रत्तीभर काम नहीं, फिर भी क्षणभर की फुर्सत नहीं”- मुनि श्री प्रमाणसागर

धर्म

“रत्तीभर काम नहीं, फिर भी क्षणभर की फुर्सत नहीं”- मुनि श्री प्रमाणसागर

भोपाल( अवधपुरी)-

एक ही छत के नीचे रह रहे है, लेकिन आत्मीयता,सदभाव और मानवीयता न जाने कहा खो गई है,इंटरनेट की इस अंधी दौड़ में हमारे आपसी रिश्ते न जाने कही पीछे छूटते चले जा रहे है” उपरोक्त उदगार भावनायोग प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने अवधपुरी के विद्या प्रमाण गुरुकुलम् में व्यक्त किये”

 

 

भागदौड़ की इस दुनिया में तेजगति से जाते हुये युवक से किसी ने पूछा कहा जा रहे हो? तो युवक ने जबाब दिया- “पता नहीं” सामने वाले ने हैरान होकर पूछा कंहा से आ रहे? जबाब मिला “पता नहीं”

क्यों जा रहे हो? पता नहीं तो सामने वाले ने विस्मित होकर पूछा आखिर तुम हो कौन? तो उसने कहा “पता नहीं” मुनि श्री ने कहा कि “जिस युग में हम दौड रहे है उसमें हर क्षण एक गति है पर गंतव्य नहीं”मनुष्य के दिल में पल रहे अपेक्षाओं का विस्तार दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है,उसके हृदय की भौतिक आकांक्षा नित्य पांव पसार रही है,भौतिक संसाधनों की कमी नहीं है एक उंगली के इशारे पर सब कुछ हांसिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सूचनाओं के इस युग में नित्य नये साधनों के बीच हमारे भीतर का मनुष्य न जाने कहा खो गया है?

 

 

मुनि श्री ने अतीत की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करते हुये कहा कि आज से जब हम 50 वर्ष पीछे की ओर जाते है तो पाते है कि वर्तमान समय में जो सुख सुविधाएं है बीते दिनों में वह सुख सुविधा नहीं थी आज मनुष्य के पास जितना ज्ञान है उतना पीछे के लोगों में नहीं था लेकिन लोग आज की तुलना में ज्यादा सुखी थे इस भौतिक युग में टैक्नोलॉजी,और संसाधनों का अम्बार तो बहुत तेजी से आगे बड़ा लेकिन संवेदनाओं की कमी हो गई बाहर से तो मनुष्य संवर रहा है लेकिन भीतर से खोखला नजर आ रहा है।जिमऔर व्यूटीपार्लर ने आपको बहूत समर्थ बना दिया लेकिन आपकी आत्मा का स्तर बहूत नीचे गिर गया उन्होंने कहा कि में अक्सर कहता हुं कि आपकी फोटू तो बहुत अच्छी है लेकिन एक्सरा बिगड़ गया जो कि चिंतनीय है। मुनि श्री ने कहा कि ऊपरी चमक ने अंदर की स्थिति बिगाड़ कर रख दी है, भीतरी शक्ती क्षींण होती जा रही है,आज का मनुष्य बातें तो समझदारी की करता है,लेकिन व्यवहार में पागलपन नजर आ रहा है, मुनि श्री ने कहा कि एक नन्हा सा बच्चा जिसने अभी दुनिया देखने के लिये अपनी आंखें भी ढंग से नहीं खोली वह भी मोबाइल की स्क्रीन में खोया हुआ है।

एक युवा जिसे अपनी ऊर्जा को रचनात्मक दिशा में लगाना चाहिये वह भी फैसबुक/इंस्टाग्राम/ में अपनी शक्ती को खपा रहा है मुनि श्री ने कहा कि आपके पास इधर उधर की बातों के लिये सोशल मीडिया के लिये तो समय है लेकिन खुद के लिये कोई समय नहीं मुनि श्री ने कहा कि आज के इस दौर में मनुष्य की सबसे बड़ी क्षति कोई है तो समझ और संवेदनाओं की हुई है,इसने हमारी निजता को लील लिया है हर व्यक्ती फैसबुक/इंस्टाग्राम के फालोअर्स बढ़ाने में लगा हुआ है,और अपनों को खोता जा रहा है, हर व्यक्ति दिशाहीन, विचलित मन,विवेकहीनता में अपना समय बर्बाद कर रहा और तहस-नहस हो रहा है परस्पर वंधुत्व,दया करूणा क्षमा परोपकार आदि की भावनाओं के स्थान पर अहंकार क्रोध लोभ मोह इर्ष्या, विद्वेष, वैर और वेमन्यसता की भावनाओं ने ले लिया है हर व्यक्ति आज दुर्भावना को पाले अंतहीन दौड़ में चित्त और चेतना को विक्रत कर दिया है उसका ही कू परिणाम है कि आज का मनुष्य बाहर से तो खुश दिखाई देता है लेकिन भीतर से भयावह है आज के इस दौर मे जो पांच महत्वपूर्ण चुनौतियाँ है ।

 

 

इस कारण मनुष्य अस्थिर नजर आ रहा है यदि हम सदुपयोग करें और सकारात्मकत सोच को विकसित करें तो हम नकारात्मकता से बच सकते है,परिस्थिति और मनास्थिति में जब सामंजस्य नहीं बनता तो तनाव आता है परिस्थिति नहीं अपनी मनस्थिति को बदलो परिस्थितियों के अनूकूल अपने मन को बना लोगे तो जीवन में आनंद आ जाएगा उन्होंने “भावनायोग” के महत्व को समझाते हुये कहा कि आज मनुष्य का जीवन अस्त व्यस्त हो चुका है अपने समय का सही मुल्यांकन करो अनुत्पादक कार्यों से अपने आपको बचाओ सोशल मीडिया के भ्रमजाल से अपने आपको बचाओ जिन लोगों से आप संबंध बना रहे हो वह मात्र वर्चुअल है वक्त पर कोई काम आने वाले नहीं जीवन के मूल्यों को समझो मन में उल्लास और सकारात्मक दृष्टिकोण को अपनाओगे और भावनायोग करोगे तो आप अंदर से समर्थ और मजबूत बनोगे और चुनौतियों का सामना कर पाओगे।

 

 

उपरोक्त जानकारी प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने दी उन्होंने बताया की प्रतिदिन 8:30 से 9:30 तक मुनि श्री के मुखारविंद से मंगल देशना चल रही है जो आपके जीवन को निखारने में आपकी मदद करेगी आगामी 15 अगस्त से 22 अगस्त तक सामायिक विषयों पर प्रवचन माला होगी जिसमें सभी जैन एवं जैनेत्तर बंधु लाभ उठायें।

   संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *