विजातीय विवाह का विचार नहीं करेंगे,ऐसा व्यापार भी नहीं करेंगे जो हिंसक हो सुधासागर महाराज

धर्म

विजातीय विवाह का विचार नहीं करेंगे,ऐसा व्यापार भी नहीं करेंगे जो हिंसक हो सुधासागर महाराज
अशोकनगर
सांसारिक जीवन में ऐसी वस्तुओं की आवश्यकता है उनकी प्रभु भक्ति से कामना करने की भावना की कोई मनाही नहीं है। किसी क्षेत्र काल कौन है इससे कोई मतलब नहीं है। किसी शील वत के प्रति सती सीतामाता के प्रति भी इस संसारी प्राणी ने अशुभ भावना कर ली। ऐसी भावना नहीं करेंगे।

 

 

धर्मात्माओं के प्रति बुरे विचार नहीं लाएंगे,जो कार्य तुम्हारे कुल में सात पीढ़ियों में नहीं हुए उन कार्यों का त्याग कर देना। मैं उन
कार्यों के बारे में विचार नहीं करूंगा जो हमारे पूर्वजों ने नहीं किए। विजातीय विवाह का विचार भी नहीं करेंगे, ऐसा व्यापार नहीं करेंगे जो हिंसक हो।

 

उक्त धर्म उपदेश सुभाषगंज मैदान में चल रहे अखिल भारतीय श्रावक संस्कार शिविर में उत्तम तपपर विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने दिए। मुनिश्री ने कहा कि तीसरे बात का त्याग करें अपने पूर्वजों में जो कमी थी  पूर्वजों ने गलत ढंग से काम किया हो ऐसी कुल परम्परा का त्याग करना कोई गलत काम हो रहा है उसका त्याग करना परंपराओं का मोह नहीं करना गलत परम्परा को तोड़ने के बाद उसकी इच्छा मत करना। ऐसे गलत काम की इच्छा मत करना। संयम के बाद तप रख दिया जो गलत था उसको छोड़ दिया थोड़ा भी विकल्प आया अब आता है अच्छे कार्य जिनकी कानून परिवार से कोई बांधा नहीं है उनमें कितना कम कर सकते हैं।

 

शिविरार्थी करेंगे दर्शनोदय तीर्थ थूबोनजी के दर्शनप्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया ने कहा कि देशभर से आए शिविरार्थियों को दर्शनोदय तीर्थ थूबोनजी की वंदनाका सौभाग्य पांच सितंबर को मिलने जा रहा है। सभी शिविरार्थी एक हजार साल पुराने तीर्थ में स्थित भगवान श्री शान्तिनाथ स्वामी के साथ ही मंशापूर्ण भगवान आदिनाथ स्वामी की वंदना के साथ ही इस महा तीर्थ के दर्शन करेंगे।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इच्छाओं का निरोध तप कहलाता है, उन इच्छाओं कात्याग करें, जिनको मिलने की संभावना तक नहीं

महाराज श्री ने कहा इच्छाओं का निरोध तप कहलाता है उन इच्छाओं का त्याग करें जिनको मिलने की संभावना तक नहीं है। आप की अधिकांश क्रियाएं संसार बढ़ाने के लिए होती हैं व्यापार बढ़ाने के लिए होती हैं राजा बनने के लिए पुरुषार्थ करने की मनाही नहीं है। लेकिन आप संसार सुख पाने के लिए मुनि बन गये तो सुख तो मिलेगा परम सुख नहीं मिल सकता। रावण ने ऐसा ही तो किया रावण जन्म जन्म का महा तपस्वी था उसका अंत क्या हुआ आप सबको पता है। संसार बढ़ाने के लिए नब्बे प्रतिशत लोग धर्म करते हैं।

 

 

गृहस्थ अपने परिवार को चलाने के लिए धर्म कर रहा है। इसमें कोई बाधा नहीं है।गृहस्थ है तो भावना करते हैं प्रभु श्री रामचन्द्र जी अपने छोटे भाईलक्ष्मण जी के सुबह तक ठीक हो जाये ऐसी भावना भा रहे थे। भावी भगवान थे फिर भी भगवान की भक्ति कर भाई को ठीक करने की प्रभु से प्रार्थना कर रहे थे, करते ही हैं।

    संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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