श्रावक को श्रद्धावान विवेकवान होकर क्रिया कार्य करना चाहिए मुनिश्री हितेंद्र सागर महाराज। 
पारसोला। 
पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज विशाल संघ सहित आचार्य पदारोहण स्थली पारसोला विराजित है आज सन्मति भवन में आयोजित धर्म सभा में प्रवचन के पूर्व आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन की धार्मिक क्रिया का सौभाग्य राजमल सरिया सौधर्म इंद्र सपरिवार एवम् राजेश पंचोलिया इंदौर को प्राप्त हुआ
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की पूजन स्थानीय महिला मंडलों द्वारा भक्ति नृत्य के साथ की गई पूजन कावाचन आर्यिका 105 महायशमति माताजी के द्वारा हुआ।
संघस्थ शिष्य मुनिश्री108 हितेंद्रसागर जी महाराज ने उपदेश में बताया कि जिनालय में भगवान के दर्शन कर उनके गुणों का स्तवन किया जाता है , भक्त कहता है कि भगवान आप बलशाली हो , पावन हो ,आपकी छवि वीतरागी है ,आप करुणा के सागर हो ,इस प्रकार अनेक प्रकार की भक्ति से गुणानुवाद करता है।




भक्त जन्म मरण का दुख दूर करने के लिए ,अपनी पीड़ा दूर करने के लिए , भगवान की शरण में आता है अपने अज्ञान रूपी अंधेरे को हटाने के लिए, कर्मों ने आत्मा को जो ढक लिया है उसे दूर करने के लिए भगवान के शरण में जाता है । ब्रह्मचारी गज्जू भैय्या ,राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया की मुनिश्री108 हितेंद्रसागर जी महाराज ने प्रवचन सभा मे आगे बताया कि एक इंद्रिय जीव से लेकर पांच इन्द्रिय जीव के क्या भेद होते हैं त्रस जीव ,स्थावर जीवों की भी सरल शब्दों में विवेचना की एक इंद्रीय जीव के अंतर्गत जलकायिक ,पृथ्वीकायिक अग्निकायिक ,वायुकायिक और वनस्पतिकायिक जीवों के बारे में बतलाया ।श्रावक को श्रद्धावान विवेकवान होकर क्रिया कार्य करना चाहिए ।
बिना प्रयोजन पानी का उपयोग ,अग्नि का उपयोग, विवेक पूर्वक करना चाहिए ताकि इन जीवों का धात नहीं हो । अनछने पानी के बारे में मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने बताया कि वैज्ञानिको ने प्रमाणित किया है कि एक बूंद अनछने पानी में 36450 जीव होते हैं जबकि जैन धर्म के अनुसार एक बूंद पानी में अनंत अनंत जीव होते हैं। जयंती लाल कोठरी , सूरज मल, महावीर ने बताया कि प्रवचन के पूर्व आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ मंदिर में पंचामृत अभिषेक एवम् बड़ी शांति धारा हुई। पंच कल्याणक समिति अध्यक्ष बाबूलाल सरिया , संपतिलाल
जैन,प्रकाश जैन एवम,ऋषभजैन से मिली जानकारी अनुसार आचार्य श्री ने नवनिर्मित समवशरण का अवलोकन किया।
जिसमे 24 भगवान के मंदिर,चार दिशा में चार मानस्तंभ में 16 प्रतिमा और ऊपर चतुर्मुख चार प्रतिमा विराजित होगी। मुख्य प्रतिमा के पुण्यार्जक सूरजमल सरिया,मान स्तम्भ के राजमल सरिया, रोड़ी बाई धाटलिया परिवार, कुंती लाल पचौरी परिवार पुण्यार्जक परिवार है। आयोजक दिगंबर दशा हुमड समाज और पार्श्वनाथ समवशरण जिन बिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव समिति द्वारा आगामी 4 मार्च से 8 मार्च 2024 तक होने वाली तैयारी पूर्ण कर सभी से धर्म लाभ लेने का अनुरोध किया है राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी 9929747312
