भारतीय संस्कृति की सुरक्षा के लिए हम काम करें–अक्षय सागरजी

धर्म

भारतीय संस्कृति की सुरक्षा के लिए हम काम करें–अक्षय सागरजी
पार्श्वनाथ मन्दिर की 20 वी वर्षगांठ पर हुआ महाभिषेक
श्रमण संस्कृति में नारी विषय पर सोमवार को होगा संस्कार सम्मेलन
अशोक नगर-

-असफलता के दौरान भी हमें सफलता के सूत्र मिलते हैं हमने किसी कार्य को पूरे मनोयोग से नहीं किया अपनी पूरी ताकत नहीं लागाई यदि हम आत्मविश्वास से भरकर अपनी शक्ति लगायेंगे तो सफलता निश्चित मिलेगी संसार की दृष्टि से जो असम्भव है उसे भी सम्भव कर सकते हैं आत्म विश्वास की कमी और अधुरे संकल्प के कारण ही कार्य की सिद्धि नहीं होती कार्य की सिद्धि के लिए संकल्प की आवश्यकता होती है उक्त आशय के उद्गार पार्श्वनाथ मंदिर की 20वी वर्ष गाठ पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री अक्षय सागरजी महाराज ने व्यक्त किए
उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने सबसे पहले हमारी शिक्षा प्रणाली पर प्रहार किया आज जो स्थिति हम जो देख रहे हैं आज हम आपकी भाषा संस्कृति संस्कारों की उपेक्षा कर रहे हैं और अपनी संस्कृति परम्पराओं का पतन होते हुए देख रहे हैं इसे जागरुकता से ही रोका जा सकता है


इसके पहले  पार्श्वनाथ जिनालय की 20 वी वर्षगांठ पर मुनि श्री अक्षय सागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में भगवान श्री पार्श्वनाथ स्वामी का महाभिषेक किया गया इसके साथ ही जगत कल्याण की कामना से महा शान्ति धारा का उच्चारण  मुनि श्री शैल सागरजी महाराज के श्री मुख से हुयी इसका सौभाग्य मनोज रन्नौद विनोद राजू मेडिकल डा डी के जैन राजेश तारई संजय केटी अतुल सिघई सहित अन्य भक्तों को मिला
श्रमण संस्कृति में नारी विषय पर सोमवार को होगा  संस्कार सम्मेलन
मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि  नगर में विराजमान परम पूज्य मुनि श्री 108
अक्षय सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में  दिनांक 18 अप्रैल 2022 को दोपहर 2:30 बजे श्रीगंज मंदिर जी में श्रमण संस्कृति में नारी विषय पर  संस्कार सम्मेलन होगा इस सम्मेलन में समाज की 14 वर्ष से अधिक आयु की बेटियों एवं बहुए विशेष रूप से शामिल होगी समाज के उपाध्यक्ष महेंद्र कडेसरा ने सभी
माता बहनों से अनुरोध किया है कि समय पर स्वयं पधारे तथा अपनी बेटियों एवं बहुओं को साथ में अवश्य लायें व परम पूज्य महाराज श्री द्वारा अपनी अमृतवाणी से हमें जीवन जीने के कुछ महत्वपूर्ण सूत्र दिए जाएंगे।

जैन कुल में जन्म होवे
पूज्य मुनि श्री ने  कहा  कि हमें सौभाग्य से अमृत का घड़ा मिला और हम नासमझी में उसे पैर धोने में बर्बाद कर रहे हैं सत्य धर्म और जैन कुल मिलने पर भी हम क्या करना है इस पर विचार करना है प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइंस्टीन ने अपने जीवन के अंतिम समय में जब उनसे पूछा गया अब करने को क्या शेष रह गया है तो वह कहते हैं मैं भारत भूमि पर जैन घर में जनमू जिससे अपने आत्म तत्व को जान सकूं मैं ने अपने जीवन में सैकड़ों अविष्कार किये लेकिन खोज करने वाले की खोज अभी तक नहीं किया इसलिए मरण के बाद जन्म है तो भारत में जैन कुल में जन्म हो एसी मेरी भावना है ।

आचार्य श्री का संस्मरण सुनाया
उन्होंने आचार्य श्री का संस्मरण सुनाते हुए कहा की एक बार आचार्य श्री ने कहा था की बर्तन को साफ़ रखना     चाहिए यदि बर्तन साफ नहीं होगा तो बर्तन में रखीं वस्तु खराब हो जायेगी इसी प्रकार इस शरीर रूपी बर्तन को भी हमें साफ रखना है

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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