तप की साधना से आलोकित हुआ सरवाडिया परिवार
रामगंजमंडी धर्म, तप और साधना से ही जीवन पवित्र बनता है। दसलक्षण महापर्व के इस पावनअवसर पर रामगंजमंडी के भव्यांश सरवाडिया, सुपुत्र श्री कामेश सरवाडिया ने अपनी नन्ही उम्र में तीन उपवास की महान साधना कर समाज को अनुपम प्रेरणा दी है।
भगवान की असीम अनुकंपा से भव्यांश ने सभी प्रकार के आहार का त्याग कर, नित्य सामायिक पूजन के साथ अपने तप को सफलता सफलतापूर्वक पूर्ण किया। यह साधना केवल उपवास का त्याग नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और संयम का दिव्य मार्ग है।इनकी इस अद्भुत तपस्या से जहाँ परिवार गौरवान्वित हुआ है, वहीं सम्पूर्ण समाज भीगदगद है। भव्यांश की इस अध्यात्ममयी साधना से यह सिद्ध होता है कि धर्म की ज्योतिकिसी आयु की मोहताज नहीं, बल्कि श्रद्धा और संकल्प से हर हृदय में जल सकती है।समाजजनों ने भव्यांश की इस साधना की अनंत अनंत अनुमोदना करते हुए उनके
उज्ज्वल भविष्य और आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामनाएँ व्यक्त कीं।
