दुर्बलताओं पर अंकुश जीवन का उद्धार”- मुनि श्री प्रमाण सागर
भोपाल (अवधपुरी)”जगत के सभी पदार्थ महज एक संयोग है,अपेक्षा मुक्त जीवन सहज शुद्ध और शांत होता है,वह क्रोध,लोभ,मोह तथा भय से भयातुर नहीं होता” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने “भावनाओं का अनुशासन” विषय पर चार बातें करते हुये व्यक्त किये।
मुनि श्री ने कहा कि “अनुशासन विहीन प्रेम” संतान के विकास में बाधक है,वही यदि भावनाओं पर अनुशासन होगा तो एक दूसरे के प्रेरक और पूरक बनकर जीवन का उद्धार करोगे अन्यथा मोह के बंधन में फंसकर अपना जीवन बर्बाद कर लोगे मुनि श्री ने रामायण और महाभारत के उदाहरण देते हुये कहा कि एक और धृतराष्ट्र का प्रेम है जिसने संतान के मोह में आकर संपूर्ण वंश का ही नाश कर लिया वही रामायण में श्रीराम ने सीता हरण के पश्चात विवेक और अनुशासन का परिचय देकर राज्य का शासन भी किया और जगतपूज्य बन गये।

मुनि श्री ने कहा कि “भावनाओं का अनुशासन” जीवन का उद्धार करता है,वही वासना का आवेग व्यक्ति को अंधा बना देता है” नदी अपने तट बंधनों से चलती है तो वह दूसरों के जीवन का उद्धार करती है,वही वेगवती नदी तट बंधनों को पार कर बाढ़ की विभीषिका को मचाकर तबाही देती है, नदी जितनी गहरी होगी ऊपर से उतनी ही शांत नजर आएगी जब कि पहाड़ी उथली नदी गर्जना और वेग उत्पन्न करती है,लेकिन समय से पहले सूख जाती है, मुनि श्री ने कहा कि जो अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते है तथा अनुशासन के साथ परिवार समाज का संचालन करते है,वह उन्नति के शिखर पर पहुंच यशकीर्ति की पताका को फहराते है।
उन्होंने कहा कि भावनाओं की गहराई में कभी क्रोध, लोभ,मोह,तथा भय का उदवेग नहीं होता वहा तो क्षमा,दया करुणा और प्रेम का वात्सल्य होता है,यदि आप क्रोध, लोभ, मोह तथा भय से मुक्ती पाना चाहते हो तो अपनी भावनाओं पर अंकुश लगाओ, नियमित “भावनायोग” के माध्यम से अपनी दुर्बलताओं पर नियंत्रित कर सकते हो,और उसे एक बड़ी शक्ती के रुप में प्रस्तुत कर सकते है”
उपरोक्त जानकारी प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया प्रवचन के उपरांत प्रयोगात्मक “भावनायोग” कराया एवं सभा की समाप्ती हुई।सोमवार को मुनि श्री संधान सागर महाराज 24 घंटे तक एक ही आसन में बैठकर ध्यानस्थ रहे तथा 48 घंटे पश्चात आज उन्होंने अन्न जल को ग्रहण किया।
अविनाश जैन से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

