15 अगस्त दिन जैन नवयुवकों ने शांतिनाथ मंदिर में श्रीजी का मार्जन कर अपने दिन को स्वर्णिम किया

धर्म

15 अगस्त दिन जैन नवयुवकों ने शांतिनाथ मंदिर में श्रीजी का मार्जन कर अपने दिन को स्वर्णिम किया
रामगंजमंडी
हम देखते हैं कि युवा वह बच्चे जिस दिन स्कूल आदि का अवकाश होता है वह उन दिनों को मज़ा पिकनिक घूमने आदि में व्यतीत कर देते हैं। लेकिन रामगंजमंडी जैन समाज के युवाओ ने कुछ अलग किया जो प्रेरणा है। युवाओ ने सार्थक कदम उठाते हुए प्रतिमाओं की सांझ संवार की और प्रतिमाओं का मार्जन किया।

 

 

नगर के बाजार नंबर 1 में स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी में त्रिमूर्ति जिनालय में 15 अगस्त की दोपहर की बेला में प्रतिमाओं का मार्जन किया। दिगंबर जैन प्रतिमाओं का मार्जन की क्रिया क्या होती है इसे समझाते हुए नगर के प्रशांत आचार्य ने बताया कि
मार्जन की क्रिया प्रभु जी की प्रतिमा को प्रासुक रूप से स्वच्छ करने के लिए की जाती हैं। मार्जन की विधि में बड़े ही संयम और एकाग्रता से श्री जी की प्रतिमा को प्रासुक विधि से साफ किया जाता हैं मार्जन की क्रिया से प्रभु की प्रतिमा एकदम उज्ज्वल हो जाती हैं। वैसे तो जिनेन्द्र भगवान ने समस्त कर्ममलों को नष्ट कर दिया हैं उन्हें मार्जन की कोई आवश्यकता नहीं हैं लेकिन भक्तों का कर्तव्य है कि वो अपने प्रभु की मूरत को हमेशा उज्ज्वल रखें। प्रशांत आचार्य ने बताया कि जिस तरह घर आदि की सफाई करते हैं उसी तरह मंदिर जी की साफ सफाई और प्रतिमाओं का मार्जन करना चाहिए।

 

 

रामगंजमंडी नगर के युवा इन प्रतिमाओं का मार्जन करने में अपना सहयोग दे रहे थे और समर्पित भाव से कार्य कर रहे थे उनके मन के जो भाव थे वह सभी को गदगद कर देने वाले थे उसे सुन यही कहा जाएगा कि उनका प्रभु के प्रति श्रद्धा भाव अद्भुत है। इन युवाओं का कहना था कि हम अपने घर और शरीर की सफाई को इतना महत्त्व देते हैं उसे साफ सुथरा रखते हैं तो हमारे मंदिर और भगवान भी स्वच्छ रहें इसी भावना से समय समय पर प्रत्येक प्रतिमा की का मार्जन होता रहना चाहिए।

 

इनका रहा सहयोग
मार्जन की क्रिया में सिद्धार्थ जैन बाबरिया, प्रशांत जैन आचार्य, देवांश जैन,संयम जैन, पीयूष जैन ने विशेष सहयोग प्रदान किया।

अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

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