86 वर्ष के शिविरार्थी शशिकांत माणिकचंद्र शाह योग करते है और सप्ताह में 22 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं शिविर में सबका ध्यान अपनी और खींच रहे हैं। 

धर्म

86 वर्ष के शिविरार्थी शशिकांत माणिकचंद्र शाह योग करते है और सप्ताह में 22 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं शिविर में सबका ध्यान अपनी और खींच रहे हैं।

अशोकनगर

परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव 108श्री सुधा सागर महाराज सानिध्य में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 10 लक्षण पर्व पर श्रावक संस्कार शिविर आयोजित हो रहा है।

 

 

हर वर्ष होने वाला यह शिविर प्रतिवर्ष एक कीर्तिमान लिखता है इस वर्ष भी यह कीर्तिमान लिख रहा है 10 लक्षण पर्व के दो दिन संपन्न हो चुके हैं और आज तीसरा दिवस है। इस बार का शिविर अपने आप में अनूठा है।

 

इस शिविर में ऐसे शिविरार्थी है जो सभी की और अपना ध्यान खींच रहे हैं एक ऐसी उम्र जिसमें चलना बोलना एवं चैतन्यता की कमी दिखाई देती है। ऐसे में इस शिविर में 86 वर्ष के शिविरार्थी शशिकांत माणिकचंद्र शाह सभी का ध्यान अपनी और खींच रहे हैं।

 

जी हा क्यों नहीं होगा इस उम्र में सफेद वस्त्र खादी के चमकता हुआ चेहरा आवाज में जोश बुलंद स्वर सभी को आकर्षित कर रहा है।

 

 

जी हा उनके चलने की फुर्ती नियम संयम के प्रति दृढ़ता देखकर हर कोई चकित है। यहां तक कि वे शिविर में ऐसे कठिन योगासन करके दिखा रहे जो आज के युवा भी करने में असमर्थ महसूस करते हैं। उनके जीवन का यह 20 वा श्रावक संस्कार शिविर है। आठवीं तक अध्ययन करने वाले साधक शिवरार्थी ने गुरु आशीर्वाद शिविर में मिले संस्कारों को अपने जीवन का एक पर्याय बना दिया है।

उनके विषय में मिली जानकारी के अनुसार पहले वह प्रिंटिंग प्रेस का काम किया करते थे लेकिन अब उन्होंने अपना पूरा जीवन हर दिन हर समय धर्म को समर्पित कर दिया है।

 

उनकी दिनचर्या पर एक नजर

श्री शशिकांत माणिकचंद्र शाह अष्टमी और चतुर्दशी का निर्जल उपवास करते हैं प्रतिदिन ध्यान, योग, शीर्षासन, मयूरासन, अनुलोम विलोम इसके साथ ही 1 दिन में 300 बार रस्सी कूद गर्म पानी पीते हैं और ठंडे पानी से स्नान करते हैं। सबसे बड़ा आश्चर्य है कि उन्हें इतनी उम्र में कोई प्रकार का रोग नहीं है। सप्ताह में एक बार वे 22 किलोमीटर दूर पैदल मंदिर की यात्रा करते हैं। कुरदुआडी गांव के दर्शन के लिए नियमित तीन बार जाजाना।अपनी पीठ पर थैला टांगकर शिविर में पहुँचना- जैसे कोई युवा साधक हाँ।”

 

इतना ही नहीं वे चटाई पर सोते हैं, सुबह जल्दी उठते हैं, कुएं से पानी निकालकरसाधु भगवंतों का आहार कराते हैं। दो बेटे डॉक्टर हैं, लेकिनशशिकांत जैन का असली गौरव उनकी साधु सेवा और त्यागी जीवन की प्रेरणा है, जो उन्होंने श्रावक संस्कार शिविर में मुनि पुंगव श्रीसुधासागर जी से प्राप्त की है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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