वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमानसागर जी महाराज ससंघ का टोक की धरा पर हुआ भव्य ऐतिहासिक मऺगल प्रवेश।

धर्म

वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमानसागर जी महाराज ससंघ का टोक की धरा पर हुआ भव्य ऐतिहासिक मऺगल प्रवेश।

टोंक

अद्भुत, अद्वितीय, अविश्वसनीय, अविस्मरणीय! टोक नगरी एक ऐसे दृश्य की साक्षी बनी , जिसके लिए धरती वासियों के साथ साथ देवता भी तरसते है। अवसर था आचार्य श्री 108वर्धमान सागर महाराज ससंघ के वर्षायोग 2025 हेतु मंगल प्रवेश का। राजस्थान मे भुगर्भ से प्रकटित 65 जिन बिम्बो के अतिशय से सुशोभित भगवान् आदिनाथ की अतिशयकारी नगरी टोक को आज गर्वित होने का अहसास तब प्राप्त हुआ जब बीसवीं सदी के प्रथम दिगम्बराचार्य चारित्र चक्रवर्ती 108 श्री शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण परम्परा के पंचम पट्टाधीश, जैन सम्प्रदाय के सर्वोच्च आचार्यों में से एक वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागरजी महाराज ससऺघ वर्ष 2025 के चातुर्मास हेतु अपने चतुर्विध सऺघ सहित टोक के जैन नसिया जी मन्दिर मे भव्यातिभव्य महामऺगलप्रवेश किया

गुरु आशीर्वाद से संकल्प ओर भक्ति की शक्ति मिलती हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जीसंसार एक समुद्र की भाति है जिस प्रकार समुद्र सागर को जहाज के माध्यम से पार किया जाता है उसी प्रकार भव सागर रुपी समुंद्र से आप दीक्षा संयम रत्नत्रय धर्म धारण कर भव संसार से पार हो सकते हैं।गुरु का जीवन में बहुत महत्व होता है गुरु जब से शिष्य के मस्तक पर हाथ रखते हैं, दीक्षा देते हैं, उनकी करुणा उनका वात्सल्य मिलता है तब शिष्य के दुःख दूर हो जाते हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी को स्मरण कर बताया कि 55 वर्ष पूर्व सन 1970 में आए थे आचार्य गुरु के साथ चातुर्मास भी किया था यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने टोंक नगर प्रवेश पर आयोजित धर्म सभा में प्रकट की।राजेश पंचोलिया गुरु भक्त अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि गुरु शिष्य से निष्ठा समर्पण की अपेक्षा रखते है गुरु आशीर्वाद से संकल्प ओर भक्ति की शक्ति मिलती है संयम तप से जीवन को उन्नति की ओर ले जाने से जीवन सार्थक होता हैं इस अवसर पर आचार्य श्री अजित सागर जी का भी गुणानुवाद किया इसके पूर्व आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 36 साधुओं सहित नगर गौरव मुनि श्री 108निर्मल सागर जी एवं अन्य साधुओं की जन्म नगरी टोंक में भव्य मंगल प्रवेश हुआ आचार्य संघ के आगे श्रीजी शोभायात्रा में विराजित रहे।टोक की की धरती का कण कण आज इठला रहा था क्योंकि धरती के भगवान के चरण आज उसकी धरती पर पढ़ रहे थे। चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर महाराज की पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश को अपनी भूमि पर 55 वर्ष बाद एक बार फिर पाकर टोक वासियों का रोम रोम पुलकित हो रहा था।अध्यक्ष चातुर्मास समिति,एवं सकल जैन समाज प्रवक्ता पवन एवं विकास अनुसारआज प्रातः काल की बेला से ही से ही भक्तों का विभिन्न स्थानों से भक्तो आगमन प्रारम्भ हो चुका था। धर्म नगरी टोक का बच्चा बच्चा श्री सऺघ एव मेहमानो की अगवानी के लिए पुर्णतया तैयार था। ये सब देख इंद्र भी कहाँ पीछे रहने वाले थे, आचार्य संघ की टोक मे में अगवानी करने हेतु इंद्र देव ने गत दो दिवस से से ही आसपास के क्षेत्रों और मार्गो को वर्षा द्वारा भिगो कर गुरु आगमन का संदेश दे दिया और वर्षा के जल से साफ कर दिया।  7 जुलाई की प्रातः से ही सभी जनों के चेहरे पर उभरे खुशी के भाव स्पष्ट नजर आ रहे थे।टोक वासियों के55 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा अब पूरी होने जा रही थी। संघ का भव्य स्वागत करने हेतु टोक प्रवेश की जगह पर भव्य तोरण द्वार बनवाया गया था। कदम कदम पर आचार्य श्री के मंगल प्रवेश और अभिनंदन के होर्डिंग्स नजर आ रहे थे।नवाबो की नगरी के नाम से मशहूर टोक पूरी तरह से केशरिया रंग में रंगी थी।प्रातः काल 7 बजे से आस पास के गांवों से श्रद्धालुओं की अपार संख्या गुरु भक्ति के लिए प्रवेश द्वार पर पहुंचने लगीं। और देखते ही देखते हजारों का अपार समूह जयकारों के उद्घोष से गूंजने लगा।  चारों और स्त्री पुरुष अगवानी करते नजर आ रहे थे। जिले की प्रथम नागरिक श्रीमति कल्पना अग्रवाल जिला कलेक्टर टोक, श्री विकास सागवान पुलिस अधीक्षक टोक, श्रीमति सरोज बऺसल जिला प्रमुख टोक सहित समाज के सभी जन भव्य अगवानी हेतु उपस्थित थे। 7:15 बजे आचार्य श्री ने संघ सहित टोक द्वार की सीमा में प्रवेश किया। प्रथमाचार्य श्री शान्ति सागर जी एव आचार्य श्री वर्धमानसागर जी की जयकारों से आकाश गुंजायमान हो उठा। प्रवेश द्वार पर आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन हुए।फिर प्रारम्भ हुई शोभायात्रा। आगे आगे घोड़े, ऊंट , तरह तरह के बैंड बाजे, साथ मे विभिन्न पोशाकों में स्थानीय समाज जन। स्थानीय महिलाएं मस्तक पर कलश धारण कर चल रही थी। भक्ति भाव से युवाओं ने बैंड वादन किया।  मोसम भी अपनी मंद बयारों से आचार्य श्री की अगवानी कर रहा था और साथ में सभी श्रद्धालु जनों को शीतलता प्रदान कर रहे थे। टोक का प्रत्येक नागरिक आज आचार्य संघ के दर्शन और शोभायात्रा में शामिल होने को आतुर था। श्रद्धालुओं के हुजूम के बीच आचार्य संघ मानो किसी सिंह की भांति चल रहे थे।  टोक नगरी आज उत्साह और भावों की धरा नजर आ रही थी। । श्रद्धालुओं ने गुरु आगमन के साथ ही वर्षायोग के लिए एक नए उत्साह का बिगुल बजा दिया निश्चित समय पर सऺघ का प्रवेश नसिया जी मे हुवा जहा समाज के पदाधिकारियों एव वर्षायोग समिति ने आचार्य श्री के पाद पक्षालन किये तथा मन्दिर जी मे दर्शन के उपरांत श्री सऺघ मऺचासीन हुवा सर्वप्रथम जिला कलेक्टर महोदया, पुलिस अधीक्षक महोदय,जिला प्रमुख महोदया सहित समाज के गणमान्य जनो ने चित्र अनावरण कर द्वीप प्रज्वलित कर धर्मसभा का शुभारंभ किया तत्पश्चात आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज एवं पट्ट परंपरा के आचार्य वृन्द को अर्घ समर्पित किया गया। पुण्यार्जक  परिवारों द्वारा आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की ।इस अवसर पर समिति और स्थानीय समाज ने गज्जू भैया, प्रमित जैन, छोटू भैया और तारा देवी सेठी का उनके त्याग, समर्पण, और सेवा के लिए विशेष अभिनंदन किया गया। 

सभी अतिथियों के लिए आवास , प्रवास और भोजन की समुचित  व्यवस्था थी। स्थानीय लोगो के सहयोग और समिति के मार्गदर्शन से गुरु प्रवेश के अवसर को एक ऐतिहासिक स्मृति बनाने में समाज के युवाओ ने के श्रावकों ने अहम भूमिका निभाई।इस अवसर पर आसपास के गांवों से जन समूह आचार्य संघ की अगवानी हेतु टोक आये। , जयपुर , किशनगढ़, कोटा , निवाई लावा,डिग्गी टोडा,देवली,पिपलु,उनियारा, इचलकरंजी, धरियावद, सनावद, जोबनेर, इंदौर, और अन्य अनेक शहरों से श्रद्धालुओं का आगमन हुआ।हजारो जन समूह के भावों से भरी टोक आज सच मे धर्म नगरी लग रही थी। 55 वर्षों का विहार आपका, दिग्विजय सा लगता हैजहां पहुंच जाते है गुरुवर, समवशरण वहीं लगता है,तेरी चर्या से गुंजित गर्जित गर्वित हो गया गगन, राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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