भावनाओं के उदवेग में आकर हम अपनी मर्यादा का उलंघन न करें मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज

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भावनाओं के उदवेग में आकर हम अपनी मर्यादा का उलंघन न करें मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज

भोपाल (अवधपुरी) आचार्य समयसागर जी महाराज संघ के सर्वमान्य आचार्य है,और रहेंगे इसमें किसी प्रकार का कोई संशय नहीं है, संघ के विषय में तथा संघ की परंपरा को लेकर उंगली उठाने का अधिकार किसी को नहीं है मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने इस प्रकार की घटना को अशोभनीय तथा निंदनीय करार देते हुये कहा कि ऐसी घटनाओं से समाज में क्षोभ उठना स्वाभाविक है लेकिन हमारा धर्म क्षोभ का नहीं क्षमा का है,अपने क्षोभ को नियंत्रित करना चाहिये इस क्षोभ के वेग में जो कुछ भी हो रहा है,वह भी धर्म सम्मत नहीं कहा जाएगा मुनि श्री ने पूरी समाज से प्रश्न करते हुये कहा कि हम लोग कहा जा रहे है? हम अहिंसा के पथ पर चलने वाले लोग थोड़े से 

 

 

 

भावनात्तमक उदवेग में आकर अपना नियंत्रण खोकर वही प्रदर्शन कर रहे है, तो हम आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महाराज केभक्त या शिष्य कहलाने के अधिकारी नहीं है उन्होंने प्रश्न करते हुये पूछा कि परम पूज्य गुरुदेव के आदर्श को हम कहा ले जा रहे है? आज सब बातें सड़कों पर आम होंने लगी है,इस बारे में आप थोड़ा सोचिये कि इस हिमालयीन व्यक्तित्व की प्रतिष्ठा को हम कंहा ले जा रहे है? उन्होंने हमें क्या सिखाया गलतियों की निंदा करना चाहिये लेकिन निंदा भी एक सीमा में हो,और सामने वाले को अपनी गलतियों को मानने के लिये प्रेरित करना चाहिये और उसे अवसर दो जिससे वह व्यक्ती जो भी है वह अपनी गलतियों को केवल क्षमा मांग कर न सुधारे बल्कि उसका प्रायश्चित लेकर अपना भव भी सुधारे।

 

 

मुनि श्री ने समाज को संबोधित करते हुये कहा कि ऐसा कोई कार्य न करें जिससे धर्म की प्रतिष्ठा सड़कों पर आ जाए तथा आप भी अनजाने में हिंसा के भागीदार बन जाए मुनि श्री ने कहा कि गलती करने वाले ने तो गलती कर दी लेकिन हम दूसरी गलती से अपने आपको बचाए, हमें धर्म की प्रभावना को देखना है,तथा समाज को अप्रभावना से बचाना है,तथा परम पूज्य गुरुदेव की गौरव गरिमा को खंडित नहीं होंने देना है,तथा मर्यादा को तार तार होंने से बचाना है इस दिशा में हम सभी को प्रयास करना चाहिये,तथा इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिये।

 

मुनि श्री ने कहा में तो इस संदर्भ में कुछ भी बोलना भी नहीं चाहता था जब मुझसे कहा गया तो मेंने भी मजाक में कह दिया कि में तो पहली क्लास वाला हुं, और पहली क्लास वाला किसी को क्या नसीहत देगा? लेकिन फिर भी वर्तमान की दशा पर मन बड़ा व्यथित है कि हम किधर जा रहे है, हमारी परंपरा हमारी गरिमा क्या है, हमें उसे ठीक करना चाहिये उन्होंने सभी भक्तों को नसीहत देते हुये कहा कि भावनाओं के उदवेग में आकर हम अपनी मर्यादा का उलंघन न करें।

 

 

 

 

उन्होंने कहा कि घर की बातों को घर में रहकर सुलझाने का प्रयास करें उस मर्यादा का चीर हरण न करें

उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी लोग इस मर्यादा का पालन करेंगे।उन्होंने पुनःकहा कि पूज्यगुरुदेव और संघ की व्यवस्थाओं के प्रति किसी का भी बोलना कतयी उचित नहीं है,लेकिन अगर इस बात को लेकर यदि किसी ने कुछ बोल दिया तो उस बात को लेकर इतना बड़ा बबाल पैदा कर दें कि हमारी मर्यादा ही हमारे हाथ से छिटकने लगे तो यह भी बुद्धिमानी नहीं कहलाएगी उन्होंने संपूर्ण समाज को संबोधित करते हुये कहा कि ऐसी घड़ी में ऐसी प्रतिक्रियाओं से बचे जो हमारे धर्म को खंडित करती है गुरुदेव हमेशा कहा करते थे कि शंकर बनना है तो विष पीना सीखो तथा विष को पचाना सीखो और मेंने उनसे यही प्रेरणा ली है उन्होंने समाज से भी कहा कि हमें कभी भी ऐसे मौके पे इस तरह का कोई कृत्य नहीं करना चाहिये,जो हमारे धर्म संस्कृति के विरूद्ध हो तथा हमारे समाज की प्रतिष्ठा को खंडित करती हो तथा जिस प्रकार की प्रतिक्रिया आ रही है वह हिंसा की ही पर्याय है हमारा धर्म हिंसा नहीं अहिंसा का है इस बात को सभी को समझना चाहिये और उसी लाईन पर सभी को चलना चाहिये। 

 

 

 

 

मुनि संघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि श्री आचार्य विद्यासागर संस्थान के अध्यक्ष श्री राजेश जैन आई ए एस के प्रश्न के उत्तर में यह बात कही।

        संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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