रहण करेंगे।

  एक परिचय
सन 1959 को भारत के प्रसिद्ध मिर्च मंडी वेड़िया ग्राम में आपका जन्म श्रीमती सरोज बाई तिलोक चंद जी के यहां हुआ आपने लौकिक शिक्षा 10वीं तक प्राप्त की आपका विवाह सनावद के सुप्रसिद्ध श्रावक श्री प्रकाश चंद जी पंचोलिया सराफ से हुआ। आपने अपने जेठ क्षुल्लक श्री मोती सागर जी के दीक्षा अवसर दिनांक 8 मार्च 1987 पर आजीवन शुद्र जल का त्याग किया किया विवाह के बाद आपकी पुत्री चंद्रिका और दो पुत्र वैभव और विशाल हुए। पुत्री बाल ब्रह्मचारिणी चंद्रिका ने पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से 14 मार्च 1993 को 5 वर्ष का ब्रह्मचर्य व्रत अंगीकार किया आपकी पुत्री ने परम पूज्य 105 गणनी आर्यिका श्री ज्ञान मति माताजी से दिनांक 17 फरवरी 2010 को आर्यिका दीक्षा हस्तिनापुर में ग्रहण कर आर्यिका श्री सुदृदमति बनी उसी दिन माता पिता श्री प्रकाश चंद जी एवम श्रीमती मधु ने
आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत आर्यिका श्री ज्ञानमती जी से लिया आपने आर्यिका श्री ज्ञानमती जी से दो प्रतिमा और 3 प्रतिमा के व्रत वर्ष 2013 में लिए।
अनेक तीर्थ जिनवाणी साहित्य सृजन कर्ता आर्यिका गणनी प्रमुख दिव्य विभूति आर्यिका श्री ज्ञानमती जी से आर्यिका दीक्षा हेतु निवेदन एक संक्षिप्त परिचयभारत गौरव दिव्य शक्ति गणनी प्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी का जन्म 22 अक्टूबर 1934 को टिकेटनगर में श्रीमती मोहनी देवी छोटेलाल जी के यहां हुआ जन्म का नाम मैना रखा गया परिवार के लिए में आपकी नहीं जगत की हूं ।आपने सन 1952 जन्मदिन के दिन 18 वर्ष की उम्र में आचार्य देशभूषण जी से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत और 7 प्रतिमा के नियम अंगीकार किए 1953 में आपको क्षुल्लिका दीक्षा प्राप्त हुई आपका नाम श्री वीरमति माताजी रखा गया। सन 1956 में अपने महावीर जी में आर्यिका दीक्षा ग्रहण की आपका नाम आर्यिका श्री ज्ञानमती जी रखा गया आपके परिवार से आपकी बहन आर्यिका श्री अभय मति आर्यिका श्री चंदनामती जन्म दाता माता आर्यिका श्री रत्नमति माताजी बनी। आपके छोटे भाई पीठाधीश श्री रविंद्र कीर्ति जी 10 प्रतिमा व्रत धारी है पूर्व गृहस्थ अवस्था की भतीजी बाल ब्रह्मचारिणी इंदु दीदी भी दीक्षा ले रही हैं।आपकी प्रेरणा से हस्तिनापुर इलाहाबाद प्रयाग कुंडलपुर श्रावस्ती सनावद मांगीतुंगी आदि अनेक तीर्थंकरों की जन्म नगरी में नवीन क्षेत्र का निर्माण हुआ। आपने 400 से अधिक ग्रंथों का लेखन सृजन किया। आपने अनेक भव्य प्राणियों को दीक्षा दी है अनेक साधुओं की सल्लेखना भी कराई है अक्षय तृतीया जैसे पावन पवित्र दिन ब्रह्मचारिणी मधु दीदी ने परम पूज्य गणनी आर्यिका श्री ज्ञानमती जी को आर्यिका दीक्षा हेतु निवेदन कर श्रीफल भेंट कर निवेदन किया। परम उपकारी, परम पूज्य गणनी प्रमुख 90 वर्षीय 71 वे वर्ष की संयम साधिका आर्यिकाश्री ज्ञानमती माताजी नेआगामी श्रावण कृष्णा एकम 22 जुलाई वीर शासन जयंती पर 5 दीक्षा प्रदान करने की स्वीकृति प्रदान की। इसमें टिकेट नगर से बाल ब्रह्मचारिणी इंदु दीदी, बाल ब्रह. अलका दीदी ,फिरोजाबाद बाल ब्रह्मचारिणी श्रेया दीदी , श्रीरामपुर महाराष्ट्र श्रीमती शोभा शरद पहाड़े तथा मध्यप्रदेश सनावद से मधु दीदी की दीक्षा होगी।
सनावद का आचार्य साधु परमेष्टि का गौरव शाली इतिहासश्री शांति वीर शिव धर्माजित वर्धमान सुरिभ्यो नमो नमःगुलशनाबाद जो कि सनावद का पुराना नाम हैं। गुल जो महक खुशबू गुणों को आबाद रखे इस नाम को सार्थक किया नगर के गुल पुष्प आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित 17 पुष्प संयम की महक गुण को आबाद कर देश विदेश में फेला रहे हैं। सनावद शब्द संयम के मार्ग पर नय को वर्धमान करते हुए कर्मो का दमन का संदेश देता है पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा वर्ष 1869 में किया गया संयम का बीजारोपण विशाल वृक्ष बन गया है इस सनावद नगर से 17 दिगंबर साधु हुए हैं प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा की तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी से दीक्षित पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की जन्म भूमि हैइ स जन्मभूमि से आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ,मुनि श्री चारित्र सागर जी ,मुनि श्री अमेयसागर जी ,मुनि श्री श्रेष्ठ सागर जी, मुनिश्री अपूर्व सागर जी ,मुनि श्री अर्पित सागर जी, मुनि श्री प्रशस्त सागर जी ,मुनि श्री प्रयोग सागर जी , मुनि श्री प्रबोध सागर जी , मुनि श्री सुहित सागर जी आर्यिका श्री क्षीर मती, आर्यिका श्री सुदृढ़ मति जी, आर्यिका श्री तपस्विनी मतीजी आर्यिका श्री महायश मतीजी, आर्यिका श्री देशना मति जी, आर्यिका श्री पद्मयशमति माताजी ,क्षुल्लक श्री मोती सागर जी सहित 18 साधु इस जन्मभूमि से अवतरित हुए हैं इनके अतिरिक्त अन्यप्रतिमा धारी बाल ब्रह्मचारी भैया और दीदी की भी यह जन्मभूमि है नगर सनावद के मूल नायक श्री पारसनाथ भगवान की जय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की जय समस्त साधुओं को नमोस्तु ,वंदामी ,इच्छामि आप सभी को जय जिनेंद्र।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त आलेख संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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