नैतिकता आदर्श व चारित्र नारी के पद विन्यास में सुरक्षित है–अक्षयसागरजी महाराज*
मंगलवार को होगा गंज में युवा सम्मेलन
*संस्कार सम्मेलन में बेटी बहुओ का हुआ समागम
अशोकनगर--संस्कृति नैतिकता आदर्श तथा चारित्र नारी के पद विन्यास में सुरक्षित है। नारी अपने सतीत्व महत्व और आचरण की पवित्रता से विनय शीलता विवेक से इस भारत की धारा को विभूषित कर रही है हमारी बेटिया व बहुओ को अपना आदर्श सती सीता को बना कर जीवनशैली को विकसित करना है वर्तमान में हमारी शिक्षा रहन सहन खान पान पाश्चात्य संस्कृति से जुड़ने के कारण के हमारी संस्कृति और सभ्यता का नुक़सान हो रहा है
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उक्त आश्य के उद्गार श्रमण संस्कृति में नारी विषय पर संस्कार सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुनि श्री अक्षयसागरजी महाराज ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि जीवन में उज्जवलता लाकर आप कल्याण के पात्र बने अनादि कालीन इस श्रमण परम्परा में रिषभदेव महावीर राम हनुमान जी जैसे अनेक महापुरुषों ने जन्म लेकर आत्मा से परमात्मा पद को प्राप्त किया इस वसुन्धरा को नारी ने अपने सतीत्व के कारण गौरवान्वित किया है श्रमण परम्परा में नारी जगत की गौरवगाथा भरी पड़ी है सती सीता पर जब लोक अपवाद आया तो उन्हें जंगल में छोड़ दिया गया और बाद में उन्होंने अग्नि परीक्षा देकर जगत को सती के शील की महिमा से अवगत कराया।
सम्मेलन आपके सुख समृद्धि के लिए ही है
इसके पहले सम्मेलन के प्रारंभ में आचार्य श्री के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन शिक्षाविद् महेंद्र कडैसरा प्रसन्न सर विपिन सिंघी मनीष एम पी ने किया सम्मेलन में मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि आज का युग अर्थ प्रधान होने के कारण हम संस्कारों के साथ ही नैतिक आचरण से दूर होते जा रहे हैं हर व्यक्ति धन के पीछे भागे जा रहा है पूज्यश्री ने आपके सुख समृद्धि के लिए ही इन सम्मेलनों को आहुत कराया है समाज के उपाध्यक्ष महेंद्र कडैसरा ने कहा कि संस्कृति संस्कारों की सुरक्षा ग्रहणीयो के हाथ में मां अपने बेटे बेटियो को घुट्टी में ही संस्कार देती है इन परम्पराओं में कमी आती जा रही है इसे बनाये रखने के साथ ही उत्थान की आवश्यकता है
मुनिश्री ने कहा कि हमारे आदर्श विषयों से कभी प्रभावित नहीं हुए तो हम क्यों भौतिक संसाधनों में उलझकर अपने संस्कारों को नहीं खोना है संस्कार धानी जबलपुर मडिया जी तीर्थ का निर्माण हाथ से चक्की पीस पीस कर मन्दिर बनाया पुर्तगाली सेना के छक्के छुड़ा ने वाली वीरांगना ऐसी ऐसी नारी हुए हैं जिससे हमारी संस्कृति गौरवान्वित है।
फटा कपड़ा पहनना अमंगल का प्रतीक है
उन्होंने कहा कि आज व्यक्ति फैशन के दौर में फटे कपड़े पहनता चला जा रहा है जबकि दिख रहा है वस्त्र नया है सिर्फ फैशन के कारण फ़ाड़ा गया है यह आपके अमंगल का सूचक है दरीद्रता को खुला निमंत्रण है सावधान ऐसी गलतीयो से अपने आप को बचाये सम्मेलन का संचालन विजय धुर्रा ने किया।संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी


