आगम अनुसार वचन ही सत्य धर्म है सत्य आत्मा के हित में होता है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी टोक प्रतिदिन धर्म के 10 अंगों की विवेचना हो रही है चार कषाय क्रोध, मान ,माया, लोभ में क्रोध को क्षमा से, मान को मार्दव से माया को आर्जव धर्म से दूर किया जाता है।कुंदकुंद आचार्य ने अपनी गाथा में मुनियों के लिए चौथा धर्म सत्य का बताया है इसलिए शोच धर्म के पहले हम सत्य धर्म को लेते हैं। सत्य वचनों और मान्यता के अनुसार कहा जाता है अहंकार और ममकार सत्य नहीं है भौतिक इंद्रिय सुख भी वास्तविक नहीं है यह मंगल देशना दशलक्षण धर्म में उत्तम सत्य धर्म की विवेचना में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में प्रकट की। राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि दूसरों को दुख उत्पन्न करने वाले वचन नहीं कहना चाहिए ,अंधे के अंधे होते हैं ,यह वचन कहने से महाभारत युद्ध हो गया था। वचन कैसे बोलने की व्याख्या में बताया कि हमेशा हितकारी मधुर अमृत वचन बोलना चाहिए ।

आत्मा ही सत्य है बाकी जगत संसार झूठ है कर्कश ,निष्ठुर, हिंसात्मक ,गर्वित, निंदक अप्रिय, पाप सहित वचन नहीं बोलना चाहिए। जिनवाणी आगम अनुसार वचन ही सत्य होते हैंआचार्य श्री ने बताया जब सत्य बोलने में बाधा हो तब मोन रहना चाहिए।कषायो से आत्मा मालिन है यह मलिनता धर्म आराधना से दूर होती है। मेरी भावना में भी अप्रिय कटुक वचन नहीं बोलने का उल्लेख है। शरीर का धाव ठीक हो सकता है,किंतु वचन से हुआ धाव ठीक नहीं होता। समाज प्रवक्ता पवन कंटान विकास जागीरदार अनुसार इंद्र ध्वज मंडल विधान में प्रतिदिन श्रीजी के पंचामृत अभिषेक के पश्चात नित्य नियम पूजन विधानाचार्य पंडित कीर्तिय के निर्देशन में सभी इंद्र द्वारा की जा रही है। आचार्य श्री द्वारा पूजन में चढ़ाए जाने वाले द्रव्यों का महत्व प्रतिपादित किया जाता है दोपहर को तत्वार्थ सूत्र की विवेचना आचार्य श्री द्वारा की जाती है शाम को श्रीजी , मंडल विधान कीआरती के बाद आचार्य श्री की आरती होती है। रात्रि में मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। दस लक्षण पर्व में अनेक साधुओं,श्रावक श्राविकाओं की व्रत उपवास आराधना चल रही हैं। राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
