शुद्ध जीवन ही समाज का आधार है मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज
भोपाल
“शुद्ध जीवन ही समाज का आधार है”- सच्चाई और नैतिकता जीवन की रीढ़ है, करूणा और सहयोग हमारे जीवन का रक्त है,अनुशासन और संयम हमारी सांसें है, धर्म और मूल्य हमारी आत्मा है। भोपाल अवधपुरी के श्री विद्यासागर प्रबंधकीय संस्थान विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष को भावनायोग प्रवर्तक मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज के सानिध्य में मनाया गया।
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया इस अवसर पर आर एस एस के लगभग पांच हजार से अधिक महिलाओं तथा पुरुषों ने भाग लिया पूरा पांडाल खचाखच भरा था इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि जब तक हमारे जीवन में शुद्धी घटित नहीं होगी तब तक न तो हम खुद शक्तिमान बन सकते हें,और न ही अपनी समाज तथा राष्ट्र को सशक्त बना सकते है,उन्होंने कहा कि भारत तभी शक्तिशाली होगा जब व्यक्ती व्यक्ती के मन में सामाजिक मूल्यों के प्रति निष्टा,तथा जीवन में शुद्धता एवं पवित्रता हो,उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि आज के युवाओं में जीवन मूल्यों के प्रति सार्थकता तथा नैतिकता समाप्त होती जा रही,वह शरीर जन्य आकर्षण में भटक गया है, आप लोग प्रतिदिन सुबह आईना देखते हो? मैं ठीक दिख रहा हुं कि नहीं? शरीर का यह आकर्षण है,जीवन की शुद्धि का आधार नहीं है, यदि किसी की फोटू बहुत अच्छी हो,और एक्सरा खराब हो तो क्या प्रतिक्रिया होगी? प्रति उत्तर देते हुये कहा कि आज लोगों के चहरे पर तो चमक है,लेकिन उनका जीवन घोर, तनाव निराशा हताशा,कुंठा और पीड़ा से भरा हुआ है जो उनकी चेतना को कमजोर और खोखला बना रहा है, यदिआप लोग स्वस्थ समर्थ और शक्तिशाली बनना चाहते हो तो शुद्ध खानपान,संयमित जीवन और नियमित प्राणायाम भावनायोग का अभ्यास करो जो आपके शरीर को स्वस्थ तथाआत्मा को पवित्र कर आत्मोन्नति का मार्ग प्रशस्त करेगा।

मुनि श्री ने युवाओं की बिगड़ी हुई लाईफ स्टाइल और अशुद्ध खानपान तथा विकृत मानसिकता की ओर इशारा करते हुये कहा कि इसी कारण उनका तेज और उनकी आभा दिनों दिन फीकी पड़ती जा रही है,एवं सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसी पोस्ट डालते है जो पूरे समाज में नकारात्मकता को फैलाती है,अनर्गल बातें,फैकन्यूज तथा समाज उत्तेजना,नकारात्मकता,अनास्था, लक्ष्यहीनता की ओर ले जाने वाली बातों से बाहर निकलोगे तभी आप अपनी वाणी की शुद्धता को रख पाओगे तभी आप कुछ उपलब्धि अपनी और अपनी समाज को सशक्त वना सकते हो, तीसरा चरण है आपका “मन” जिसमें बहूत बड़ी शक्ती है वह पारे के समान है यदि कोई उस पारा को खा ले तो उसकी जीवन लीला समाप्त हो जाएगी लेकिन वही पारा संशोधित होकर औषधि के रुप में सेवन किया जाये तो वह जीवन के लिये अमृत बन असाध्य रोगों को ठीक कर देता है,उसी प्रकार यदि मन को हमने साध लिया तो वह मोक्ष का आधार है,और यदि मन के वश में हो गये तो यह नरक का द्वार है,मन से अपने हृदय में क्रोध,ईष्या, लालच,अहंकार, मोह,रूपी जितने भी विकार है,वह हमारी नकारात्मकता को बढ़ाकर अनेक प्रकार की विकृतियों को कुंठित, पीड़ित और अवसाद को जन्म दे रही है,असली शक्ती तभी आयेगी जब आपका मन शुद्ध होगा जब मन शुद्ध होगा तो वह आत्मोन्नति की ओर अग्रसर होगा उन्होंने कहा कि इस देश की उन्नति चाहते हो तो बदलाव कीजिये और उसकी शुरुआत सबसे पहले अपने आप से कीजिये उन्होंने आर एस एस की तारीफ करते हुये कहा आप लोग जो पंच परिवर्तन करना चाहते हो तो उसका एक ही मकसद है “शुद्ध जीवन”व्यक्ति,परिवार समाज, देश और संस्कृति सबमें परिवर्तन आ जाएगा यदि व्यक्ती का जीवन शुद्ध हो जाये व्यक्ती की उन्नति में ही समाज का उद्धार है शुद्ध जीवन ही पंच परिवर्तन का आधार है उन्होंने कहा कि बिखरते हुये परिवारों को देखकर कहना पड़ रहा है, कि जिस भारत ने वसुदैव कुटुम्बकंम के संदेश को पूरे विश्व को दिया उस भारत के लोग आज संयुक्त परिवार से दूर भाग कर भारतीय संस्कृति को छिन्न भिन्न कर लिव इन रिलेशनशिप की वकालत कर रहे है,
उन्होंने कहा कि संत प्रेमानंद महाराज ने जो कहा वह सही कहा लेकिन उनकी बात को भी तथा कथित आधुनिक लोगों ने विरोध करना शुरु कर दिया यह भारत के मान और शान के खिलाफ है,इसे स्वीकार नहीं करना चाहिये मुनि श्री ने सभी को संकल्प दिलाते हुये कहा कि हम सिर्फ भारत और भारतीयता को प्रमुखता देंगे तभी हम भारतीय सभ्यता को बचा पायेंगे।

उन्होंने सभी मीडिया प्रमुखों से कहा कि आज धुंआ उड़ाने वाले तथाकथित लोग ज्यादा सक्रिय है जिसको मीडिया भी प्रोत्साहित करती है इससे नकारात्मकता बढ़ती है आप अच्छी बातों को फैलाइये जिससे चारों और सकारात्मकता की सुगंध फैल सके और धुंआ का नामोनिशान ही न रहे।उन्होंने कहा कि “सच्चाई और नैतिकता जीवन कीरीढ़ है वंही करूणा और सहयोग हमारे जीवन का रक्त है,अनुशासन और संयम हमारी सांसें है, धर्म और मूल्य हमारी आत्मा है”आज “झूठ” सत्य का लबादा ओड़े खड़ा है,और सच्चाई और नैतिकता को इग्नोर कर अपनी ही संस्कृति और अपने ही देश को कमजोर कर रहा है।

प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया सोमवार को मुनि श्री का मौन के साथ उपवास रहता है अतःसभी कार्यक्रम स्थगित रहेंगे अगला प्रवचन मंगलवार को प्रातः8:30 बजे से होगा तथा सांयकाल6:20 से शंकासमाधान होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312


