युवा शक्ति के जीवन में बदलाव का पर्याय बना जैन युवा सेमिनार

धर्म

युवा शक्ति के जीवन में बदलाव का पर्याय बना जैन युवा सेमिनार
रामगंजमंडी
परम पूज्य वाक्केसरी संत आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में दो दिवसीय युवा सेमिनार हुआ जो युवाओ के जीवन के बदलाव में पर्याय बना इसके साथ ही इस सेमिनार में विभिन्न विषयों पर मोटिवेशन दिया गया जिसमें युवाओं की वर्तमान सोच, धार्मिक सामंजस्य, और युवाओं के माता-पिता के प्रति कर्तव्य के विषय पर मोटिवेशन दिया गया शनिवार की दोपहर बेला में आचार्य श्री ने सभी युवाओ को माता पिता की सेवा करने एवम चरण स्पर्श करने के लिए कहा इसके साथ ही उन्होंने यह कहा कि सेमिनार के समापन के बाद जब घर जाएं तो अपने माता-पिता के पैरों का प्रक्षालन जरूर करना।

 

 

रविवार की बेला में सेमिनार का द्वितीय दिवस प्रारंभ हुआ जिसमें सर्वप्रथम नयांश जैन ने अपना मंगलाचरण प्रस्तुत किया। सभा का संचालन मोटिवेशनल स्पीकर श्रीमती सुधा जैन चौधरी विदिशा ने किया इसके बाद सभी ने प्रार्थना की
युवाओं को संबोधन देते हुए ब्रह्मचारी तरुण भैया ने कहा जीवन मे कभी किसी के प्रति गांठ नहीं बांधना चाहिए अपनो के प्रति परिवार के प्रति मित्रों के प्रति उन्होंने कहा 9 साल का बच्चा भी अगर गांठ
बांध लेता है तो वह भी जल्दी बूढ़ा हो जाता है। जीवन में देवानंद नहीं धार्मिक क्रिया साधना करते हुए विवेकानंद बनना।

     
इसके साथ ही उन्होंने क्रोध पर नियंत्रण करने की बात करते हुए युवाओ से जिव्हा पर कंट्रोल रखने की बात कीअपने विचार और पैसे पर कंट्रोल होना चाहिए। उन्होंने कहा जीवन में यह महत्वपूर्ण नहीं है की कितना चले लेकिन कहा तक पहुंचे यह महत्वपूर्ण है। कितना खाया है यह महत्वपूर्ण नहीं है कितना पचाया यह महत्वपूर्ण है।
जीवन में चार पावर होना बहुत जरूरी है।
कनेक्टिंग पावर आप किसके साथ जुड़े हैं उन्होंने अर्जुन का उदाहरण देते हुए कहा कि अर्जुन ने कृष्ण का साथ लिया वह जीत गया आपकी जीत में ही निश्चित हो जाती है आपका जुड़ाव निश्चित होता है। कन्वर्टिंग पावर आप किसको कन्वर्ट कर पाते हैं किसको सहमत कर पाते हैं। कन्विंसिंग पावर आप आप किस कन्वेंस होते हैं यह बड़ी बात है माता-पिता से या बड़ों से कंट्रोल पावर यह सबसे महत्वपूर्ण बात है आपका कंट्रोल किस पर है अपने मूल्यों पर आपका अपने विचारों पर आपके अपने पैसे पर कंट्रोल है यदि आपका इन पर कंट्रोल नहीं है तो आपकी हालत बिगड़ जानी है। तरुण भैया ने कहा कि जीवन पारदर्शी एवं चमकीला होना चाहिए हर जगह सफल होना लक्ष्य और उद्देश्य तक पहुंचना हो मस्तक पर आइस फैक्ट्री लगा लेना और दूसरा जुबान पर शुगर फैक्ट्री यदि जुबान को मीठा रखा दिमाग को ठंडा रखा सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी।

         
इस अवसर पर मुनि श्री 108 प्रांजल सागर महाराज ने कहा कि बड़े-बड़े पुरुष महापुरुष हुए हैं राष्ट्र में वे सब मौन रहते हैं उन्होंने कहा व्यक्ति बहुत कुछ कर सकता है अगर उसका उद्देश्य हो यदि व्यक्ति यह देख रहा है कि मुझे कोन देख रहा है कौन बुरा कह रहा है। वह कुछ नहीं कर सकता। बस केवल यही उद्देश्य रखें कि मुझे काम करना है यदि मनुष्य पर्याय को सार्थक करना है तो अकेले रहना क्योंकि दुनिया अच्छा करेंगे तो भी देखेगी बुरा करेंगे तो भी देखेगी जैसा करोगे वैसा ही मिलेगा कभी घबराना मत जैसा नाम वैसा काम करना हिम्मत कभी ना हारेंगे यह गीत गाने से काम नहीं चलेगा। आपकी क्षमता आपकी योग्यता आपके पास है रुकावटें हजार आएगी लेकिन घबराना नहीं है ताकत लगाए सफलता अवश्य मिलेगी।

     
इस अवसर पर युवाओं को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि जो विचार आपके हित में है उन विचारों को आप बाई पास करते हैं जो आपके अहित में है उन्हें आप सीधा अपने अंदर में लेते हो बाईपास उन्हें करें जो हमारे समाज में परिवार में स्वीकार नहीं है। जो श्रेष्ठ विचारक वह अहिंसा अणुव्रत की बात करते हैं कहते है अणु बमों की जरूरत नहीं है अणुव्रतो की जरूरत है। अणुव्रत यदि सभी में समाहित हो गए तो अणु बमों की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने कहा दुनिया की सबसे बड़ी मोटिवेशनल स्पीकर मां होती है।

आचार्य श्री ने कहा कि जीवन को व्यवस्थित चलाना है तो समय-समय पर सब की कदर करनी होगी। उन्होंने का जीवन में स्वावलंबी होकर जियो सहयोग लेकर जिओगे तो कुछ नहीं होगा तुम दूसरों का सहयोग भी नहीं कर पाओगे।

 

 

 

यदि समाज को ऊंचाई तक ले जाना है तो एक दूसरे का सहयोग करो। आज मर्यादा टूट रही है समस्या आ रही है ऐसी समस्याएं समाज को सबसे पहले परिवार को संगठित करो यदि परिवार सही होगा तो समाज भी सही होगा उन्होंने कहा समाज को यदि भूलोगे तो एक दिन तुम मा बाप को भी भूलोगे आप समाज से बड़े नहीं हो सकते हमारा कर्तव्य यह कर्तव्य होना चाहिए कि हमारे मुख से समाज के किसी भी व्यक्ति के लिए बुराई नहीं निकलनी चाहिए। यदि हम ऐसा करते हैं तो दूसरे हमारे समाज की बुराई करने लगते हैं। संबंधों से व्यवहार जुड़ता है और व्यवहार से संबंध जुड़ता है। नैतिकता के विषय में कहा कि आपको यदि कोई बड़ा दिख जाए तो जय जिनेंद्र कर लो यह नैतिकता है। और आपके सामने कोई बड़ा खड़ा है तो आपके मुख से कोई अपशब्द ना निकले। और ऐसा कोई कार्य न हो की मर्यादा टूट जाए। बड़ों को भी चाहिए कि अनैतिक होकर बच्चों के मित्र नहीं बनना चाहिए। नैतिकता के साथ बच्चों के फ्रेंड रहोगे तो समाज का बच्चों का और तुम्हारा भी विकास होगा।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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