आचार्य श्री सुनील सागर वॉइस ऑफ नॉलेज सनऑफ रीनूसिएशन की उपाधि से सुशोभित 

धर्म

आचार्य श्री सुनील सागर वॉइस ऑफ नॉलेज सनऑफ रीनूसिएशन की उपाधि से सुशोभित  डूंगरपुर             अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सात दिवसीय अज्झप्प जोग शिविर का समापन हुआ। शिविर का आयोजन प्राकृत ज्ञान केसरी आचार्य सुनील सागर मुनिराज ससंघ के सानिध्य में हुआ। समापन दिवस पर सुबह 4:45 बजे बारिश के बावजूद शिविरार्थी उपस्थित रहे। आचार्य ने जल धारणा योग करवाया।

 

 

शिविर में आचार्य श्री सुनीलसागर महाराज को प्राकृत भाषा में उत्कृष्ट कार्य, 28 वर्षोंकी संयम साधना, 70 से अधिक साहित्यिक कृतियों, 191 शिष्यों को दीक्षा और प्राकृत वाणी के पुनर्जीवन के लिए वाइस ऑफ नॉलेज सन ऑफ रीनूसिएशन की उपाधि से सम्मानित किया। उन्हें यह सम्मान रायल सक्सेस इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकार्ड्स में स्थान देकर दिया।सम्मान समारोह में जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह, पूर्व राज्य मंत्री सुशील कटारा, भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक पटेल रणोली, सभापति अमृत लाल कलासुआ,उपसभापति सुदर्शन जैन भाजपा जिला मंत्री धनपाल जैन, डॉरजनीश जैन, प्रेरणा शाह, शीतलभट पूनमचंद जैन, नयन सुथार सहित  भाजपा नेता मौजूद उपस्थित रहे। सम्मान में मोमेंटो और प्रमाण पत्र भेंट किए।

इस अवसर पर कलेक्टर महोदय  ने कहा कि आचार्य श्री सुनील सागर महाराज का जीवन संयम, सेवा और साधना की प्रेरणा है। इस बेला में ममता सेवा संस्थान सागवाड़ा नेभी उन्हें मोमेंटो और प्रमाण पत्र दिया।

अहिंसा से ही  विश्व की रक्षा संभव है आचार्य श्री इस अवसर पर आचार्य श्री सुनील सागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि अहिंसा से ही विश्व की रक्षा संभव है। दोपहर में आचार्य केसानिध्य में 51 बच्चों को जैनत्वऔर ब्राह्मी संस्कार दिए। 15दंपत्तियों का दांपत्य संस्कार भीहुआ। शाम को आचार्य संघ नेअहमदाबाद चातुर्मास के लिएविहार किया। शुक्रवार रात को सुनील सागर युवा संघ नेआयोजित भजन संध्या में मुंबई के गायक अक्षत जैन एंड पार्टी ने भजनों की प्रस्तुति दी।

आचार्य श्री सुनील सागर महाराज परिचय 

पूर्व नाम: संदीप

जन्म 7 अक्टूबर 1977, तिगौडा़ (सागर, म.प्र.)

संन्यास दीक्षा: 20 अप्रैल 1997, बरुआसागर (झांसी)

दीक्षा गुरु: आचार्य श्री सन्मति सागरजी महाराज

आचार्य पद स्थापना: 25 जनवरी 2007, औरंगाबाद

पट्टाचार्य पद : 26/12/2010 कुंजवन में घोषित, उसी दिन मुंबई -गुलालवाडी़ मे पदारोहण वर्तमान शिष्य परंपरा: 143 साध्वियाँ, 85 साधुजन

प्रमुख उपलब्धियाँ:प्राकृत वाणी में प्रवचन देने वाले भारत के एकमात्र संत 70+ ग्रंथों की रचना, अनेक भारतीय भाषाओं में अनुवाद 191 शिष्यों को दीक्षा, देशभर में जिनालयों की स्थापना 36 से अधिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान संयमित दिनचर्या, वैज्ञानिक दृष्टिकोण व प्रकृति प्रेम

सक्रिय संस्थाएँ:1. आचार्य आदिसागर अंकलीकर अंतर्राष्ट्रीय जागृति मंच2. श्री सुनील सागर युवा मंच भारत3. आचार्य श्री सुनील सागर सेवा समिति, दिल्ली4. सनमती सुनीलम – आध्यात्मिक नाट्य एवं सांस्कृतिक मंचइस रिकॉर्ड की पृष्ठभूमि निर्माण मेंसभी आचार्य संग के मुनिराजों, सभी साध्वी माताजी, लेखिका सरोज शाह, प्रेरणा शाह एवं संपूर्णमती माताजी का स्नेहपूर्ण सहयोग रहा। उनके मार्गदर्शन एवं सहमति से डॉ. रजनीश जैन ने इस रिकॉर्ड हेतु रूपरेखा एवं प्रस्तुति तैयार की।यह सम्मान भारत की आध्यात्मिक धरोहर को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। आचार्यश्री सुनीलसागर जी का जीवन, संयम, सेवा और साधना की ऐसी ज्योति है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव मार्गदर्शक बनी रहेगी।

       संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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