मां स्वप्न में भी बेटे का अहित नहीं सोच सकती सुधासागर महाराज
अशोकनगर दुनिया अच्छी हो जाए। यही भावना अनादि काल से चल रही है, लेकिन आज तक दुनिया अच्छी नहीं हुई। दूसरी भगवान की कृपा मेरे पास हो जाए। भगवान की कृपा तो हो रही है। तब ही तो अन्य लोग भी भगवान बन रहे हैं। आप लोग भगवान की कृपा नहीं हो रही ऐसे लांछन लगा रहे हैं। यदि कृपा नहीं हो रही होती तोआप यहां सुरक्षित नहीं होते। कब कृपा नहीं हुई भगवान तो वे भी कृपा करके नही बने। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में चल रही धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज ने प्रकट किए।
उन्होंने कहा कि संसार में कुछ नहीं है कोल्हू के बैल के समान जिंदगी हो गई। अरे भाई तूतो आज बता रहा है हम तो ये सब देखकर ही वैराग्य को प्राप्त हुए। मुझे तो नहीं पता गृहस्थी कैसी होती है।

आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का जिक्र करते हुए कहा की आचार्य श्री कहा करते थे आप लोगों के चेहरे देखकर पता चल जाता है कि आप सुखी नहीं है। आप संसार से दुखी हो रहें हैं कोई ना कोई कमी तो है तब ही तो आप मुनि राज के चरणों में बैठे हो।




श्रमण संस्कृति दिवस के लिए देश-विदेश से भक्तों के नाम आ रहे हैं
जैन समाज इस साल रक्षाबंधन पर्व को श्रमण संस्कृति दिवस के रूप में मुनिश्री पुंगवसुधासागर जी महाराज के सानिध्य में मना रहा है। इसके लिए देश-विदेश से भक्तों के नामऑनलाइन आ रहे हैं। विष्णु कुमार महामुनि राजद्वारा सात सौ मुनि राजों के उपसर्ग को दूर किया
था। उन महातपस्वी मुनिराजों को सात सौ श्रीफलों के साथ अर्घ समर्पित किए जायेंगे। मां स्वप्न में भी बेटे का अहित नहीं सोच सकती।
श्रद्धा सत्य से बड़ी होती है, श्रद्धा में चमत्कार होता है
महाराज श्री ने कहा श्रद्धा सत्य से भी बड़ी होती है सत्य में चमत्कार नहीं है श्रद्धा में चमत्कार होता है दुनिया में जितने भी चमत्कार होते हैं। श्रद्धा में ही होते हैं। संसार में चक्रवर्ती से बढ़ा कोई हो नहीं सकता जिसे आप संसार में सर्वश्रेष्ठ मानते थे उस चक्रवर्ती को जैसे ही
गंधोदक लगाते देखा तो लोग कहने लगें राजन क्या दुनिया में आप
से भी बड़ा कोई है। हम तो जगत में सबसे बड़ा आपको मानते थे
आप से भी बड़ा कोई इस जगत में है। भगवान को देखकर
चमत्कार नहीं हुआ चक्रवर्ती को देखकर चमत्कार हुआ जिनमहिमा क्या है जहां सबसे बड़ा व्यक्ति भगवान के चरणों में नमस्कार करे उसे देखकर हजारों म्लेच्छ खण्ड के राजा भगवान के चरणों में झुक गये। ये कहलाती है जिन महिमा दर्शन ।
उन्होंने कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भीषण युद्ध किया। युद्ध में पराजित देखकर मां ने बेटे से पूछा कि बेटा तेरीगर्दन। बेटा दामोदर बोला मां तूं स्वप्न में भी मेरा अहित नहीं कर सकती। तू मुझे जीवित रखेगी या मारेगी तेरा हित का भाव है। बेटे को लग रहा है मां मार रही है तो मुझे लग रहा है कि मां मेरा हित कर रही है। मां जो भी करेंगी मेरे हित में करेंगी।
जब बेटा सोच रहा है कि मां बाप जो भी सोचेंगे मेरे हित में सोचेंगे। मां बाप कहते हैं बेटा तुम मंदिर चले जाना क्योंकि मां बाप ने मंदिर भेजा है। मैं मन्दिर जाने के लिए बिना विचार किया आया हूं। क्योंकि मां ने कह दिया बस इतना सा कार्य हो गया तो भगवान आपके पीछे दौड़ेगा। उसे पता है कि ये आज्ञा का पालन कर रहा है। बच्चा जब आठ साल का हो जाये तब सम्यक लाभ वर्धनी क्रिया होती है। इसके पहले तो बच्चा मां बाप के कहने पर ही मंदिर जाता है। उसे कुछ भी ज्ञान नहीं रहता जैसे पिता सिर झुकाता है बेटा भी वैसे करता चला जाता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
