श्री अशोक पाटनी आरके मार्बल ने कहा अशोक नगर समाज ने जितनी मेहनत की उतना करना आसान नहीं पुण्य के उदय से हमें ये भारत माता की गोद जन्म में मिलीं है इसे सार्थक करें — सुधासागर जी महाराज

धर्म

श्री अशोक पाटनी आरके मार्बल ने कहा अशोक नगर समाज ने जितनी मेहनत की उतना करना आसान नहीं पुण्य के उदय से हमें ये भारत माता की गोद जन्म में मिलीं है इसे सार्थक करें — सुधासागर जी महाराज

अशोक नगर
–पुण्य के उदय से हमने भारत माता की गोद में जन्म मिला है भारतीय बहुधा पर विचार करने का मौका मिला है इसे सार्थक करें यदि तुम्हें अपनी प माटी पर गर्व हैं तो तुम जहां जहां से निकल जाओगे वह माटी चन्दन बन जायेगी जब मैं आचार्य श्री के दर्शन करने रामटेक गया तो मुझे स्पेशल आशीर्वाद मिला क्योंकि मेरा गुरु पर विश्वास है कभी तुमने सोचा कि आज मैं धन्य हो गया जिस भूमि पर तीर्थंकर भगवान का जन्म हुआ महावीर राम कृष्ण जी जैसे महान आत्माओं ने अवतार लिया उसी माटी में मुझे जन्म लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है यदि मुझमें थोड़ी सी भी योग्यता आई है तो मैं अपनी मां भारती की सेवा करूंगा उक्त आश्य केउद्गार सुभाषगंज मैदान में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए।

 

इसके पहले जैन समाज के भामाशाह अशोक पाटनी श्रीमति सुशीलापाटनी अपने पूरे परिवार के साथ मुनिपुंगव श्रीसुधासागर जी महाराज ससंघ की चरण वंदना करने विशेष विमान से यहां पहुंचे जहां जैन समाज अध्यक्ष राकेशकासंल महामंत्री राकेश अमरोद मंत्री विजय धुर्रा कोषाध्यक्ष सुनील अखाई संयोजक उमेश सिघई सहित अन्य प्रमुख जनो ने उनका स्वागत किया।

इस दौरान अशोक पाटनी ने कहा कि पिछले दिनों जितनी मेहनत अशोक नगर जैन समाज थूबोनजी कमेटी ने की है उतनी मेहनत करना आसान नहीं है वर्षो से मैं देख रहा हूं जहां जाओ अशोक नगर के युवाओं का हुजूम मिलता है गुरु की आगवानी की चर्चा पूरे देश में हैं हम लोग टेलीविजन पर देख रहे थे इतनी खूबसूरत जितना आप पिच्छिका परिवर्तन में करते हैं वैसा ही नजारा सड़को पर कर दिखाया ।

अशोक नगर के बारे में जो सुना था उससे कहीं आगे निकला
श्रीमति सुशीला पाटनी ने कहा कि यहां के बारे में जो सुनते थे उससे कहीं अधिक देखने को मिला अशोक नगर वालो4 के पुण्य की बहुत प्रशंसा करेंगे आप लोगों को किशनगढ़ नारेली अजमेर पंच कल्याणक संभालना है आप को अभी से आमंत्रण दे रहे हैं इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि आज हम अपने बीच जैन समाज के भामाशाह परिवार को पाकर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं जैन पंचायत की टीम किशनगढ़ गई थी और आज आप पूरे परिवार के साथ आये हम सम्पूर्ण समाज की ओर से आपका अभिनन्दन करते हैं

भारत की प्रतिभाएं चंद चांदी सिक्को के लिए विदेश जा रही है
महाराज श्री ने कहा कि आज क्या हो रहा है भारत की सभी प्रतिभाएं चंद चांदी के सिक्कों के लिए अपने देश को छोड़कर यूं ही पलायन कर जाती है इन प्रतिभाओं को रोककर भारत माता की सेवा में उनकी ऊर्जा का उपयोग करना होगा योग्य बच्चे विदेश जा रहे हैं और जब कोई संकट आता है तब ये ही भारत भूमि उन्हें काम आती है यदि तुम्हें थोड़ा भी गर्व हैं तो इसे छोड़ कर मत जाना तुम्हें अपने माता-पिता पर गर्व हैं तो उन्हें छोड़ कर मत जाना अपने गुरु को छोड़ कर मत जाना इतना ही तो होगा कि वहा पचास लाख मिलेंगे यहां पांच लाख मिलेंगे लेकिन यहां की आबोहवा में संस्कार ये नहीं छूटेंगे
भक्त की श्रद्धा का चमत्कार हैं जहां तुम चाहोगे गुरु वहां पहुंच जायेंगे
उन्होंने कहा कि भक्त की श्रद्धा का चमत्कार हैं जहां तुम चाहो गुरु पहुंच जायेंगे भक्ति में इतनी शक्ति होती है जो चाहे वह हो जाता है भगवान के ऊपर विश्वास करना होगा मंगचुग आचार्य ने ये ही तो किया ऐसा हो ही नहीं सकता कि आप उनका नाम जपो और अग्नि ना भूजे हो ही नहीं सकता है हमारा विश्वास है ये मंत्र काम करेगा वैद्य ने ज़हर भी दे दी तुमने विश्वास कर के खा लिया तो वह औषधि का ही काम करेगा उन्होंने कहा कि क्या तुम्हें उस क्रिया पर गर्व हैं जो तुम करने जा रहे हो क्या तुम्हें भारत में जन्म लेने पर गर्व हैं विदेशी लोग भारत में ज्यादा रह रहे हैं या भारतीय लोग विदेश में अधिक रह रहे हैं

दुनिया के हाथ की हलवा पुड़िया खानें में आनंद नहीं है मां की सुखी रोटी में आनंद हैउन्होंने कहा कि दुनिया के हाथ की हलवा पुड़िया खानें में आनंद नहीं है मां की सुखी रोटी में आनंद है क्योंकि वह भावनाओं से भरी होती है हम भारत मे जन्मे और भारतीय भूमि पर ही प्राणों को न्यौछावर करेंगे भारत में हमारे इष्ट आराध्य जन्मे और यही से निर्वाण को प्राप्त किया तो मैं भी यही रहूंगा और इसी भूमि पर मरूंगा मै सुखी रोटी खाऊंगा लेकिन अपनी भारत माता की गोदी में रहूंगा

 

 

धन के लोभ में लोग भारत छोड़कर जा रहे हैं हमारे तीर्थकरो ने भारतीय भूमि पर विहार किया चाहते तो विदेश जा सकते थे उनके पास रिद्धियां थी देवता उनकी सेवा में थे लेकिन नहीं उन्होंने मात्र सम्पूर्ण आर्यावर्त में ही विहार किया ऐसी पवित्र पावन भूमि को हम वदना कर रहे हैं हमें ऐसा कोई काम नहीं करना जिससे मेरे भारत की बदनामी हो मेरे देश का गौरव कम हो मुझे वह करना है जिससे मेरे देश का मस्तक ऊंचा हो।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *