अहंकार इतना बढ़ गया है कि हम धार्मिक स्थल परभी पहुंचकर अपने अहंकार की पुष्टि करना चाहते हैं मुनि श्री सुधासागर महाराज 

धर्म

अहंकार इतना बढ़ गया है कि हम धार्मिक स्थल परभी पहुंचकर अपने अहंकार की पुष्टि करना चाहते हैं मुनि श्री सुधासागर महाराज 

अशोकनगर

पाप रोकने के लिए पाप करना पड़े तो  गुनाह नहीं है। पापियों को न्यायालय सजा देता है। न्यायालय में बैठे न्यायाधीश भी तो मनुष्य ही हैं, किन्तु पाप रोकने के लिए वे किसी पापी को फांसी पर भी चढ़ा देते हैं तो वह पाप नहीं है, तब ही तो पाप रुकेगा, कानूनसे लोग डरेंगे। उक्त धर्म उपदेश मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहे।

 

 

 

 

उन्होंने कहा कि कानून के राज के लिए पापी को सजा आवश्यकता है। कभी धर्म और धर्मात्मा पर अत्याचार मत करना, यदि ऐसा हुआ तो कर्म इसकी सजा देगा। आज व्यक्ति का अहंकार इतना बढ़ गया है कि हम धार्मिक स्थल पर भी पहुंचकर अपनेअहंकार की पुष्टि करना चाहते हैं।मात्र ग्रुप के कारण हम भगवान को भी बीच में ले लेते हैं। आज लोग सज्जनों में भी भेद कर देते हैं। ग्रुप से बहिष्कार ना हो जाए, इसलिए सच्चे गुरु को भी नमस्कार नहीं करते। बताओ भाइयों ऐसा करके हम क्या कर रहे हैं, ऐसा कोई काम न करें जिससे जग हंसाई हो।महाराज श्री ने कहा कि मेरा सिद्धांत है धर्म कभी छुपकर नहीं करना दान कभी छुपा कर मत देना, नीति है।                            चाणक्य ने चन्द्रगुप्त को समझते हुए कहा कि दान देने वाले का सम्मान करना दान का पैसा भी तो बाजार में आता है। हम धर्म के आयातन बनाकर मजदूरों, कारीगरों,व्यापारियों को पैसे देकर पैसा मार्केट दिखाकर देना चाहिए

सरकार क्या करती हैं,मनरेगा नरेगा आदि योजनाओं से। गरीबों को काम दिया जाता है, हम लोग मन्दिर बनाकर सेठों के पैसे को गरीबों तक पहुंचा देते हैं, इससे गरीब का पेट भर जाता है और हमारे देश की संस्कृति सुरक्षा होती चली जाती है और देने वाले को भी सन्तोष रहता है। सब कुछ बुरा है मैं अच्छाहूं तो सद्रति निश्चित हैमुनिश्री ने कहा कि सब कुछ बुरा है मैं अच्छा हूं तो सद्गति निश्चित है। सब कुछ अच्छा है और मैं बुरा तो दुर्गतिनिश्चित है ।जगत को अच्छा करने की सोची है पर कर नहीं सके, खेद है कि  अच्छे देश में रह रहे हैं फिर भी बुरा काम कर रहे हैं, ऐसा नहीं करना चाहिए, इससे हमारा देश बदनाम होता  है। देश की शान घटती है। यदि देश की शान बढ़ा नहींसकते तो कम से कम ऐसा कोई काम न करें, जिससे देश का मान कम हो। अच्छे देश के वासी हो तुम किसी देश की नकल मत करना।तुम जैन, ब्राह्मण, क्षत्रिय हो तुम्हारेलिए अच्छा कुल जाति मिली। हमारे बाप दादे अच्छे थे तो हम कोई ऐसा काम न करें, जिससे हमारा देश कुल जाति बदनाम हो। हमें इस धरती पर कुछ अच्छा करने कासौभाग्य प्राप्त हुआ तो इस जीवनको सार्थक बनाए 

    संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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