लोभ लालच और लिप्सा से निर्वृति का नाम ही शौच धर्म है। प्रमाण सागर महाराज 

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लोभ लालच और लिप्सा से निर्वृति का नाम ही शौच धर्म है। प्रमाण सागर महाराज 

भोपाल प्रसिद्ध लेखक टालस्टाय ने लिखा “लगन” की तरंग मार ले,बस हो गया भजन,आदत बुरी सुधार ले बस हो गया भजन” उपरोक्त पक्तियां सुनाते हुये मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने पर्वराज पर्युषण के चतुर्थ दिवस “उत्तम शौच” धर्म पर अपने विचार व्यक्त किये।

 

 

 उन्होंने कहा कि रहता तो झोंपड़ी में है,मगर महलों की चाह है,और ये चाह ही तेरे लिये कांटों की राह है, मुनि श्री ने कहा कि “धन”की चाह कांटों का ताज है”जो गरीब से लेकर अमीर करोड़पतियों को भी रहती है,जो कभी खत्म नहीं होती”धन” ऐसी चीज है जो मनुष्य को हमेशा दौड़ाती रहती है,एक पल को भी उसे ठहरने नहीं देती चित्त को मलिन और बैचेन करती है,जीवन भले ही समाप्त हो जाए लेकिन लोभ लालच कभी खत्म नहीं होता जो इस बुराई पर निवृत्ति पा लेता है वही शौच धर्म का पालन कर पाता है,

 

 

मुनि श्री ने कहा कि कहीं आग लगी हो और हवा चले और आक्सीजन मिले तो आग और भड़कती है,लेकिन यदि उस पर नाइट्रोजन गेंस डाल दी जाये तो वही आग बुझ जाती है उसी प्रकार भोगों की चाह कभी खत्म नहीं होगी और वह झुलसायेगी, वहीं संयम की राह तुम्हें पार लगा देगी”लोभ लालच और लिप्सा से निर्वृति का नाम ही शौच धर्म है।

 

 

प्रसिद्ध लेखक टालस्टाय ने लिखा “मनुष्य के जीवन में दो बड़ी घटनाऐं एक साथ घटती है जिसे वो चाहता है वह उसे मिलती नहीं, और जो मिलती है,उसे वह चाहता नहीं” यदि आप अपने जीवन को सम्हालना चाहते हो जो मिला है,उसमें संतोष करोगे तो दाह मिटेगी और यदि आपकी निगाहें हमेशा दूसरे की ओर होगी तो आपकी दाह और बढ़ेगी निर्णय आपको करना है,”दाह” को और बढ़ाना चाहते हो या घटाना? जीवन में सुख शांति चाहते हो तो हाय हाय करना बंद करो मुनि श्री ने कहा हम कमाने के लिये मना नहीं कर रहे आप उद्यमी बनो पुरुषार्थ करो लेकिन एक बात हमेशा अपने हृदय में रखो कि “मेरे हाथ में प्रयत्न है,परिणाम नहीं” आप बेहतर प्रयास कीजिये और परिणाम जो आए उसे स्वीकार करो।

 

 

मुनि श्री ने कहा कि “चाह होगी दाह होगी,इसे कोई रोक नहीं सकता जो बड़े बड़े धनपति और उद्योगपति जो इस संसार से गये है वह आह भर ही गये है यदि आप चाह और दाह को बुझाना चाहते हो तो संयम की राह पकड़ो जहा चाह और दाह दौनों मिट जाएगी,और राह मिल जाएगी संतोष को जीवन का आदर्श बनाइये।

जैन धर्म “निष्कर्म नहीं निष्काम बनने की प्रेरणा देता है। 

           संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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