*अशुभ कर्मों को क्षय करने के लिए ही तप धर्म किया जाता है*जैन मुनि प्रवचन केसरी प्रज्ञानसागर महाराज*
नैनवा जिला बूंदी 3 सितंबर 2025 बुधवार
दिगंबर जैन शांतवीर धर्म स्थल पर 10 लक्षण पर्व के सातवें दिन जैन मुनि प्रज्ञानसागर महाराज ने अपार धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा मनुष्य द्वारा अपने जीवन में अज्ञानता बस बहुत ही अशुभ कर्म होते हैं उनको क्षय करने के लिए ही तप धर्म किया जाता है।
महाराज ने यह बताया कि आज हर परिवार घर में प्रतिकूल स्थितियों बनी हुई है उनको अपने विवेक से अनुकूल किया जा सकता है मन से विवेक लगाना होगा उन्होंने बताया कच्ची. मिट्टी के घड़े को आग में तपाकर उसे पक्का बनाया जाता है वही घड़ा महिला के सिर पर धारण होकर एक कलश का रूप ले लेता है मिट्टी वही है लेकिन उसे तपना पड़ा है तप कलश रूप में परिवर्तन हो गया कच्ची मिट्टी कहती है कि कैसा सौभाग्य उस मिट्टी का है जो सिर पर धारण हो गई आज भी मनुष्य स्वयं चाहे तो अपनी आत्मा को तपाकर कुंदन बना सकता है परंतु आत्मा के लिए समय निकाल ही नहीं रहा इस कारण संसार में इधर से उधर भटक कर अपना समय व्यर्थ कर रहा है

थोड़ी सी खुशियां मिलने पर मनुष्य बहुत खुश हो जाता है थोड़ी सी सांसारिक परेशानी आने पर उसके चेहरे का रंग उड़ जाता है और खुशियां समाप्त हो जाती है ।
मुनि यह भी बताया गृहस्थी जीवन में तप नहीं होता साधु संत ही अपनी आत्मा को तपाते हैं चारों प्रकार के आहार का त्याग कर स्वाध्याय का वाचन करते हैं तभी तप धर्म आत्मा में जागृत होता है भगवान के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित शांति धारा का सौभाग्य प्रवीण कुमार महावीर कुमार अविनाश नितिन प्रियंक सरावगी परिवार ने सौभाग्य प्राप्त किया ।


*तप के प्रभाव से स्वर्ग और राजाओं का राज्य मिलता है*
जैन मुनि प्रसिद्ध सागर महाराज* ने बताया की जैन धर्म के यह 10 दिन महान पर्व के दिन है सातवें दिन तप धर्म पर मुनि ने बताया की जो सच्चे मन से प्रभु के तप साधना करता है उसे स्वर्ग जैसा वैभव राजाओं के राज्य जैसा साम्राज्य तप के प्रभाव से प्राप्त होता है और अपनी आत्मा को तपाकर स्वर्ग जैसा सुख मनुष्य प्राप्त कर सकता है
*महावीर कुमार सरावगी से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312


