अपेक्षा मुक्त जीवन जीने की शैली अपनाओगे तो कभी उपेक्षा के शिकार नहीं होगे प्रमाण सागर महाराज
भोपाल
तलवार” के घाव से जितनी पीड़ा नहीं होती उससे कही अधिक पीड़ा “उपेक्षा” से होती है,बाहरी आघात को तो इंसान बरदाश्त कर लेता है,लेकिन जिससे वह अत्यधिक अपेक्षा रखता है उससे जब उपेक्षा मिलती है तो वह व्यक्ती अंदर से टूट जाता है,और डिप्रेशन में आकर आत्महत्या तक करने का विचार बना लेता है। उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने विद्या प्रमाण गुरुकुलम में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किये”।
मुनि श्री ने”उपेक्षा” मूलक प्रवृति के बचाव की चर्चा करते हुये कहा कि कोई हमारी कितनी भी उपेक्षा करे लेकिन आप उस उपेक्षा को इग्नोर करोगे तो उपेक्षा करने वाले व्यक्ति का उत्साह भी ठंडा हो जाएगा उन्होंने कहा कि नियमित भावना योग करने वाला व्यक्ती बहूत ही सहज सरल और शांत हो जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुये कहा कि मान लीजिये आप उतनी दूर से प्रवचन सुनने आये और किसी कारण बस उस दिन आपको प्रवचन नहीं मिल पाया तो तुरंत ही नैगेटिव प्रतिक्रिया दोगे,दूसरा एक और उदाहरण देते हुये कहा कि अपने आपको विशेष मानकर पूरे परिवार के साथ इस तैयारी के साथ आये कि आज तो हमें पूरा सम्मान मिलेगा लेकिन लेट हो गये और संचालक की नजर नहीं पड़ी प्रवचन भी शुरू हो गया तो मन में कही तरह के विचार उत्पन्न होंगे और नकारात्मक प्रतिक्रिया भी हो सकती हैं,थोड़े लेट क्या हो गये संचालक महोदय देखा तक नहीं।एक “नकारात्मक वेग” ने आपके सारे उत्साह को ठंडा कर सारे पुण्य को क्षीण कर दिया।
मुनि श्री ने कहा कि”अपेक्षा जब आग्रह का रुप ले लेती है, उसकी पूर्ति न होंने पर व्यक्ति अंदर से स्वंय को उपेक्षित महसूस करता है तथा उसकेअंदर आत्म विश्वास की कमी हो जाती है और वह संबंधों में खटास उत्पन्न करती है, उन्होंने उपेक्षा रुपी प्रवृति से बचने का उपाय बताते हुये कहा कि इसका “भावनायोग” के माध्यम से बहुत अच्छा समाधान है, “सहज रहो”-“शांत रहो” का मन ही मन उच्चारण करते रहें इस प्रक्रिया से आपको तुरंत लाभ मिलेगा।

मुनि श्री ने कहा कि कोई तुम्हारा सम्मान करे तो उसे सहज भाव से स्वीकार करो,और कोई तुम्हारा अपमान करे तो उसे मन से इग्नोर करो “अपेक्षा मुक्त जीवन जीने की शैली अपनाओगे तो कभी उपेक्षा के शिकार नहीं होगे उन्होंने कहा कि”अपेक्षा जब आग्रह का रुप लेती है,और जब उसकी पूर्ति नहीं होती है,तो व्यक्ती स्वयं को अंदर से उपेक्षित महसूस करता है,उसके अंदर आत्मविश्वास की कमी हो जाती है,जो आपके आपसी संबंधों में खटास उत्पन्न करती है,”कभी भी किसी की उपेक्षा और उसका तिरस्कार मत करो वर्ना वह तुम्हारा बहूत बड़ा सिरदर्द भी बन सकता है।

मुनि श्री ने कहा कि कही बार गलत फहमी में न चाहते हुये भी व्यक्ती उपेक्षित महसूस करता है, जैसे आप धर्म सभा में आये और संचालक की नजर नहीं पड़ी तो उसे भी सहजभाव के साथ लो उन्होने कहा कि
“प्रवचन” मात्र सुनने के लिये नहीं,जीवन में उतारने के लिये है, जिससे आपका जीवन सहज और शांत बन सके।
दयोदय महासंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया विद्या प्रमाण गुरुकुलम् अवधपुरी में प्रतिदिन 8:30 बजे 9:30 बजे प्रवचन, दोपहर 3 बजे मूलाचार की कक्षा तथा सांयकाल6:20 से जगत में ख्याती प्राप्त शंकासमाधान कार्यक्रम नियमित हो रहे है। तथा आगामी 28अगस्त से 6 सितंबर तक दशलक्षण महापर्व पर संस्कार शिविर आचार्य विद्यासागर प्रबंध संस्थान गुरुकुलम् के विशाल परिसर में श्रावक संस्कार शिविर का आयोजन किया जाएगा जिसका ओन लाईन रजिस्ट्रेशन प्रमाणिक एप के माध्यम से शुरु हो चुका है स्थान सीमित रहेंगे अतः समय रहते अपना रजिस्ट्रेशन करा लें।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
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