एक संयमी का जन्म उसकी दीक्षा के साथ होता है प्रमाण सागर महाराज
सम्मेद शिखर तीर्थ
पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम शिष्य पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने पावन सम्मेद शिखर तीर्थ की तलहटी पर स्थित गुणायतन परिसर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री के विषय में कहा कि आचार्य श्री हमेशा कहते है कि एक संयमी का जन्म उसकी दीक्षा के साथ प्रारंभ होता है,इसलिये उनका जन्म दिवस न मनाकर संयम अर्थात दीक्षा दिवस मनाना चाहिये।
उन्होंने लगभग दस हजार से ऊपर आऐ अखिल भारतीय तीर्थ यात्रा संघ के यात्रियों को संबोधित करते हुये कहा कि आप सभी लोग श्रद्धा और भक्ती से भरकर शाश्वत तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर की वंदना करने आये है आपकी देव शास्त्र और गुरु के प्रति। जो श्रद्धा है वह उत्तरोतर और वृद्धि हो आप लोगों की यह तीर्थ यात्रा आपके अंदर के गुणों की वृद्धि करे।आप
लोग तीर्थ यात्रा करके सकुशल अपने अपने घर पहुंचे तो आपके अंदर का परिवर्तन देखकर लोगों को लगना चाहिये कि आप लोग तीर्थ वंदना करके आये है।

इस अवसर पर अखिल भारतीय तीर्थ यात्रा संघ के संरक्षक एवं महासमिति के अध्यक्ष गजराज गंगवाल दिल्ली एवं यात्रा संयोजक पवन गोधा दिल्ली का सम्मान गुणायतन के पदाधिकारिओं द्वारा कर उनको प्रतीक चिन्ह भेंट कर किया गया।





इस अवसर पर दयोदय महासंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विदिशा भी उपस्थित थे उन्होंने बताया शरदपूर्णिमा के अवसर पर आचार्य श्री ने सन् 1997में मुनि निर्वेग सागर जी महाराज सहित दस मुनिराजों को नेमावर में दीक्षा दी थी आज उपस्थित सभी लोगों ने मुनि श्री का 26 वां दीक्षा दिवस मनाया एवं इसी निमित्त से आचार्य गुरुदेव की भक्तीभाव से बाल ब्र. अभय भैयाजी के निर्देशन में पूजन की गयी एवं विदिशा से गुरुभक्त परिवार ने श्री सम्मेदशिखर गुणायतन पहुंचकर शांतिधारा की।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
