“रक्षाबंधन पर्व” प्रेम, प्रतिबद्धता सांस्कृतिक निष्टा का पर्व है- मुनि श्री प्रमाण सागर
भोपाल (अवधपुरी) जब कोई स्त्री किसी पर पुरुष को उसकी कलाई में एक धागा बांध देती है,तो उसकी दृष्टि में वह स्त्री बहन बन उसकी आंखों में पवित्रता आ जाती है” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किये। उन्होंने “रक्षाबंधन पर्व” की महिमा को पवित्रता और “प्रेम” का प्रतीक बताते हुये कहा,प्रेम के बिना हमारा जीवन अधुरा है,रक्षाबंधन का यह पर्व भाई का बहन की रक्षा का पर्व तो है ही, साथ हीअपने राष्ट्र, समाज, संस्कृति तथा प्रकृति की रक्षा का भी पर्व है,मानवीय रिश्तों के साथ साथ प्रकृति से भी हमारा प्रेम होंना चाहिये तभी हम प्रकृति और प्राणियों की रक्षा कर अपने जीवन का वास्तविक उन्नयन कर सकते है” उन्होंने कहा वर्तमान समय में प्रकृति के साथ जो छेड़छाड़ हो रही है उसके कू परिणाम पूरा विश्व भुगत रहा है,इसलिए ” रक्षा सिर्फ रिश्तों की नहीं प्रकृति की भी बहुत जरुरी है।
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया प्रातःप्रवचन से पूर्व श्रावण शुक्ला पूर्णिमा के शुभ अवसर पर मुनि श्री के मुखारविंद से 55 मिनट की वृहद शांतिधारा भगवान के मस्तक पर संपन्न हुई, एवं भगवान श्रैयांसनाथ के निर्वाण कल्याणक के अवसर पर निर्वाणलाड़ू श्री सम्मेदशिखर की कल्पना के साथ समर्पित गया रक्षा बंधन पर्व का महत्व बताते हुये कहा कि आज ही के दिवस विष्णु कुमार मुनि द्वारा अकंपनाचार्य आदि 700 मुनिराजों की राजा बली से रक्षा की थी उक्त कथा को सुनाते हुये सभी 700 मुनिराजों को स्मरण करते हुये अर्घ समर्पित किये गये।

इस अवसर पर मुनि श्री ने रक्षाबंधन पर्व का धार्मिक सांस्कृतिक,सामाजिक, आध्यात्मिक एवं एतिहासिक पक्ष रखते हुये कहा कि हमारा देश पर्वो का देश है,उत्सवप्रियता हमारी संस्कृति है,कोई न कोई निमित्त ऐसा आता है,कि हम लोग उत्सव और आनंद से भर जाते है,उन्होंने इतिहास की ओर दृष्टि डालते हुये कहा बहादुर शाह जफर ने चित्तोड़ की रानी कलावती पर जब आक्रमण किया तो कलावती ने हुमायूं को राखी भेजकर अपनी रक्षा की गुहार लगाई थी और हुमायूं ने भी उसे अपनी बहिन की लाज मानते हुये रक्षा की,इतिहास की एक और घटना पुरु राजा और सिकंदर के संद्रभ का जिक्र किया जिसमें हेलन ने राखी भेजकर अपनी रक्षा की थी।

मुनि श्री ने कहा कि सामाजिक दृष्टि से तो रक्षाबंधन का यह त्योहार भाई और बहन के रुप में जगत प्रसिद्ध है,तथा धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से सभी धर्मो में अलग अलग मान्यताएं है,जैन धर्म में आज का दिवस मोक्षमार्ग को अक्षुण्ण बनाने के लिये आधार बना इसलिये यह पर्व सभी दृष्टिकोण से महान पर्व है। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया इस अवसर पर समूचे भोपाल ही नहीं अपितु आस पास के जिले से तथा दूरदराज से श्रद्धालु पधारे और उन्होंने मुनि श्री का आशीर्वाद लिया तथा धर्म एवं धर्मायतनों की रक्षा के लिये एक दूसरे की कलाई में रक्षासूत्र बांधे।

कार्यक्रम का संचालन बाल ब्र. अशोक भैया ने किया इस अवसर पर मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित समस्त क्षुल्लक मंचासीन थे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

