अद्भुत अविश्वसनीय अकल्पनीय था जो अशोकनगर में हुआ श्रीश जैन ललितपुर की कलम से
अद्भुत अविश्वसनीय अकल्पनीय था जो रक्षाबंधन पर्व पर अशोकनगर में हुआ , वैसे होना तो सुनिश्चित था लेकिन इतनी जल्दी और इतने कम समय मे हो जायेगा इसकी तो कल्पना भी नही थी,, वैसे इस बात से भी इंकार नही किया जा सकता कि जहां निर्यापक श्रेष्ठ पहुचते हैं वहां कुछ भी हो सकता हैं रक्षाबंधन के पावन दिवस पर अकम्पनाचार्य आदि 700 मुनिराजों पर हुए उपसर्ग को याद करते हुए मुनियों की रक्षार्थ किये जाने वाले विधान के आयोजन के मध्य अचानक जो हुआ वो उन सभी लोगों के लिये करारा जबाब हैं जो बार बार किसी मुद्दे को लेकर अशोकनगर समाज को भृमित करने का प्रयास तभी से कर रहें हैं जब से गुरुश्रेष्ठ ने अशोकनगर में प्रवेश किया था।
क्या गजब के लोग हैं अशोकनगर में जो भड़काने पर भड़कते तो हैं मगर परिणाम स्वरूप 10 मिनिट में 100 करोड़ की राशि का त्याग करते हुए एक ऐसे जिनमंदिर के निर्माण की भूमिका बनानें में अपना सहयोग करते हैं जो दर्शनोदय तीर्थ को अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र और निर्यापक श्रेष्ठ को इस सदी का सर्वश्रेष्ठ संत व अशोकनगर जैन समाज को समर्पित भक्तो का शहर घोषित करने के लिये काफी हैं।
कुछ ऐसा लगा कि साक्षात आचार्य कुंद कुंद से लेकर आचार्य विद्यासागर जी महाराज का वरद हस्त निर्यापक श्रेष्ठ के ऊपर था बुंदेलखंडी में कहे तो जैसे सभी आचार्य आज उनके सिरे आ गए हो परिणामस्वरूप आज दुनियां ने वह द्र्श्य देखा जो कल्पना से परे था।

श्रीश जैन कहते हैं की सुबह सुबह मैने पदारोहण के वीडियो का अंश भाग देखा था जिसमें पूज्य गुरुश्रेष्ठ वंशावली का पाठ करने के उपरांत आचार्य कुंद कुंद के शासन काल में प्रवाहित निर्यापक धारा का वर्णन कर रहें थे और जब मैंने tv चैनल खोला तो प्रथम दृष्टया ऐसा ही लगा जैसे आचार्य परम्परा के सभी आचार्यो का अक्स में निर्यापक श्रेष्ठ की आंखों में देख रहा हूं उनके चेहरे के बदलते हाव भाव क्रमशः समस्त आचार्यो का भान करा रहें थे तब मुझें लगा कि आज शनिवार हैं कुछ अच्छा होने की सम्भावनाये हैं शायद यह उसका कोई शगुन हैं और यही सोंचते हुए मैने बारम्बार गुरुश्रेष्ठ को नमन किया और भगवान पार्श्वनाथ से मन ही मन प्रार्थना की, और बोला कि कल मनोज जी के वीडियो में सुना था कि शांति के लिये मात्र सात दिन शेष हैं सम्भवतः यह दिन ही सातवां दिन हो, संभव हैं गुरुश्रेष्ठ के आशीर्वाद से होने वाले अद्भुत कार्यो को भगवान भी मान्य करते हैं तो हम इंसानों की क्या बिसात जो कुछ कहने सुनने की हिमाकत करें, अतः यह दिन शांति की भूमिका के हिसाब से महत्वपूर्ण दिन भी होगा।

कोई दस मिनिट में दस हजार नही कमा पायेगा लेकिन अशोकनगर में भक्तो ने अपने गुरु की प्रेरणा से अपने आराध्य के विराजमान होने के लिये विश्व का सर्वश्रेष्ठ जिनमंदिर बनाने के लिये सो करोड़ मात्र दस मिनिट में समर्पित कर दिए,, यह वो इतिहास हैं जो दुनियां जन्मों जन्मों तक याद रखेंगी, आज फिर यह सुनिश्चित हो गया कि रक्षाबंधन के दिन दीपावली जैसे माहौल का होना निर्यापक श्रेष्ठ की उपस्थिति में ही संभव है गुरुश्रेष्ठ का आशीर्वाद सदा बना रहें इसी मंगल भावना के साथ
श्रीश ललितपुर संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312


