जीवटता की धनी सप्तम प्रतिमाधारी कमलादेवी
उम्र 101 वर्ष लेकिन आज भी वही जीवटता, जिजीविषा, अतिथि सत्कार और मुनि सेवा की भावना। ये हैं चेन्नई की सप्तम प्रतिमाधारी कमला देवी धाकडा़ जैन जो इस उम्र में भी अपनी सक्रियता और ऊर्जा से सभी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं और भरे पूरे परिवार के साथ रहते हुए भी वह अपने कार्य खुद ही करती हैं।
इनके जीवन में हर तरह की चुनौतियां और झंझावात आये लेकिन अच्छी सोच और सकारात्मक कार्यों के चलते इन्होंने अपने जीवन को गतिमान रखा। कम उम्र में विधवा हुई, एक जवान बेटे को खोया लेकिन बिना हिम्मत हारे अपनी मेहनत और हौसलों के चलते अपने छोटे बच्चों पदम चंद धाकडा़ , महेंद्र धाकडा़ , विमला देवी को संभाला और उस मुकाम पर पहुंचाया जहां आज वो आयरन व स्टील के व्यापार में बड़े व्यवसायी हैं।

कमला देवी जी को आज तक कोई बड़ी बीमारी नहीं हुई है। अगर इन्हें बुखार भी आता है तो ये उपवास रखकर खुद को स्वस्थ कर लेती हैं जो कि दूसरों की नज़र में एक चमत्कार ही है लेकिन इन्होंने इसे अपनी संतुलित जीवन शैली से साधा है।
पिछले चालीस वर्षों से दो दिन एकासन और एक उपवास रखकर गृहस्थ में रहते हुए भी पूरी तरह से त्यागी व्रती वाला जीवन जीती हैं।कमला जी मारवाड़ी बोलती हैं इसलिए मैंने इनकी पोत बहू से बात की और इनके जीवन के बारे में जितना पढ़ा था, उससे और ज़्यादा जानने को मिला।

उनसे इनकी दैनिक चर्या के साथ ही व्रत -उपवासों और इसके महत्व को लेकर बात हुई। जहां लोगों को लगता है कि सूप ,जूस पीने से व मल्टी विटामिन गोलियां खाने से शरीर स्वस्थ रहता है वहीं कमला जी की स्वस्थ और लंबी उम्र का राज अल्पाहार व सादा भोजन है।
1-कमला देवी जी के लंबी उम्र और स्वस्थ रहने का राज क्या है –
मां पिछले चालीस साल से एक बार ही आहार लेती हैं और हर दो दिन के बाद उपवास करती हैं। वहीं हर दिन वह दिन के हिसाब से तेल , घी , हरी सब्जी व सारे रसों का भी त्याग करती हैं। नमक , तेल व तली हुई वस्तुओं का उनका आजीवन त्याग है। शायद यही कारण है कि इन्हें कोई बीमारी नहीं है और ये इतना लंबा जीवन जी पायी हैं और अभी भी पूरी तरह स्वस्थ रहकर अपने कार्य स्वयं करती हैं। क्योंकि कमला जी का मानना है कि पेट को भूखा छोड़ोगे तो खाना पचाने में व्यस्त शरीर के अंग बॉडी हीलिंग का कार्य शुरू कर देते हैं
2- धर्म के प्रति उनके इतने रुझान का कारण क्या है –
मां बचपन से ही बहुत धार्मिक प्रवृत्ति की हैं। शायद इनके पूर्व जन्म के संस्कारों का ही फल है कि ये शुरू से ही बिना देव दर्शन किये भोजन नहीं करती थी और शादी के बाद ससुराल में भी जल्दी उठकर पूजा पाठ और धर्म के कार्य शुरू कर देती थी।
3 – इनके शुरुआती जीवन के बारे में बताइये –
मूल रूप से ये राजस्थान के सीकर के दांता गांव की हैं। तीन वर्ष की उम्र में इन्होंने अपनी मां को खो दिया।मात्र तेरह वर्ष की आयु में इनका विवाह तत्कालीन सीकर महाराज के खजांची के बेटे रतनलाल जी धाकडा़ के साथ सम्पन्न हुआ जो कि बहुत ही राजसी ठाठ वाले व्यक्ति थे पर दुर्योग से 31 वर्ष की अल्पायु में ही पति का निधन होने से इनका जीवन ऐसे मोड़ पर आ गया जहां सिर्फ मुश्किलें थी। तीन छोटे बच्चे और साथ ही गर्भ में पल रही एक बेटी के साथ इन्होंने जीवन की सब चुनौतियों को स्वीकार किया और धर्म पर विश्वास कर जीवन में आगे बढ़ी और बच्चों की पढ़ाई, पालन -पोषण व शादी सब कुछ पूरी तरह से कर्तव्य निष्ठा के साथ किये। लेकिन नियति ने फिर धोखा दिया जब उन्नीस वर्ष की उम्र में इनके सबसे बड़े बेटे नवल की मृत्यु हो गयी।
4 – अभी इस उम्र में इनकी दैनिक चर्या के बारे में बताइये –
अभी मां सुबह तड़के साढ़े तीन बजे उठ जाती हैं । सुबह माला , स्वाध्याय व घर के चैत्यालय में अभिषेक करने के बाद 6 बजे घर से मंदिर के लिए निकलती हैं। 9 बजे घर आकर टीवी पर महाराज श्री की आहार चर्या देखकर ही आहार लेती हैं। उसके बाद घर के अपने कार्य खुद करती हैं। घर के हॉल में दो – तीन बार आधा आधा घंटा वॉक करती हैं। साधू सेवा करना, चौका लगाना, आहार देना , तीर्थ यात्रा, घर के सभी सदस्यों को स्तोत्र पाठ पढ़ाना उनके जीवन का ध्येय बन गया है। सबसे बड़ी बात ये है कि कमला जी ने कोई लौकिक शिक्षा ग्रहण नहीं की है लेकिन घर के सभी सदस्यों को धार्मिक स्तोत्र और पाठ इन्होंने ही पढ़ना सिखाया है और आज भी छह घंटे से ज्यादा स्वाध्याय करती हैं और चाहे कितनी ही सर्दी, गर्मी, बारिश हो इनकी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं आता।
कमला देवी धाकडा़ जी का पूरा परिवार इनके धार्मिक कार्यों में सहयोग करता है। चाहे दो – दो तीन -तीन महीने किसी तीर्थ स्थल पर रुककर चौका लगाने की बात हो या रात्रि में भोजन ना करने का आग्रह, परिवार के हर उम्र का हर सदस्य इनकी बात का मान रखता है। वहीं कमला जी की कोशिश आज भी यही रहती है कि हर किसी के दुख सुख में शामिल हो सकूं।
स्वाती जैन हैदराबाद 7013153327 से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी


