आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में हुआ तपस्वीयो का हुआ पारणा
रामगंजमंडी परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में इस वर्ष विगत एक माह में अनेक तपस्या हुई 65 से अधिक तपस्वियों ने तप आराधना की तप आराधना में 16 उपवास 10 उपवास 7 उपवास 5 उपवास 3 उपवास की साधना हुई।
आचार्य श्री की प्रेरणा आशीर्वाद का ही प्रतिफल जो हम तप आराधना कर पाए तपस्वियों ने कहा
तपस्या के उपरांत सभी तपस्वियों ने कहा कि यह सब आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज की प्रेरणा और आशीर्वाद का ही प्रतिफल है कि हम तप साधना पूर्ण कर पाए संतो की साधना तपस्या हमारे लिए ऊर्जा का कारण बनी।
प्रातः बेला में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य मे सभी ने अपना पारणा किया सभी ने णमोकार मंत्र का जाप करने के उपरांत आचार्य श्री को नमोस्तु करने के बाद अपना उपवास खोलते हुए पारणा किया। आचार्य श्री ने सभी तपस्वियों को प्रोत्साहन देते उनके तप संयम की अनुमोदना की।
खासा उत्साह देखा गया
तपस्वियों की अनुमोदना करने एवम उन्हें पारणा कराने के लिए सभी में उत्साह देखा गया इन अनुपम पलो इन अभूतपूर्व क्षणों को देखने के लिए काफी भक्त मौजूद रहे।
पारणा का अर्थ है ।
“पारणा” शब्द तपस्या पूर्ण करने पर किया जाने वाला भोजन ग्रहण करने का एक महत्वपूर्ण कार्य है, जो कि आचार्य की छत्रछाया मार्गदर्शन में हो तो बहुत उत्तम माना जाता है।
किसी भी जैन तपस्वी के लिए, पारणा एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। इसमें उपवास या किसी अन्य तपस्या को समाप्त करके भोजन ग्रहण किया जाता है।कहा जाता हैं यदि व्यक्तिआचार्य श्री के आशीर्वाद और निर्देशन में पारणा करता है तो उससे तपस्वी को आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रोत्साहन मिलता है।
आचार्य श्री का सानिध्य क्यों महत्वपूर्ण है?

आचार्य श्री तपस्वी को सही आध्यात्मिक मार्ग दिखाते हैं, जिससे उन्हें तपस्या को और भी गहनता से समझने में मदद मिलती है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312












