कषायो से दूर रहकर जीवन को धर्ममय बनाना चाहिएआर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी
भोपाल मध्यप्रदेश मुंगावली गौरव 61 वर्षीय गणनी आर्यिका 105 आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी संयम जीवन का 32 वा चातुर्मास मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के मंगलवारा में करने हेतु विहार चल रहा हैं।
माताजी के विहार में आहार निहार में दिगम्बर जैन समाज मंगलवारा पूर्ण सक्रिय सहभागिता कर रहा है दिनांक 12 जून को श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर नीलबड़ में आहार चर्या एवं रात्रि विश्राम कर दिनांक 13 जून को विहार कर श्री अजीत नाथ दिगम्बर जैन मंदिर नेहरू नगर भोपाल में आहार चर्या हुई।
अपने जीवन में कभी नफरत ईर्ष्या मत करना सृष्टिभूषण माताजी
परम पूज्य गणिनी आर्यिका 105 सृष्टिभूषण माताजी ने प्रेम रखने की बात कहते हुए कहा की जीवन में कभी ईर्ष्या नफरत नहीं करने पर जोर दिया ईर्ष्या करना तो धर्मात्मा से करना वो धर्म कर रहा है मैं कीचड़ में पड़ा हु।।

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि हमारा दिल अच्छी बातों को मंजूर नहीं करता है हम बोलते हैं भगवान ईर्ष्या नहीं होना क्रोध नहीं होना लेकिन हम क्रोध क्लेश से भरे हैं हमने जीवन को गधोंदक नहीं बनाया नाला बनाया।
उन्होंने कहा जीवन की श्वासे पानी की तरह है इमली में डालो तो खट्टी हो जाती है गाय को डालो तो दूध बन जाता है सर्प के मुख में डालो तो जहर बन जाता है। भगवान के मस्तक पर डालो तो गधोंदक बन जाता है l
उन्होंने दूसरों की बुराई एवम चुगली न करने सीख देते हुए कहा कि जीवन में कभी भी चुगली बुराई मत करना हम धोबी थोड़ी है अपनी आदतो को धोने आए है यदि ऐसा नहीं किया तो हमारा जीवन गलतियों का गोदाम बन जाएगा।
हम ऐसी गलतियां करते हैं की वो हमें देखता नहीं है वह ऐसे माफ करता है जैसे उसने देखा नही सोने से पहले सभी की गलतियो को माफ कर दो और परमात्मा जागने से पहले तुम्हारी सारी गलतियों को माफ कर देगा। जो हम नहीं कर पाते।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312






