व्रत एवं उपवास भी एक चिकित्सा पद्धति है- मुनि श्री दुर्लभ सागर जी आरोन में 10 अगस्त से लगेगा 32 दिवसीय संवेग वैराग्य शिविर

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व्रत एवं उपवास भी एक चिकित्सा पद्धति है- मुनि श्री दुर्लभ सागर जी आरोन में 10 अगस्त से लगेगा 32 दिवसीय संवेग वैराग्य शिविर

आरोन

आप जैसा अपने शरीर को बनाओगे वैसा ही यह शरीर बन जाता है। हम जैसा इस शरीर को ढालना चाहेंगे यह शरीर वैसा ही ढलता जाएगा। इस शरीर को जितना आहार हम दे रहे हैं इस शरीर को उतने भोजन की भी आवश्यकता नहीं होती है। जब तक हम अपने मन को मजबूत नहीं करेंगे तब तक हमें ऐसा लगेगा कि हम एक समय भी भोजन नहीं करेंगे तो हमारा शरीर काम नहीं करेगा अथवा हमारे शरीर में कमजोरी आ जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं होता है। जब भी अष्टमी और चौदस की तिथि आए तो आपको एकासन अथवा उपवास जरूर करना चाहिए। एकासन और उपवास के माध्यम से भी चिकित्सा की जाती है। 

 

 

 

 

इस प्रकार की धर्मदेशना पूज्य मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज ने 32 दिवसीय संवेग वैराग्य शिविर की शुरुआत से पहले श्रावकों के मानस को तैयार करते हुए दी। मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज ने अपने दीक्षा गुरु आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि आचार्य श्री ऐसा कहा करते थे कि उपवास एक चिकित्सा है। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को जब जब कोई पीढ़ा होती थी तो आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज तब तब उपवास किया करते थे। और उपवास के माध्यम से उनका रोग हमेशा ठीक भी हो जाया करता था।

चतुर्थ कालीन श्रावक बनो*मुनि श्री ने कहा कि पंचम काल में मोक्ष तो नहीं होता है लेकिन पंचम काल में उत्कृष्ट चर्या वाले मुनि भी होते हैं। और चतुर्थ कालीन चर्या के साधु परमेष्ठि की बात करते हो तो चतुर्थ कालीन श्रावक भी बनो। और हम आपको चतुर्थ कालीन श्रावक बनाने ही आए हैं।

चतुर्थ कालीन समय के श्रावक मात्र एक समय भोजन करते थे। उन्होंने कहा कि एकासन अथवा उपवास से न सिर्फ हमारा शरीर स्वस्थ होता है वरण हमारे भीतर संयम और आत्मबल भी बढ़ता है और पुण्य का संचय भी होता है।

चातुर्मास कमेटी के प्रचार मंत्री सुनील झंडा ने बताया कि मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज के द्वारा लगाई जा रहीं कक्षाओं में श्रावक प्रतिदिन लाभ ले रहे हैं।बुधवार को आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की पूजन करने का सौभाग्य श्री नरेशचंद्र जैन रानू जैन सौरभ जैन भूमरिया परिवार को प्राप्त हुआ। एवं विद्या गुरु उपासक (पुण्यानुभूति पुण्यार्जक) बनने का सौभाग्य श्री निरपेंद्र जैन भाईजी परिवार एवं श्री प्रेमबाबू जैन शैलेष जैन अंकित जैन कलेशिया परिवार को प्राप्त हुआ।

आगामी 10 अगस्त से मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में लगने वाले 32 दिवसीय संवेग वैराग्य शिविर में नामांकन कराने वाले शिविरार्थियों का जैन समाज कमेटी के अध्यक्ष श्री विजय डोडिया,चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष मिंटूलाल जैन बाखर, प्रचार सहयोगी मोनू भाईजी ने शिविरार्थियों का सम्मान किया। इसके साथ ही 32 दिवसीय शिविर में नामांकन कराने वाले महावीर कलेशिया का सम्मान किया गया।

 

सुनील जैन झंडा आरोन से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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