धर्मपूर्वक अर्थ पुरुषार्थ , मोक्ष पुरुषार्थ करने पर मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
देवली पंचम पट्टाधीश वात्सल्यवारिधी 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का मंगल विहार टोंक जिले में चातुर्मास हेतु चल रहा हैं।29 जून रात्रि विश्राम अमरवासी नगर के बाद30 जून को प्रातः विहार कर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 36 साधुओं सहित प्रथम बार देवली में मंगल प्रवेश हुआ।श्री महावीर जिनालय में अभिषेक के बाद आचार्य श्री का उपदेश हुआ। आचार्य श्री ने प्रवचन में बताया कि नगर का पुण्य होने पर संतों का आगमन और समागम मिलता है सन 1970 में दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी के साथ हमने टोंक में चातुर्मास किया था तथा आचार्यकल्प शिक्षा गुरु श्री श्रुतसागर जी महाराज के साथ अमरवासी भी आए थे पूर्व में देवली आने का स्मरण नहीं है। श्रावकों को संत समागम जागने पर प्राप्त होता हैं साधु आपको जगाने आते है जिनवाणी का स्वाध्याय करना चाहिए। संसारी प्राणी की आत्मा मोह, राग, द्वेष कषाय से ग्रसित है इसी कारण आप रोगी हैं। क्रोध मान माया लोभ के कारण संसारी प्राणी दुखी है और इसी कारण संसार का भ्रमण कर रहे हैं ।यह देशना देवली नगर प्रवेश पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म सभा में प्रकट की राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि तीर्थंकर भगवान द्वारा प्रतिपादित जिनवाणी के स्वाध्याय से रत्नत्रय से धर्म प्राप्त होता है।धर्म से लाभ होता है हानि नहीं होती है।मनुष्य जीवन दुर्लभ है धर्म का पूर्ण लाभ लेना चाहिए प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की कृपा है कि उनके पुरुषार्थ से आज दिगंबर जैन मंदिर सुरक्षित है। धर्मपूर्वक अर्थ पुरुषार्थ कर मोक्ष पुरुषार्थ करना चाहिए तभी मोक्ष की प्राप्ति होगी महावीर स्वामी के शासन में जीवन का उत्थान कर मनुष्य जीवन को सार्थक करने के लिए धर्म स्थल पर बुद्धि पूर्वक श्रेष्ठ कार्य पुरुषार्थ करना चाहिए। देवली से टोंक की दूरी 60 किलोमीटर लगभग हैं आचार्यश्री संघ के मंगल बिहार में जिले के पुरुष महिलाएं युवा उत्साह भक्ति पूर्वक धर्म लाभ ले रहे हैं। राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
