जिनवाणी रूपी वृक्ष में श्रद्धा,भक्ति ,विश्वास के जल देने से धर्म रूपी फल की प्राप्ति होगी।आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज 

धर्म

जिनवाणी रूपी वृक्ष में श्रद्धा,भक्ति ,विश्वास के जल देने से धर्म रूपी फल की प्राप्ति होगी।आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज 

टोंक जीवन में आपदा और कष्ट किस प्रकार आते हैं? आपका युद्ध किनसे हो रहा है? दुख, कष्ट कैसे दूर हो? कितने प्राणियों का आप विराधना मृत्यु करते हैं? किन कार्यों से पुण्य मिलता है? किन कार्यों से पुण्य पाप का मिलता होता है? सौंदर्य प्रसाधन कौन से हैं? और किनका सौंदर्य करना चाहिए आदि अनेक विषयों पर मार्मिक उपदेशआचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने दिया।युद्ध में एकपक्ष को पराजय मिलती हैं।युद्ध लालसा इच्छाओं के लिए होता हैं।युद्ध से विनाश होता हैं इसलिए परिग्रह छोड़कर प्रेम शांति से रहिए। घर,समाज धर्म के मुकदमे चल रहे है जिन्हें 100 से 150 वर्ष भी हो गए प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी ने 1105 दिन अन्न त्याग ,18 करोड़ मंत्रों के जाप ,साधना जिनेन्द्र भक्ति से जैनधर्म ,संस्कृति की विपदा का निराकरण कर विजय दिलाई।यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने धर्म नगरी टोंक में प्रकट की राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि जनश्रुति अनुसार खारे समुद्र के मंथन से अमृत मिला। तीर्थंकर भगवान की जिनवाणी से णमोकार मंत्र रूपी अमृत हैं जो विषय भोगों से मरणासन्न प्राणियों को नया जीवन देता हैं।जिनवाणी धर्म के प्रति विश्वास श्रद्धा जरूरी है।जिस प्रकार वृक्ष की जड़ में पानी देने से फल मिलता हैं,उसी प्रकार जिनवाणी रूपी वृक्ष में श्रद्धा ,भक्तिरूपी जल से धर्म रूपी फल मिलता है नमोकर मंत्र बहुत शक्तिशाली इससे मुक्ति मिल सकती हैं दैनिक क्रियाओं में जल के अत्यधिक उपयोग से अनंतानंत छोटे जीवों की हत्या होती हैं शरीर के सौंदर्य प्रसाधन सामग्री हिंसात्मक होती हैं। सभी को आत्मा का सौंदर्य पर ध्यान देना चाहिए इसके लिए धर्म धारण करना होगा। जैन धर्म में 24 कामदेव हुए हैं वह भी आत्मा के सौंदर्य से भगवान बने हैं मोह के कारण आप सभी दुखी हैं क्योंकि आपकी धर्म , नमोकर मंत्र पर श्रद्धा विश्वास नहीं है।इसलिए पाप के अर्जन से बचे।इसके लिए धर्मरूपी लक्ष्मण रेखा का उपयोग कर मनुष्य जीवन को सार्थक करने का प्रयास करे। आचार्य श्री के शिष्य मुनि श्री ध्येय सागर जी के केशलोचन हुए उपस्थित श्रद्धालुओं ने तप त्याग की अनुमोदना की । श्री पवन और श्री विकास जागीरदार अनुसार दिनांक 26 जुलाई शनिवार श्री जी मार्जन समिति आदर्श नगर टोंक को 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज जी की विशेष अष्ट मंगल द्रव्य से पुजन करने का सौभाग्य इन मंडल के श्रावक श्राविकाओं को प्राप्त हुआ है। पुण्यार्जक परिवारों द्वारा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की।आचार्य श्री वर्धमान सागर वर्षायोग समिति एवं दिगम्बर जैन समाज टोंक के तत्वाधान में अखिल भारतीय पत्रकार संगोष्ठी का आयोजन समागम शांति पर किया गया। संयोजकश्री राजेंद्र महावीर अनुसार जिसमें 3 सत्रों में अनेक विषयों पर आपसी संवाद होगा जिसमें सामाजिक समरसता पर चारित्र चक्रवती का योगदान ओर प्रथमाचार्य और उनके जीवन मूल्यों की वर्तमान में प्रासंगिकता पर विभिन्न वक्ताओं ,आचार्य श्री संघ और आचार्य श्री की धर्मदेशना ओर मार्गदर्शन प्राप्त होगा।आवास समिति के श्री ज्ञानचंद श्री कुंदन द्वारा अतिथियों की समुचित व्यवस्था की गई है ।चातुर्मास समिति अध्यक्ष श्री भागचंद जी, श्री राजेश सराफ मंत्री एवं संयोजकश्री कमल सराफ अनुसार समापन सत्र में ग्रंथों और साहित्य का विमोचन एवं अतिथियों का सम्मान चातुर्मास समिति एवं दिगंबर जैन समाज द्वारा किया जाएगा।

संघ के मुनियों आर्यिका माताजी द्वारा श्रावक श्राविकाओं को विभिन्न धार्मिक विषयों का अध्ययन कराया जा रहा हैं जिसमें सभी उम्र के समाज जनों द्वारा उपस्थित रह कर धर्म ज्ञान में वृद्धि की जा रही हैं। आज की धर्मसभा में चातुर्मास समिति एवं समाज द्वारा आगत विद्वानों एवं अतिथियों का सम्मान किया जा रहा हैं उदयपुर की धर्मनिष्ट ब्रह्मचारिणी पूजा दीदी का भी सम्मान हुआ

राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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