पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी का धामनोद में प्रथम बार मंगल प्रवेश होगा
धामनोद
प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवती आचार्य श्री शांतिसागर जी दक्षिण की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टा धीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी का संघ सहित मंगल विहार कर्नाटक से राजस्थान की और पद विहार जारी है।महाराष्ट्र राज्य से मध्यप्रदेश में प्रवेश कर धामनोद नगर में श्री वर्द्धमान सागर जी 21 अप्रैल को धामनोद राज पैलेस पर चतुर्विध संघ सहित प्रवेश एवम आहार चर्या संभावित है।
एक परिचय आचार्य श्री का
मध्यप्रदेश खरगोन जिले के नगर सनावद में 18सितम्बर 1950 को
श्रीमती मनोरमा देवी श्री कमल चंद जी पंचोलिया के कोख से श्री यशवंत जी का जन्म हुआ। आपने मात्र 19 वर्ष की उम्र में 24 फरवरी 1969 को तृतीय पट्टा धीश आचार्य श्री धर्म सागर जी से सीधे मुनि दीक्षा लेकर मुनि श्री वर्द्धमान सागर जी बने। चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी के लिखित आदेश से आपको पंचम पट्टाधीश 24 जून 1990 को पारसोला राजस्थान में पद प्रदान किया गया।
72 वर्षीय आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी 54 वर्ष से दीक्षित होकर 33 वर्ष से आचार्य है। आपके द्वारा अभी तक 89 मुनि आर्यिका क्षुल्लक क्षुल्लिका दीक्षाएं दी गई है। साथ ही
लगभग 60 से अधिक सल्लेखना समाधि शिष्यों की आपके द्वारा कराई गई है। वही 65 से अधिक पंचकल्याणक प्रतिष्ठाये आपके कुशल निर्देशन सानिध्य में हुई है।
उल्लेखनीय है की आपके निर्देशन में विश्व प्रसिद्ध श्री बाहुबली भगवान का महामस्तकाभिषेक वर्ष 1993 वर्ष 2006 तथा वर्ष 2018 में आगम अनुसार कराया गया है।
वर्ष 2022 में भूगर्भ से प्रगटित 1008 श्री महावीर स्वामी का मूल प्रतिमा का भव्य महामस्तकाभिषेक 24 वर्ष बाद राजस्थान के प्रसिद्ध दिगम्बर अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी में आपके सानिध्य में होगा इस लिए आपका विहार चल रहा है
दिगम्बर जैन समाज धामनोद ही नही सम्पूर्ण नगर में उत्साह पूर्वक शानदार आगवानी की तैयारी चल रही है। जैन समाज धामनोद के अध्यक्ष राकेश जैन दीपक प्रधान राजा भाई नरेंद्र जी सहित सभी विशेष तैयारी में लगे है।
संकलित अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
